अट्ठाईसवे कलयुग में जी रहे हम.. जाने कलयुग की उम्र

क्या आपको पता है कि मनुष्यों के तीस वर्ष में देवताओं का एक मास होता है और मनुष्यों के 360 वर्ष में देवताओं के बारह मास का एक दिव्य वर्ष होता है। उस दिव्य वर्ष के प्रमाण से शास्त्रों में युग संख्या कही गई है।
जितने समय में पलक झपकती है उतने समय को निमेष कहते हैं।
पंद्रह निमेष की एक काष्ठा होती है।
तीस काष्ठा की एक कला होती है, तीस कला का एक मुहूर्त, तीस मुहूर्त का एक दिन-रात होता है।
पन्द्रह दिन-रात का एक पक्ष, दो पक्ष का एक मास होता है।
एक मास का पितरों का दिन रात- शुक्ल पक्ष पितरों का दिन और कृष्ण पक्ष रात्रि है।
छः महीने का एक अयन और दो अयन का एक वर्ष होता है।
मनुष्यों के एक वर्ष में देवताओं का एक दिन रात होता है, उसमें उत्तरायण देवताओं का दिन और दक्षिणायन रात्रि है।
शास्त्रकार विद्वानों ने सत्य, त्रेता, द्वापर और कलि नाम के चार युग माने हैं।
इनमें 4000 दिव्य वर्षों का सत्ययुग, 400 दिव्य वर्षों की उसकी सन्ध्या और 400 दिव्य वर्षों का सन्ध्यांश होता है।
युग के प्रथम भाग में सन्ध्या और अंत में सन्ध्यांश होता है।
परन्तु सत्ययुग के बिना दूसरे युगों के सन्ध्या और सन्ध्यांश एक एक पाद कम होते हैं अर्थात् त्रेतायुग 3000 दिव्य वर्ष और उसकी सन्ध्या 300 वर्ष तथा सन्ध्यांश 300 वर्ष, द्वापर 2000 दिव्य वर्ष, उसकी सन्ध्या सन्ध्यांश दो दो सौ वर्ष, कलियुग की आयु 1000 दिव्य वर्ष तथा संध्या और संध्या एक एक सौ वर्ष।
इस प्रकार चारों युग सन्ध्या और सन्ध्यांशों सहित 12000 दिव्य वर्षों के होते हैं।
चारों युग की संख्या मिल कर 12000 दिव्य वर्षों की एक चतुर्युगी होती है।
1 हजार चतुर्युगी का एक कल्प कहलाता है।
युगों की आयु के प्रमाण में मनुष्यों के मानवीय वर्षों की संख्या नीचे लिखे अनुसार है:
युगों के नाम       मानवीय वर्ष    पूर्व-संध्या के वर्ष         पर-संध्या के वर्ष         योग
सत्ययुग            1440000        144000                    144000                     1728000
त्रेतायुग             1080000       108000                    108000                      1296000
द्वापरयुग            720000         72000                      72000                       864000
कलियुग             360000        36000                      36000                       432000
इस हिसाब से एक चतुर्युगी में देवताओं के 12000 दिव्य वर्ष होते हैं| और मनुष्यों के 4320000 मानवीय वर्ष होते हैं और ऐसी 71 चतुर्युगियों का एक मन्वन्तर होता है।
एक कल्प में 14 मन्वन्तर या मनु होते हैं।
इस प्रकार हजारों मन्वन्तर और कल्प बीत गये, उन्हें कोई नहीं जान सकता न उसकी संख्या हो सकती है।
एक कल्प में ब्रह्मा का एक दिन होता है और उतनी ही बड़ी रात्रि होती है, इस प्रमाण से सौ वर्ष की ब्रह्मा की आयु मानी गई है।
उसमें ब्रह्मा जी के 50 वर्ष बीत चुके हैं, इक्यावनवे का आरम्भ हो रहा है।
इस कल्प में जब से सृष्टि आरम्भ हुई है यह अट्ठाईसवां कलियुग चलता है। 1
728000 वर्षों का सतयुग, 1296000 वर्षों का त्रेतायुग, 864000 वर्षों का द्वापरयुग और 4320000 वर्षों का कलियुग होता है। उसमें भी इस कलियुग के 5055 वर्ष व्यतीत हुये हैं|


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