क्या पैसा कमाना बुरी बात है? क्या बेईमानी से ही धनवान बना जा सकता है?

भारतीय संस्कृति मूल्य आधारित व्यवस्था है जो सत्य की पक्षधर है , इस संस्कृति को आधुनिक धन आधारित व्यवस्था ने गहरी चोट पहुचाई है, तब पैसा एक साधन था लेकिन अब पैसा ही साध्य बन गया है, पैसे कमान लक्ष्य तक सीमित होता तो ठीक था लेकिन इसे हासिल करने की जिद में जब व्यक्ति साडी हदें लाँघ दे तो चिंता की बात हो जाती है, पैसा यदि बेईमानी,छल,कपट जैसे असाध्य तरीकों की बजाये सही तरीके से हासिल किया जाए तो कोई बुराई नहीं, बेचना बुरा नहीं लेकिन आप सही चीज़ बेचे , काम कोई भी हो लेकिन यदि उनसे समाज और देश का भला न हो तो नुक्सान भी न हो, यदि यही पैसा किसी पवित्र कार्य से और पवित्र उद्देश्य से कमाया जाये तो ये भी एक यज्ञ बन सकता है, लोग आमतौर पर ये तर्क देते सुनाई देंगे कि सही तरीके से पैसा कमाया ही नहीं जा सकता लेकिन ये कोरी कल्पना है | आज पूरे विश्व में पैसा कमाने वाले अमीरों ने ये साबित कर दिया है कि मूल्य . सिद्धांत और सेवा के कार्यों से भी धन अर्जित किया जा सकता है | इस धन से मिलने वाली ख़ुशी और संतोष की कोई सीमा नहीं | 

दुनिया के विकसित देश के लोग तेज़ी से मूल्य आधारित जीवन और कार्य शैली की तरफ बढ़ रहे हैं लेकिन भारत में उल्टा हो रहा है यहाँ सच्चाई की बातें लोगों को दकियानूसी लगती हैं | धनयुग ने सबसे ज्यादा पथभ्रष्ट भारतीयों को किया है, समाजिक व्यवस्था की जगह पूँजीवादी (कैपिटलिस्टिक इकोनोमी) के दौर में लोगों ने सिस्टम की खामियों का फायेदा उठाकर जमकर फायेदा उठाया और आज भी वही जारी है |

इस बात में दो मत नहीं कि धन जीवन के संचालन में अहम भूमिका निभाता है, और देश में आज एक बड़ी आबादी धन की कमी से जूझ रही है, ये संसार प्रचुरता से भरा हुआ है यहाँ संसाधनो की कोई कमी नहीं| इतने ही साधनों से सबकी जिंदगी बेहतर बन सकती है| 

दुनिया के विकसित देश के लोग आज बुनियादी पूँजी की कमी से बाहर आ चुके हैं| भारतीय भी इससे तंगी के दौर से बाहर आ सकते हैं, ये भी जगजाहिर है की दुनिया में गरीबी से अमीरी तक पहुचने के रास्ते हैं|

एक गरीब घर में पैदा हुआ प्राइम मिनिस्टर या प्रेसिडेंट बन सकता है , एक दासी पुत्र चन्द्रगुप्त भारत का महान राजा बन सकता है बस ज़रूरत है आपको अपना चाणक्य ढूँढने की जो आपको सही रास्ता दिखा सकता है|

मै आपके सामने कुछ सवाल रख रहा हूँ जो आपको अपनी वर्तमान स्थिति का मूल्याङ्कन करने में सहायता देगी

कुछ सवाल जो आज आपको खुद से पूछना चाहिए

क्या आपका जीवनसाथी आपकी आर्थिक स्थिति से खुश हैं?

क्या आपके बच्चे आर्थिक तंगी को महसूस और बयाँ करते हैं?

क्या आपको पता है कि आप आज कहाँ खड़े हैं?

क्या आपको पता है कि आप अपनी आमदनी कैसे बढ़ा सकते हैं?

क्या आप अपनी बेहतरी के लिए सरकार से सहायता ले सकते हैं

आप कौनसा एसा काम करें कि वो आपको फिनेंसिअल मजबूती दे?

आपने वर्तमान कार्य को आप कैसे और ज्यादा प्रोडक्टिव बना सकते हैं ?

 

-अतुल विनोद पाठक

ATUL VINOD



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