वयोवृद्ध लोगों के लिए एक अति उपयोगी संदेश..

हम में से किसी के पास भी जीवन के बहुत ज़्यादा वर्ष शेष नहीं रहे हैं तथा जाते समय हम अपने साथ यहां से कुछ भी साथ नहीं ले जा पाएंगे, इसलिए अपने मन में ज़्यादा लालसा न रखें, जो खर्च आप कर सकते हैं, करें। जो आनंद आप ले सकते हैं, लें। आप में जो भी दान करने की क्षमता है, दान दें। आप इस बारे में चिंतित न हों कि हमारे जाने के बाद क्या होगा? क्योंकि जब हम राख में मिल जाएंगे तो हम प्रशंसा या निंदा का अनुभव नहीं कर पाएंगे। सांसारिक जीवन का आनंद लेने का समय तथा आपके द्वारा कड़ी मेहनत से कमाया हुआ धन, दोनों ही, किसी काम का नहीं रहेगा!

अपने बच्चों के बारे में ज़्यादा चिंता न करें। क्योंकि बच्चों का अपना अपना भाग्य होगा तथा उन्हें अपने जीवन की राहें स्वयं चुननी चाहिये। उनकी देखभाल करें, उन्हें प्यार दें। उन्हें उपहार दें। परंतु जब भी आप चाहें, अपने धन का अपने लिए भी उपयोग एवं उपभोग, अपनी इच्छा के अनुसार, करें। पालने से कब्र में जाने तक मेहनत करते रहने से अच्छा है, ज़िंदगी का आनंद लें, जितना आप ले सकें!! 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के व्यक्ति – कृपया दौलत कमाने के लिए अपनी सेहत का व्यापार न करें। कहीं ऐसा न हो कि इस प्रकार आपका अंतिम समय और नज़दीक आ जाये। क्योंकि शायद आपके पैसे में उतनी क्षमता न रहे, जिससे आपकी सेहत खरीदी जा सके।

दौलत कमाना कब बंद करना चाहिए तथा कितनी दौलत पर्याप्त होगी-  हज़ारों हैक्टेयर उपजाऊ भूमि में उगाए गए सैंकड़ों क्विंटल चावल में से दिन भर में आपको केवल तीन मुट्ठी चावल की आवश्यकता होती है; आपके पास कितने ही बड़े महल या बंगले हों, परंतु रात को सोने के लिए आपको केवल 8 वर्गमीटर स्थान ही चाहिए। इस लिए जब तक आपके पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन तथा ख़र्च करने के लिए पर्याप्त धन है, तो आप सुखी हैं तथा इतना ही पर्याप्त है। हर परिवार की अपनी अपनी समस्याएं होती हैं। अपनी प्रसिद्धि तथा सामाजिक रुतबे के लिए दूसरों से अपनी तुलना न करें। यह कदापि न सोचें कि दूसरों के बच्चे आपके बच्चों से बढ़िया कमा रहे हैं या वे बहुत अच्छे है और हमारे नहीं, बल्कि दूसरों के सामने अपने आपको प्रसन्न, हृष्टपुष्ट, सम्पन्न रखते हुए लंबे समय तक योग्य जीवन जीने की प्रेरणा दें

जिन चीजों, लोगों तथा परिस्थितियों को आप बदल नहीं सकते, उनके बारे में चिंता करना छोड़ दें। क्योंकि इससे लाभ तो नहीं होगा उल्टे आपकी सेहत का ही नुकसान होगा। आपको अपनी खुशी तथा अपने उत्तम रहन सहन के लिए सही वातावरण स्वयं बनाना होगा। जब तक आप खुशनुमा मूड में हों, स्वस्थ हों, अच्छी बातें सोचें, प्रतिदिन अच्छा काम करें, यदि किसी की सहायता कर सकें तो करें, तथा इस प्रकार के कार्य प्रसन्नचित होकर करें। इस प्रकार से आपका प्रत्येक दिन, प्रत्येक लम्हा प्रसन्नतापूर्वक बीतेगा। यदि आप एक दिन प्रसन्नता पूर्वक बिताएंगे तो आप अपने लिए एक दिन अर्जित करेंगे। और यदि आप एक दिन अप्रसन्न रहेंगे तो आप अपनी ज़िंदगी का एक दिन खो देंगे।

यदि आप बीमार हैं और आपकी भावना प्रसन्नचित है तो बीमारी जल्दी दूर होगी; यदि आपकी बहुत ऊंची एवं प्रसन्नचित भावना रहती है तो कभी भी बीमारी आपके पास नहीं आएगी। अच्छे मूड, व्यायाम, धूप, तरह तरह के सुपाच्य भोजन, पर्याप्त मात्रा में विटामिन एवं खनिज का सेवन करने से आप अगले 25-30 वर्ष अच्छी सेहत से प्रसन्नचित होकर बिता सकते हैं।

सबसे ऊपर-  अपने चारों ओर अच्छाइयों को फैलाने की कोशिश करें, बिना यह सोचे कि प्रत्युत्तर में आपको क्या मिला या क्या मिल रहा है। Learn to cherish the goodness around…

अपने जीवनसाथी को पसंद करें, उन्हें भी प्रसन्न रखें (उन्हें शरीर का आधा भाग यूं ही नहीं माना गया है) क्योंकि वे ही आपको जवान बने रहने का अनुभव कराते हैं साथ ही यह भी अनुभव कराते है कि आप उनके लिए “आवश्यक” हैं… उनके बिना यह निश्चित है कि आप अपने आपको खो देंगे!!

 

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