जाने दुनिया के सबसे चर्चित आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव के बारे में , कैसा है सद्गुरु का ईशा फाउंडेशन

सद्गुरु जग्गी वासुदेव का जन्‍म 5 सितंबर 1957 को कर्नाटक राज्‍य के मैसूर शहर में हुआ। उनके पिता एक डॉक्टर थे। बालक जग्‍गी को प्रकृति से खूब लगाव था। ऐसा अक्‍सर होता था वे कुछ दिनों के लिये जंगल में गायब हो जाते थे, जहां वे पेड़ की ऊँची डाल पर बैठकर हवाओं का लुत्फ़ लेते और ध्‍यान में चले जाते थे। जब वे घर लौटते तो उनकी बोरी सांपों से भरी होती थी, ११ वर्ष की उम्र में जग्गी वासुदेव ने योग का अभ्यास करना शुरु किया। इनके योग शिक्षक थे श्री राघवेन्द्र राव, जिन्‍हें मल्‍लाडिहल्‍लि स्वामी के नाम से जाना जाता है। मैसूर विश्‍वविद्यालय से उन्‍होंने अंग्रजी भाषा में स्‍नातक की उपाधि प्राप्‍त की। 25 साल की उम्र में 23 सितम्बर को उन्होंने चामुंडी पर्वत की चढ़ाई की, वहां वे आध्यात्मिक अनुभव लेने लगे। यह अनुभव करने के 6 सप्ताह बाद ही उन्होंने अपना व्यवसाय छोड़ दिया और इस तरह का अनुभव पाने के लिए दुनियाभर की यात्रा करने लगे। इसके बाद तक़रीबन 1 साल तक ध्यान और यात्रा करने के बाद उन्होंने अपने आंतरिक अनुभव को बांटकर लोगो को योगा सिखाने का निर्णय लिया।
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सद्गुरु द्वारा स्थापित ईशा फाउंडेशन (ISHA FOUNDATION) एक सेवा संस्थान है जो लोगों की शारीरिक, मानसिक और आन्तरिक कुशलता के लिए समर्पित है। यह दो लाख पचास हजार से भी अधिक स्वयंसेवियों द्वारा चलाया जाता है। इसका मुख्यालय ईशा योग केंद्र कोयंबटूर में है।

 

ईशा योग केंद्र, ईशा-फाउन्डेशन के संरक्षण में स्थापित है। यह वेलिंगिरि पर्वतों की तराई में 150 एकड़ की हरी-भरी भूमि पर स्थित है। घने वनों से घिरा ईशा योग केंद्र नीलगिरि जीवमंडल का एक हिस्सा है, जहाँ भरपूर वन्य जीवन मौजूद है। आंतरिक विकास के लिए बनाया गया यह शक्तिशाली स्थान योग के चार मुख्य मार्ग – ज्ञान, कर्म, क्रिया और भक्ति को लोगों तक पहुंचाने के प्रति समर्पित है। इसके परिसर में ध्यानलिंग योग मंदिर की प्राण प्रतिष्‍ठा की गई है।

ग्रीन हैंड्स परियोजना (Project Green Hands) ईशा फाउंडेशन की पर्यावरण संबंधी प्रस्ताव है। पूरे तमिलनाडु में लगबग ११ करोड़ पेड़ रोपित करना, परियोजना का घोषित लक्ष्य है। अब तक ग्रीन हैंड्स परियोजना के अंतर्गत तमिलनाडु और पुदुच्चेरी में १८०० से अधिक समुदायों में, २० लाख से अधिक लोगों द्वारा ८२ लाख पौधे के रोपण का आयोजन किया है। इस संगठन ने 17 अक्टूबर 2006 को तमिलनाडु के 27 जिलों में एक साथ 8.52 लाख पौधे रोपकर गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया था। पर्यावरण सुरक्षा के लिए किए गए इसके महत्वपूर्ण कार्यों के लिए इसे वर्ष 2008 का इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार दिया गया।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव का जन्‍म 5 सितंबर 1957 को कर्नाटक राज्‍य के मैसूर शहर में हुआ। उनके पिता एक डॉक्टर थे। बालक जग्‍गी को प्रकृति से खूब लगाव था। ऐसा अक्‍सर होता था वे कुछ दिनों के लिये जंगल में गायब हो जाते थे, जहां वे पेड़ की ऊँची डाल पर बैठकर हवाओं का लुत्फ़ लेते और ध्‍यान में चले जाते थे। जब वे घर लौटते तो उनकी
बोरी सांपों से भरी होती थी, ११ वर्ष की उम्र में जग्गी वासुदेव ने योग का अभ्यास करना शुरु किया। इनके योग शिक्षक थे श्री राघवेन्द्र राव, जिन्‍हें मल्‍लाडिहल्‍लि स्वामी के नाम से जाना जाता है। मैसूर विश्‍वविद्यालय से उन्‍होंने अंग्रजी भाषा में स्‍नातक की उपाधि प्राप्‍त की। 25 साल की उम्र में 23 सितम्बर को उन्होंने चामुंडी पर्वत की चढ़ाई की, वहां वे आध्यात्मिक अनुभव लेने लगे। यह अनुभव करने के 6 सप्ताह बाद ही उन्होंने अपना व्यवसाय छोड़ दिया और इस तरह का अनुभव पाने के लिए दुनियाभर की यात्रा करने लगे। इसके बाद तक़रीबन 1 साल तक ध्यान और यात्रा करने के बाद उन्होंने अपने आंतरिक अनुभव को बांटकर लोगो को योगा सिखाने का निर्णय लिया।
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सद्गुरु द्वारा स्थापित ईशा फाउंडेशन (ISHA FOUNDATION) एक सेवा संस्थान है जो लोगों की शारीरिक, मानसिक और आन्तरिक कुशलता के लिए समर्पित है। यह दो लाख पचास हजार से भी अधिक स्वयंसेवियों द्वारा चलाया जाता है। इसका मुख्यालय ईशा योग केंद्र कोयंबटूर में है।
ईशा योग केंद्र, ईशा-फाउन्डेशन के संरक्षण में स्थापित है। यह वेलिंगिरि पर्वतों की तराई में 150 एकड़ की हरी-भरी भूमि पर स्थित है। घने वनों से घिरा ईशा योग केंद्र नीलगिरि जीवमंडल का एक हिस्सा है, जहाँ भरपूर वन्य जीवन मौजूद है। आंतरिक विकास के लिए बनाया गया यह शक्तिशाली स्थान योग के चार मुख्य मार्ग – ज्ञान, कर्म, क्रिया और भक्ति को लोगों तक पहुंचाने के प्रति समर्पित है। इसके परिसर में ध्यानलिंग योग मंदिर की प्राण प्रतिष्‍ठा की गई है।
ग्रीन हैंड्स परियोजना (Project Green Hands) ईशा फाउंडेशन की पर्यावरण संबंधी प्रस्ताव है। पूरे तमिलनाडु में लगबग ११ करोड़ पेड़ रोपित करना, परियोजना का घोषित लक्ष्य है। अब तक ग्रीन हैंड्स परियोजना के अंतर्गत तमिलनाडु और पुदुच्चेरी में १८०० से अधिक समुदायों में, २० लाख से अधिक लोगों द्वारा ८२ लाख पौधे के रोपण का आयोजन किया है। इस संगठन ने 17 अक्टूबर 2006 को तमिलनाडु के 27 जिलों में एक साथ 8.52 लाख पौधे रोपकर गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया था। पर्यावरण सुरक्षा के लिए किए गए इसके महत्वपूर्ण कार्यों के लिए इसे वर्ष 2008 का इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार दिया गया।
 
 

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