स्नान करते समय उच्चारणीय मन्त्र

हिंदू धर्म में स्नान एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है यह सिर्फ नहाना धोना नहीं या अंगों को बाहरी तौर पर साफ करना नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि का भी एक तरीका है, इसलिए नहाने के समय कुछ मंत्र बोलने चाहिए और यदि आप इन मंत्रों का प्रयोग करते हुए आगे बढ़ेंगे तो आपको आध्यात्मिक लाभ भी मिलेंगे , नहाते समय इन वैदिक मन्त्रों का अर्थ सहित उच्चारण करें | 

ओ३म्। आपो हि ष्ठा मयोभुवस् ता न ऊर्जे दधातन। महे रणाय चक्षसे॥१॥ अथर्ववेद १. ५. १

 

भावार्थ – ये जल सुख प्रदान करने वाले, बल – उत्साह प्रदान करने वाले और अत्यन्त रमणीय रूप को देने वाले हैं।

 

ओ३म्। यो वः शिवतमो रसस् तस्य भाजयतेह नः।

उशतीरिव मातरः॥२॥ अथर्ववेद १. ५. २

 

भावार्थ – जैसे मां बच्चों का कल्याण करती है उसी प्रकार जलों के कल्याणकारी रस को हम प्राप्त करें।

 

ओ३म्। अप्सु मे सोमोऽ अब्रवीदन्तर् विश्वानि भेषजा।

अग्निं च विश्व शं भुवम्॥३॥ अथर्ववेद १. ६. २

 

भावार्थ – परमेश्वर ने वेद मन्त्रों के माध्यम से यह बताया है कि जलों के अन्दर रोग निवारक एवं आरोग्य दायक शक्ति है तथा विश्व का कल्याण करने वाली अग्नि विद्यमान् है।

 

ATUL VINOD



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