महाभारत की ‘हडिंबा’: कैसे बनी मनाली की कुलदेवी

हिडिम्बा-  हिडिम्बा का विवाह महाबली भीम से हुआ था। अज्ञातवास के दौरान भीम ने हिडिम्बा के भाई हिडिम्ब् को मार दिया था। हिडिम्ब एक राक्षस था। कहा जाता है कि हिडिम्बा अपने भाई का बदला लेना चाहती थी लेकिन, जब उसने भीम को देखा तो वह भीम पर मोहित हो गई। बाद उसकी शादी भीम से हो जाती है। इनसे एक पुत्र घटोत्कच का जन्म होता है। भीम ने हिडिम्ब को मनाली के इसी स्थान पर मारा था।

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हिमाचल प्रदेश के कुल्‍लू में मनाली में स्थित हिडिंबा देवी का मंदिर है। इसका इतिहास पांडवों से जुड़ा हुआ है। शायद इससे आप वाकिफ न हो। आपको इसी मंदिर के इतिहास आज हम रू-ब-रू कराने जा रहे हैं। आप जानते हैं कि जुए में सब कुछ हारने पर धृतराष्ट्र व दुर्योधन ने पाण्डवों को वारणावत नाम स्थान में भेज दिया था। यहां उन्हें जीवित जला देने की योजना बनाई गई थी। पाण्डवों के रहने के लिए पूरा महल लाख का बनाया गया था जो जरा सी आग लगते ही जल उठे। पाण्डवों का इस साजिश का पता चल गया और उन्होंने रात को भीतर ही भीतर एक सुरंग खोद डाली। रात को भवन में आग लगने पर वे सुरंग के रास्ते भाग निकले। इस सुरंग के रास्ते वे निकल कर गंगातट पर आ गए। नाव से गंगा को पार किया और दक्षिण दिशा की ओर बढ़े।
हिडिम्बा मन्दिर का निर्माण 1553 ईस्वी में महाराज बहादुर सिंह ने कराया था। पगोड़ा शैली इस मन्दिर की खासियत है। लकड़ी से निर्मित इस मन्दिर की चार छतें है। नीचे की तीन छतों का निर्माण देवदार की लकड़ी के तख्तों से हुआ है जबकि उपर की चौथी छत तांबे एवं पीतल से बनी है। नीचे की छत सबसे बड़ी, दूसरी उससे छोटी, तीसरी उससे भी छोटी और चौथी सबसे छोटी है। सबसे छोटी छत एक कलश जैसी नजर आती है। करीब 40 मीटर उंचे शंकु के आकार में बने इस मन्दिर की दीवारें पत्थर की है। प्रवेश द्वार और दीवार पर सुन्दर नक्काशी हो रही है। अन्दर एक शिला है जिसे, देवी का विग्रह रूप मानकर पूजा जाता है। हर साल जेष्ठ माह में यहां मेला लगता है। यहां पर भीम के पुत्र घटोत्कच का भी मन्दिर है।

जंगल में था हिंडिंब का राज-  कौरव यही सोचते रहे कि पांडवों की मौत हो गई है। यहां से बच निकलने के बाद पांडव कौरवों की नजरों से बचने के लिए जंगलों में वनवास काटते रहे। इसी दौरान जंगलों में चलते चलते वे एक राक्षस क्षेत्र में आ पहुंचे। सभी थके हुए थे। उन्हें प्यास भी लगी थी। महाबली भीम पानी लेने गए।

जब वे पानी ले कर वापिस आए तो क्या देखते हैं कि माता कुंती सहित सभी भाई थक कर सो चुके हैं। भीम इस तरह अपनी माता और भाईयों को जंगल में जमीन पर सोते देख बहुत दुखी हुए। उस जंगल में हिंडिब नाम का राक्षस अपनी बहन हिंडिबा सहित रहता था।

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