कुण्डलिनी और चक्रों का शरीर विज्ञान से सम्बन्ध

भारत में योग विज्ञान के अंतर्गत मनुष्य के शरीर में सात चक्र बताए गए हैं हालाकि तंत्र शास्त्र में 10 चक्रों का वर्णन मिलता है | वास्तव में यह चक्र हमारे शरीर में स्थित ऊर्जा केंद्र हैं प्रत्येक चक्र के जागने पर हमें कुछ विशेष प्रकार के अनुभव होते हैं और हमारे शरीर मन और बुद्धि में अनेक प्रकार के परिवर्तन परिलक्षित होते हैं, आइए जानते हैं इन विषयों के वैज्ञानिक स्वरूप को |

इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि हमारा शरीर तंत्र और आध्यात्मिक तंत्र एक दूसरे से कैसे जुड़ें हैं ? हमारे चक्रों का हमारी शारीरिक संरचना से क्या संबंध है ?   चक्रों की वास्तविक संख्या व स्थिति क्या है ? इन चक्रों का हमारी अंतःस्रावी ग्रंथियों से क्या संबंध है और इनके कार्य क्या है ?

चक्रों को  सूक्ष्म शरीर का हिस्सा बताया जाता है लेकिन इनका स्थूल शरीर से गहरा नाता है | ऊर्जा को अपने प्रवाह के लिए हमेशा स्थूल माध्यम की आवश्यकता होती है |  स्थूल और सूक्ष्म दोनों एक दूसरे के पूरक हैं , दोनों एक दूसरे के बगैर अधूरे हैं, इसलिए सूक्ष्म शरीर की गतिविधि स्थूल  में और स्थूल शरीर की गतिविधि का प्रभाव सूक्ष्म शरीर में महसूस किया जाता है |

पीनियल ग्लैंड को हिंदी में पीयूष ग्रंथि कहा जाता है | यह बहुत महत्वपूर्ण ग्रंथि है, यह सीधे हमारे छठवे उर्जा क्षेत्र से जुड़ी होती है जिसमे 3 चक्र होते हैं ,जिसे हम थर्ड-आई चक्र भी कहते हैं, थर्ड ऑई को तीसरी आंख कहा जाता है, हालाकि ये तीन ग्रंथियों और 3 चक्रों का समूह है| आज्ञा चक्र को एक वृहद चक्र कहना उचित होगा, इसमे 2 और चक्र (विज्ञान चक्र व प्रज्ञान चक्र) शामिल हैं | हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों, संतो और योगियों ने हमारे शरीर के चक्र सिस्टम को समझा और इन सब में पीनियल ग्लैंड को सर्वाधिक महत्व दिया |


1-मूलाधार चक्र यह चक्र हमारे पेल्विस एरिया में मौजूद एंडोक्राइन ग्लैंड से संबंधित है, यहीं पर नाड़ीग्रन्थि-अयुग्मी (Ganglion-Impar), अनुत्रिक ग्रंथी (Coccygeal Ganglion), सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम  की  परा-कशेरूका(Paravertebral chains of the sympathetic nervous system) मौजूद है, यह रचनाएं हमारे शरीर के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, इन संरचनाओं के द्वारा कई अन्य महत्वपूर्ण कार्य संपादित किए जाते हैं, यहीं पर कुंडलिनी की भौतिक उर्जा स्थित है|

2-स्वाधिष्ठान चक्र -यह Sacral area है यह चक्र हमारे रीप्रोडक्टिव सिस्टम व पैरा सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम (Inferior mesenteric ganglion) से संबंधित है, इस क्षेत्र पर गति बढ़ने से प्रजनन क्षमता (रीप्रोडक्टिव सिस्टम) पर सीधा असर पड़ता है|

3-नाभि चक्र- यह एड्रिनल ग्लैंड (सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम) से संबंधित है यह हमारे भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है, एड्रिनल ग्लैंड को आपातकालीन एंडोक्राइन ग्लैंड कहा जाता है, एड्रिनल ग्लैंड कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण है, यह ब्लड ग्लूकोस लेवल को नॉर्मल रखने , रीप्रोडक्टिव हारमोंस को संतुलित बनाने और जीवन उर्जा को बरकरार रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है |

4-मणिपूर चक्र – पैंक्रियास ग्लैंड से संबंधित है जो सिंपैथेटिक और पैरा सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम से जुड़ी हुई है, यह मन को एकाग्र करती है, यही पैंक्रियास आपके शरीर में ब्लड ग्लूकोस के लेवल को संतुलित रखती है, और आपकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति को नियंत्रित करती है |

5-अनाहत चक्र – ह्रदय चक्र भी कहा जाता है, यह हार्ट से रिलेटेड है, यहीं पर थाईमस  नामक ग्रंथि मौजूद है, ये ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम से संबंधित है जो करुणा,प्रेम और मानवता  का भाव जगाती है, थाईमस ग्रंथि हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है |

6- विशुद्ध चक्र – थायराइड ग्रंथि से संबंधित है, साथ में पैराथायराइड ग्लैंड और  स्वर तंत्र भी जुड़ा हुआ है, थायराइड का सामान्य स्तर शरीर की गर्माहट और मानसिक स्थिति को संतुलित रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | कंठ में सरस्वती का वास कहा जाता है | इस चक्र के सक्रिय होने पर कंठ मधुर हो जाता है |

7-आज्ञा चक्र – यह दोनों आइब्रो के बीच मौजूद है, आज्ञा चक्र ब्रेनस्टेम और पिट्यूटरी ग्रंथि से संबंधित है, यह ग्लैंड हमारे आंतरिक वातावरण को संतुलित रखती है, ग्रंथि ऐसे हारमोंस का उत्सर्जन करती है जिनसे थाईराइड सक्रिय होता है, यहीं से ग्रोथ हार्मोन उत्सर्जित होते हैं, Adrenocorticotrophic hormone, Prolactin नामक हारमोंस भी इसी ग्रंथि से उत्सर्जित होते हैं |

8-विज्ञान चक्र- जो हमारे माथे पर होता है, यह चक्र हाइपोथैलेमस नाम की ग्रंथि से संबंधित है, इसी से हमारा मन और बुद्धि संबंधित है, इसको एंडोक्राइन ग्लैंड कि मुखिया ग्रंथि है और ये बाकी ग्लेंड्स को भी कंट्रोल करती है |

9-प्रज्ञान चक्र – यह चक्र स्त्रियाँ जहां मांग भरती हैं वहां पर मौजूद होता है, यह चक्र ब्रेन के कॉर्टेक्स से संबंधित होता है जो हमारी चेतना कि जागरूकता(Conscious awareness) से संबंधित है इसी को हम सहज बोध (Intuitive mind) कहते हैं, ये पीनियल एंडोक्राइन ग्लैंड से संबंधित है |  मस्तिष्क में पीनियल ग्रंथि रहस्यमय अनुभव पैदा करती है क्योंकि इससे एन, एन-डाइमिथाइलट्रिप्टामाइन (डीएमटी) नामक एक शक्तिशाली साइकोएक्टिव पदार्थ बनता है।

10-सहस्रार चक्र- चोटी वाले स्थान पर मौजूद होता है (Three outer layers of the neocortex of the brain) यह चक्र एक तरह का एंटीना है जो यूनिवर्सल कॉन्शसनेस से जुड़ा है, और वहां से हमारे अंदर सीधे ज्ञान का प्रवाह कर सकता है, यह चक्र ब्रह्म चेतना(सुपरकॉन्शसनेस) और अध्यात्मिक विकास(स्पिरिचुअल इवोल्यूशन) में सहायक है |

ATUL VINOD



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