EDITORMarch 25, 20201min26

शैलपुत्री माता लाइव आरती Shailputri Maa. ARTI LIVE

नवरात्रि पहला दिन (Navratri First Day): नवरात्रि के पहले दिन मां शक्ति के पहले स्वरुप मां शैलपुत्री की पूजा- अर्चना की जाती है. यह दिन मां शैलपुत्री को समर्पित माना जाता है. मां शैलपुत्री गाय की सवारी करती हैं और उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल है. मां का यह स्वरुप बहुत ममतायी है. मां शैलपुत्री को ही भगवान शिव की पूर्व पत्नी मां सती एक रूप में जाना जाता है. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के बाद उनकी आरती और कथा का पाठ किया जाता किया जाता है. आइए पढ़ते हैं मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा और आरती

मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा:

बहुत समय पहले की बात है जब प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया. दक्ष ने इस यज्ञ में सारे देवताओं को निमंत्रित किया, लेकिन अपनी बेटी सती और पति भगवान शंकर को यज्ञ में नहीं बुलाया. सती अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ में जाने के लिए बेचैन हो उठीं. इसपर भगवान शिव ने सती से कहा कि अगर प्रजापति ने हमें यज्ञ में नहीं आमंत्रित किया है तो ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है.

बहुत समय पहले की बात है जब प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया. दक्ष ने इस यज्ञ में सारे देवताओं को निमंत्रित किया, लेकिन अपनी बेटी सती और पति भगवान शंकर को यज्ञ में नहीं बुलाया. सती अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ में जाने के लिए बेचैन हो उठीं. इसपर भगवान शिव ने सती से कहा कि अगर प्रजापति ने हमें यज्ञ में नहीं आमंत्रित किया है तो ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है.

लेकिन इसके बाद सती की जिद को देखकर शिवजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की स्वीकृति दे दी. सती जब घर पहुंचीं तो उनकी बहनों ने उनपर कई तरह से कटाक्ष किए. साथ ही भगवान शंकर का भी तिरस्कार किया. दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक वचन कहे. इससे सती को काफी दुःख पहुंचा.

इस अपमान से दुखी होकर सती ने हवन की कूदकर अपने प्राण दे दिए. इसपर भगवान शिव ने यज्ञ भूमि में प्रकट होकर सबकुछ सर्वनाश कर दिया. सती का अगला जन्म देवराज हिमालय के यहां हुआ. हिमालय के घर जन्म होने की वजह से उनका नाम शैलपुत्री पड़ा.

मां शैलपुत्री की आरती :

शैलपुत्री मां बैल असवार. करें देवता जय जयकार.

शिव शंकर की प्रिय भवानी. तेरी महिमा किसी ने ना जानी.

पार्वती तू उमा कहलावे. जो तुझे सिमरे सो सुख पावे.

ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू. दया करे धनवान करे तू.

सोमवार को शिव संग प्यारी. आरती तेरी जिसने उतारी.

उसकी सगरी आस पुजा दो. सगरे दुख तकलीफ मिला दो.

घी का सुंदर दीप जला के. गोला गरी का भोग लगा के.

श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं. प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं.

जय गिरिराज किशोरी अंबे. शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे.

मनोकामना पूर्ण कर दो. भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो.


हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ