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ओशो : जाने मध्यप्रदेश के इस सपूत की मृत्यु कैसे हुयी ?

जाने उस शख्स की मृत्यु के बारे में जो उसके भक्तों के लिए उत्सव थी , एक ऐसा  महापुरुष मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के एक छोटे से गांव में पैदा हुआ लेकिन जिस के विचारों ने पूरी दुनिया को हिला दिया

 

ओशो: जिसे दुनिया ने भगवान का दर्जा भी दिया : एक विवादित , चर्चित  संत , जिसके तर्क आज तक अकाट्य हैं , इस महाज्ञानी का जन्म मध्य प्रदेश के कुचवाड़ा में

11 दिसंबर, 1931 को हुआ . जन्म के वक्त उनका नाम चंद्रमोहन जैन था. बचपन से ही उन्हें दर्शन में रुचि पैदा हो गई.

उन्होंने अपनी पढ़ाई जबलपुर में पूरी की और बाद में वो जबलपुर यूनिवर्सिटी में लेक्चरर के तौर पर काम करने लगे.
उन्होंने अलग-अलग धर्म और विचारधारा पर देश भर में प्रवचन देना शुरू किया. प्रवचन के साथ ध्यान शिविर भी आयोजित करना शुरू कर दिया. शुरुआती दौर में उन्हें आचार्य रजनीश के तौर पर जाना जाता था. नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने नवसंन्यास आंदोलन की शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने खुद को ओशो कहना शुरू कर दिया. साल 1981 से 1985 के बीच वो अमरीका चले गए. अमरीकी प्रांत ओरेगॉन में उन्होंने आश्रम की स्थापना की. ये आश्रम 65 हज़ार एकड़ में फैला था. ओशो का अमरीका प्रवास बेहद विवादास्पद रहा. महंगी घड़ियां, रोल्स रॉयस कारें, डिजाइनर कपड़ों की वजह से वे हमेशा चर्चा में रहे. इसके बाद 1985 वे भारत वापस लौट आए, भारत लौटने के बाद वे पुणे के कोरेगांव पार्क में स्थित अपने आश्रम में लौट आए. उनकी मृत्यु 19 जनवरी, 1990 में हो गई.

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कहा जाता है अमेरिकी सरकार ने ओशो को ‘थेलियम’ नाम का स्लोपॉइजन  दिया था, जिससे धीरे-धीरे वो मौत की तरफ बढ़े. अमेरिका से लौटने के बाद ओशो ने खुद बताया कि मुझमें ज़हर के लक्षण हैं. मेरा रजिस्टेंस कमजोर हो गया है. मुझे खुद इस बात का शक था. जब मुझे अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था, और बिना कोई वजह बताये उन्होंने मुझे बेल नहीं दी. इसके बाद ही मुझमें ज़हर के लक्षण के आ गये. हलाकि ओशो ने हमेशा अपने भक्तों को उनकी मौत का जश्न मानाने को कहा , और उनकी मौत के बाद हुआ भी वैसा ही |

ओशो की संपत्ति को लेकर भी विवाद है. कोर्ट में मामला चल रहा है. उनके एक अनुयायि  योगेश ठक्कर ने वसीयत को कोर्ट में चुनौती दि है उनका कहना है ये वसीयत फ़र्ज़ी है. उनका दावा है कि 1989 में बनी इस वसीयत के बारे में किसी को पता नहीं था. 2013 में अचानक इसे अमेरिका की एक अदालत में एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान पेश किया गया

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