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सद्गुरु (जग्गी वासुदेव) का जीवन परिचय  : Biography of Jaggi Vasudev

योगी, दिव्य पुरुष, सदगुरु जग्गी वासुदेव अध्यात्म की दुनिया में अपना एक विशिष्ट स्थान रखते हैं।इनका जीवन गंभीरता और व्यवहारिकता एक आकर्षक मेल है, अपने कार्यों के जरिए इन्होंने योगा को एक गूढ़ विद्या नहीं बल्कि समकालीन विद्या के तौर पर दर्शाया। सदगुरु जग्गी वासुदेव को मानवाधिकार, व्यापारिक मूल्य, सामाजिक-पर्यावरणीय मसलों पर अपने विचार रखने के लिए वैश्विक स्तर पर आमंत्रित किया जाता है।

जग्गी वासुदेव एक योगी, सद्गुरु और दिव्‍यदर्शी हैं। उनको ‘सद्गुरु’ भी कहा जाता है। वह ईशा फाउंडेशन  नामक लाभरहित मानव सेवी संस्‍थान के संस्थापक हैं। ईशा फाउंडेशन भारत सहित संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड, लेबनान, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में योग कार्यक्रम सिखाता है साथ ही साथ कई सामाजिक और सामुदायिक विकास योजनाओं पर भी काम करता है। इसे संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक परिषद में विशेष सलाहकार की पदवी प्राप्‍त है। उन्होने ८ भाषाओं में १०० से अधिक पुस्तकों की रचना की है।

सद्गुरु (जग्गी वासुदेव) एक योगी, सद्गुरु और दिव्‍यदर्शी हैं। वह ईशा फाउंडेशन संस्‍थान के संस्थापक हैं। ईशा फाउंडेशन भारत सहित संयुक्त राज्य अमेरिका(USA), इंग्लैंड(ENGLAND), लेबनान(LEBANON), सिंगापुर(SINGAPORE) और ऑस्ट्रेलिया(AUSTRALIA)  में योग कार्यक्रम सिखाता है साथ ही कई सामाजिक और सामुदायिक विकास योजनाओं पर भी काम करता है
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सद्गुरु जग्गी वासुदेव का जन्‍म 5 सितंबर 1957 को कर्नाटक राज्‍य के मैसूर शहर में हुआ। उनके पिता एक डॉक्टर थे। बालक जग्‍गी को प्रकृति से खूब लगाव था। ऐसा अक्‍सर होता था वे कुछ दिनों के लिये जंगल में गायब हो जाते थे, जहां वे पेड़ की ऊँची डाल पर बैठकर हवाओं का लुत्फ़ लेते और ध्‍यान में चले जाते थे। जब वे घर लौटते तो उनकी बोरी सांपों से भरी होती थी, ११ वर्ष की उम्र में जग्गी वासुदेव ने योग का अभ्यास करना शुरु किया। इनके योग शिक्षक थे श्री राघवेन्द्र राव, जिन्‍हें मल्‍लाडिहल्‍लि स्वामी के नाम से जाना जाता है। मैसूर विश्‍वविद्यालय से उन्‍होंने अंग्रजी भाषा में स्‍नातक की उपाधि प्राप्‍त की।
पूरा नाम-  जग्गी वासुदेव
जन्म- 3 सितम्बर, 1957
जन्म- मैसूर, कर्नाटक
पिता- डॉ. वासुदेव
माता- सुशीला वासुदेव
पत्नी- विजयकुमारी
संतान- राधे जग्गी
गुरु- श्रीराघवेन्द्र राव
भाषा- अंग्रेज़ी
शिक्षा- स्‍नातक
विद्यालय- मैसूर विश्‍वविद्यालय
पुरस्कार- उपाधि पद्म विभूषण(2017)
नागरिकता- भारतीय
25 साल की उम्र में 23 सितम्बर को उन्होंने चामुंडी पर्वत की चढ़ाई की, वहां वे आध्यात्मिक अनुभव लेने लगे। यह अनुभव करने के 6 सप्ताह बाद ही उन्होंने अपना व्यवसाय छोड़ दिया और इस तरह का अनुभव पाने के लिए दुनियाभर की यात्रा करने लगे। इसके बाद तक़रीबन 1 साल तक ध्यान और यात्रा करने के बाद उन्होंने अपने आंतरिक अनुभव को बांटकर लोगो को योगा सिखाने का निर्णय लिया।
सद्गुरु द्वारा स्थापित ईशा फाउंडेशन भारत के साथ-साथ यूनाइटेड स्टेट, यूनाइटेड किंगडम, लेबनान, सिंगापुर, कनाडा, मलेशिया, यूगांडा, चाइना, नेपाल और ऑस्ट्रेलिया में भी फैला हुआ है। साथ ही इस फाउंडेशन के माध्यम से बहुत सी सामाजिक और सामुदायिक विकसित गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है
जनवरी 2017 को आध्यात्मिकता में दिए गये उनके योगदानो को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया है।

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