जगन्नाथपुरी (Jagannath Bhagwan)- 12 दिन बाद आज फिर मंदिर में प्रवेश करेंगे भगवान जगन्नाथ

जगन्नाथपुरी-Jagannath Bhagwan

 12 दिन बाद आज फिर मंदिर में प्रवेश करेंगे भगवान जगन्नाथ
पुरी (उड़ीसा) में 1 जुलाई को खत्म हुई रथयात्रा के बाद अब भगवान जगन्नाथ(jagannath bhagwan) शनिवार को मुख्य मंदिर में आएंगे। गुंडिचा मंदिर से लौटने के बाद से ही भगवान अभी तक मंदिर के बाहर ही रथ पर ही विराजित थे। शनिवार शाम 5 बजे उन्हें रथ से उतारकर मंदिर में लाया जाएगा। इसके बाद तीनों रथों को तोड़ दिया जाएगा। इनकी लकड़ियों को भगवान की रसोई में सालभर तक ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।  

रथयात्रा लौटने के बाद भी तीन दिन भगवान को मंदिर के बाहर ही रखा जाता है। यहां कई तरह की परंपराएं होती है। शनिवार शाम को भगवान को रथ से उतारकर मंदिर के भीतर रत्न सिंहासन तक लाया जाएगा। यहां भगवान जगन्नाथ और लक्ष्मी के विवाह की परंपराएं पूरी होंगी। इसके बाद फिर भगवान को गर्भगृह में स्थापित कर दिया जाएगा।

भगवान जगन्नाथ

रथयात्रा मुख्य मंदिर में लौटने के बाद से यहां कर्फ्यू जैसी स्थिति थी। वैसे तो परंपरा ये है कि भगवान तीन दिन मंदिर के बाहर रहकर अलग-अलग रूपों में जनता को दर्शन देते हैं, लेकिन इस साल लॉकडाउन के कारण बिना भक्तों के सारी परंपराएं सिर्फ मंदिर समिति के सदस्यों और पुजारियों की उपस्थिति में हुईं। शनिवार को रथयात्रा की अंतिम परंपराएं पूरी की जाएंगी, इसमें भी बाहरी लोगों का प्रवेश नहीं हो सकेगा। 

रथ को जब खोला जाता है तो कुछ चीजें जैसे सारथी, घोड़े और कुछ प्रतिमाएं सुरक्षित रखी जाएंगी। रथ के कुछ हिस्से कारीगर अपने साथ ले जाएंगे। इसे वे अपना मेहनताना और भगवान का आशीर्वाद मानते हैं। कुछ लोग हवन के लिए भी रथों की लकड़ियां ले जाते हैं। इस तरह शनिवार को रथयात्रा का समापन हो जाएगा।

भगवान जगन्नाथ

रथ के निर्माण के लिए हर साल लगभग 2000 पेड़ों की लकड़ियां लगती हैं। जो पुरी के पास के जंगलों से ही लाई जाती है। मंदिर के पुजारी पं. श्याम महापात्रा के मुताबिक, रथ की लकड़ियां सालभर तक भगवान की रसोई में जलाई जाती हैं। कुछ लकड़िया मठों में हवन के लिए ले जाई जाएंगी। भगवान जगन्नाथ की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोई मानी जाती है, जिसमें 752 चूल्हें हैं। इसी में रोज भगवान का भोग बनता है। 

शुक्रवार की शाम को अधरापाणा नाम की परंपरा पूरी की गई। इसमें भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भाई-बहन को 3-3 मटकों में दूध, माखन, घी, पनीर आदि का भोग लगाया जाता है। तीनों प्रतिमाओं के सामने 3-3 मटके रखे जाते हैं, ये मटके 3 से 4 फीट के होते हैं, जो भगवान के होंठों तक आते हैं। एक मटके में लगभग 200 किलो दूध, मक्खन आदि होता है। भगवान को भोग लगाने के बाद इन मटकों को रथ पर ही फोड़ दिया जाता है, जिससे सारा दूध-मक्खन रथ से बहकर सड़क पर आ जाता है।
गुरुवार को भगवान(jagannath bhagwan) को सोने के गहनों से सजाया गया था। इस परंपरा में करीब 200 किलो सोने के गहने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा देवी को पहनाए गए थे। ये गहने मंदिर के परंपरागत गहने हैं, जिनकी कीमत करोड़ों में है। सालभर में एक बार ही इन गहनों का उपयोग किया जाता है। भगवान के इस स्वरूप के दर्शन करने लाखों लोग आते हैं, लेकिन इस साल ये परंपरा पुरी में कर्फ्यू लगाकर निभाई गई।
Latest Hindi News के लिए जुड़े रहिये News Puran से.

Priyam Mishra



हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



न्‍यूज़ पुराण



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ