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धन के चुंबक कैसे बने ? भाग्य बदलने की चाबी आपके हाथ में है |


ATUL VINOD

आज हममें से ज्यादातर लोग कम आमदनी के कारण तनाव में हैं । रोजगार और बिजनेस दोनों ही क्षेत्रों में तंगी और मंदी के कारण लोगों की नींद उड़ी हुई है । लेकिन हम सब में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपनी आमदनी को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त है, पूरी तरह से चिंता मुक्त हैं| अपनी आमदनी को लेकर संतुष्ट लोगों की संख्या बहुत कम है जबकि पैसे से परेशान लोगों की संख्या बहुत ज़्यादा है| आइए जानते हैं कैसे तंग हालातों से उबरा जाए ?

आमतौर पर धन को लेकर लोगों की चार श्रेणियां होती हैं।

 

4- सबसे नीचे वाली श्रेणी के लोग दिन-रात पैसे की चिंता करते हैं, ये लोग कर्ज में डूबे रहते  हैं सुबह से लेकर शाम तक उन्हें आर्थिक कठिनाइयों की चिंता लगी रहती है ।

3- तीसरी श्रेणी के लोग उतना ही कमा पाते हैं जितना उनका खर्च होता है, उनकी इच्छाएं अधूरी रह जाती है । वह चाहते हैं कि वह कुछ और पैसा कमाते ताकि उनकी इच्छाएं पूरी हो सकती और वो जिंदगी में और बेहतर कर सकते |

2- दूसरे नंबर पर वह लोग होते हैं जो अपनी आमदनी से ज्यादा कमाते हैं, फिर भी यह लोग अपनी आमदनी से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते ।

1-नंबर वन पर वह लोग होते हैं जो अपनी ज़रूरतों से कई गुना ज्यादा कमाते हैं, यह लोग इतना कमा चुके होते हैं कि पूरी जिंदगी भी कुछ ना करें तो भी इनका खर्च चलता रह सकता है |

आपको यह तय करना है कि आपको तलहटी में रहना है या शीर्ष (टॉप) पर

जो लोग ज्यादा पैसा कमाते हैं वो आखिर कैसे होते हैं ? क्या उनके पास कोई जादू की छड़ी है या उनके पास कोई ऐसा फार्मूला है जिससे वह अपने घर पर ही नोट बना रहे हैं ?

!!! नही !!!!

जो लोग भी बाकी लोगों से आगे होते हैं,उनमे कुछ ज़्यादा  और खास क्वालिटी होती हैं |

ऐसे लोगों के पास सफलता के लिए कुछ अधिक योग्यताएं(Qualifications) होती है , थोड़े से ज्यादा गुण (Properties , Merits , Strongpoint’s , Efficacy & Character) होते हैं, लेकिन यह अधिक योग्यताएं और अधिक गुण उसे कई गुना ज़्यादा फायदा देते हैं |

 

खास बात यह है इन लोगों की सफलता बाहर की परिस्थितियों की बजाये अंदर की योग्यताओं के चलते बढ़ती चली जाती है|  याद रखें सफलता और असफलता आपके अंदर से तय होती है न कि बाहर की परिस्थितियों से |

जो इमारत जितनी ज्यादा ऊंची होगी उसकी नींव उतनी ही मजबूत होगी |अपनी नींव को मजबूत बनाइए, इसके ऊपर ऊची , लंबी और आकर्षक इमारत बनने कोई नहीं रोक सकता | अपने अंदर की क्षमता और संभावना का दोहन करना सीखें और हर तरह की संपन्नता के लिए खुद को काबिल बनायें |

जो भी व्यक्ति आपसे ज्यादा सफल या ज्यादा आगे है , उसमें और आप में बस इतना ही अंतर है कि उसने वह जानकारी व सूत्र हासिल कर लिया है जो आप तक अब तक नहीं पहुंचे |

इंसान की सफलता और असफलता में उसके कार्मिक ऊर्जाओं  के साथ  शारीरिक, मानसिक क्षमता, भावनात्मक और आध्यात्मिक क्षमता का ही योगदान होता है |

इन चारों की क्षमताओं का निर्धारण आपके संस्कार, भाव,प्रारब्ध और ऊर्जाओं के स्तर से होता है |

प्रारब्ध (कर्म फल) जिसे हम भाग्य या किस्मत कहते हैं और कुछ नही हमे पूर्व जन्म से मिली उर्जा का स्तर है| हमारे उर्जा के समन्वित स्तर को हमारी स्पंदन आवृति (Vibrational frequency) कहा जा सकता है | इस फ्रिक्वेंसी को कुछ ख़ास तरीकों से बढ़ाकर भाग्य को भी बहुत हद तक बदला जा सकता है |

कुछ लोग जो प्रारब्ध की निम्न उर्जा के कारण अति पिछड़े घरों में पैदा होते हैं वो जाने अनजाने इसी Vibrational frequency को बढ़ाकर सम्पन्न या प्रसिद्ध हो जाते हैं |

शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्तर पर परिवर्तित करने के सूत्रों को समझने से अपने भाग्य को परिवर्तित करने की चाबी हासिल की जा सकती है |

अपना भाग्य बदलने के लिए सबसे पहले क्या करें ?

आप अपना भाग्य तभी बदल सकते हैं जब आप खुद को लेकर की गई अपनी संकुचित सोच को नहीं पता कर  लेते |

आप खुद को लेकर क्या सोचते हैं ? वह हर जगह आप के प्रदर्शन पर असर डालता है | आप कभी भी अपनी सोच के स्तर से ज्यादा नहीं हासिल कर सकते |यदि हम अपनी सोच ज्यादा कमा लेंगे तो हम उसे जल्द गवा देंगे |

जैसे मैं मानता हूं कि हर महीने 50,000 कमाने के योग्य हूं और यदि किसी महीने मुझे 60,000  मिल जाते हैं तो मैं उस 10,000 ज़्यादा पैसे को पचा नहीं पाउँगा और उसे बचाने की जगह जल्द से जल्द किसी बेफिजूल के काम में निपटा दूँगा |याद रखिए हम अंदर से जितने संपन्न है, बाहर से भी उतना ही संपन्न बन सकते हैं |

हमारे विश्वास तंत्र में हमारी जो छवि अंकित है हम उस छवि से कम या ज्यादा नहीं हासिल कर सकते हैं,  हम अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि क्षमताओं से भी बंधे होते हैं, हमारे अंदर अपने लिए उतना ही हासिल करने का लक्ष्य तय होता है, जितने हमारे परिवार के लोग हासिल कर पाते हैं |

हमें मन की इस ऊपरी सीमा (अपर-बार) को तोड़ना है, मन की विपन्नता की बेड़ियों को तोड़कर अपने अंदर एक ऐसा स्तर (Perception) बनाए जो आपको चाहिए|

कभी भी काल्पनिक स्तर तय ना करें |

यदि आप वर्तमान में 10000 कमा रहे तो पहले अपने स्तर को 20,000 या 30,000 पर ले जाएं, 10,000 कमाने वाला यदि एकदम से 1,00000 का स्तर तय कर लेगा तो यह लक्ष्य शायद ही कभी हासिल हो पाए | कमाने के अपने डर और हिचक को खत्म कर दें | अपनी योग्यता को बढ़ाने में पूरी ताकत लगा दें | ऐसे कोर्स, क्लासेस और मार्ग-दर्शकों से जुड़े जो आपकी रीप्रोग्रामिंग करें |

जो पैसा आप कमाते हैं उसे सामान खरीदने में खर्च करने की बजाये खुद को बदलने और अपडेट करने में लगायें |

मुर्गी से अंडे लेते रहने के साथ साथ उसकी सेहत का ख़याल रखना भी ज़रूरी है |

अपने काम को बेहतर ढंग से करें , जब आप किसी काम को बेहतर ढंग से करते हैं तो आपके अंदर आत्मविश्वास आता है | आप जिस काम से डरते हैं उस काम को पहले करें, उस काम को बार-बार करें तो आपका डर खत्म हो जाएगा |

तिरस्कार से ना डरे , अपनी लिमिटेड बिलीफ सिस्टम को बदलने का पूरा प्रयास करें , सीमाओं को लांघने की कोशिश करें |

खुद को अच्छा समझे और अच्छा बनाएं, खुद को पसंद करें |

अपने काम के बारे में ज्यादा सोचें |

खुद से अच्छी और उत्साहजनक बातें करें सकारात्मक संदेशों को बार-बार दोहरायें ,अपने उत्साह को बढ़ाते रहें |

बेहतर से बेहतर परफॉर्मेंस दें |

याद रखें एक सफलता से दूसरी दूसरी से तीसरी सफलता मिलती है |

विश्वास के साथ मैदान में उतरें , हार न माने ,जीतने की कोशिश करते रहे , जल्दी हथियार ना डालें |

दो तरह की सीढ़ियां होती हैं एक सीढ़ी आपको ऊपर ले जाती है और दूसरी आपको नीचे ले जाती है | ऊपर जाने वाली स्तेयर्स का चुनाव करें  |

अपने दिन को योजनाएं बनाने , ईमेल चेक करने , सोशल मीडिया के इस्तेमाल में या गैरजरूरी कामों में खर्च ना करें |

कंप्यूटर और मोबाइल को हो सके तो काम निपटाने के बाद ही प्रयोग करें |

आपका दिमाग आपके सामने कई बार नकली डर पैदा करता है, काल्पनिक भय से दूर रहें |

घर और ऑफिस से बाहर निकलें, ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिलने की कोशिश करें |

लोगों के साथ रहने की कोशिश करें अच्छे मित्र बनाएं |

क्रमशः

आप इस विषय पर अपने सुझाव व प्रश्न भी हमे भेज सकते हैं |

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