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स्टोरी हाइलाइट्स

पॉलसन और एलज़ा  ने मिलकर 400 साल पुराने जंगली जामुन के पेड़ पर ट्री हाउस बनाया|  

केरल से हैं पॉलसन, जो अपने दादा के जमाने की कहानियां सुनते हुए बड़े हुए हैं। उनके दादाजी की कुछ कहानियाँ इतनी मज़ेदार थीं कि उन्होंने तय कर लिया कि एक दिन वह भी प्रकृति के करीब उतने ही होंगे जितना कि उनके दादा। इसलिए 2012 में दुबई में कई सालों तक अच्छी नौकरी करने के बाद वह अपनी पत्नी एल्सा और बच्चों के साथ भारत लौट आए। यहां आकर वे किसी शहर में नहीं बसे, बल्कि अपनी पैतृक जगह देवगिरी में रहकर जैविक खेती कर अच्छा जीवन जी रहे हैं। 

 

 

उनके खेतों में मौसमी फसलों के साथ-साथ कई पुराने नारियल, कटहल और जंगली जामुन के पेड़ भी हैं। इसके अलावा उनके पास चाय, इलायची और कॉफी के बागान भी हैं। प्लांटेशन 15 एकड़ में  फैला हुआ है 

 

"पॉलसन के दादाजी ने जमीन खरीदी। यह जगह मुन्नार से महज 15 किमी दूर है। दादाजी हमेशा कहते थे कि यहाँ घना जंगल है और वह बीच में खेती करते हैं।

 

दादाजी हमेशा एक कहानी सुनाते थे कि उन दिनों हाथियों का एक बड़ा झुंड हमारे खेतों से होकर गुजरता था। इसलिए दादाजी ने एक ऊँचे पेड़ पर एक छोटा सा ट्री हाउस बनाया। उसी ट्री हाउस में रहकर वह अपने खेतों की देखभाल करते थे।

 

पॉलसन अपने दादा से ट्री हाउस की कहानियां सुनकर बहुत प्रभावित हुए। उनके दिल में हमेशा यह था कि अगर उन्हें कभी मौका मिला तो वे ट्री हाउस का निर्माण करेंगे। 

 

अपने नए जीवन के बारे में एल्सा कहती हैं कि उनका परिवार 2012 तक दुबई में रहा । लेकिन सबसे बड़ी कमी थी हरियाली। पॉलसन और एल्सा दोनों में हरियाली और प्रकृति के करीब जीवन का अभाव था। इसलिए उन्होंने मुन्नार में वापस बसने का फैसला किया। 

 

 

उन्होंने कई साल पहले इसकी तैयारी शुरू कर दी थी। 

 

मुन्नार लौटने के बाद, उन्होंने सबसे पहले उन्होंने अपनी जमीन पर जैविक खेती करने का फैसला किया। 

 

अपने खेतों में पहले से ही बड़े और घने पेड़ों का निरीक्षण करने के बाद 400 साल पुराने जंगली बेर के पेड़ पर ट्री हाउस बनाने का फैसला किया। उन्होंने खेती भी शुरू की। 

 

ये ट्री हाउस दो मंजिला ऊंचा और जमीन से लगभग 10 फीट ऊपर है। इसमें कुल चार कमरे हैं और सभी में अटैच्ड बाथरूम हैं। ट्री हाउस को सहारा देने के लिए इसके नीचे चार खंभों को खड़ा किया गया है । 

 

ट्री हाउस के निर्माण में बांस, लकड़ी और धातु का व्यापक रूप से उपयोग किया गया है। पहली मंजिल में दो कमरे हैं और दोनों में एक बाथरूम और एक बालकनी है। आप उनके बगीचे को पहली मंजिल के कमरे से देख सकते हैं। 

 

वहीं दूसरी मंजिल के कमरे से आपको पहाड़ का नजारा देखने को मिलेगा। इस जगह का तापमान लगभग पूरे साल बहुत अच्छा रहता है। इसलिए ट्री हाउस को एसी-कूलर की जरूरत नहीं है। इसके बजाय स्वाभाविक रूप से यह ट्री हाउस काफी ठंडा और आरामदायक है।