क्या जैविकीय (Biologically) रूप से हिन्दू मुस्लिम एक हैं? जाने क्या है भारतियों की असली जाति(species) ?

क्या जैविकीय (Biologically) रूप से हिन्दू मुस्लिम एक हैं? जाने क्या है भारतियों की असली जाति(species) ?

-अतुल विनोद

फेसबुक खोलते ही देशभक्तों का दिमाग हिल जाता है| हिंदू और मुस्लिम धर्मावलंबियों की पोस्ट मानव मस्तिष्क की विनाश लीला का संकेत हैं|  हिंदू और मुस्लिमवाद में बुद्धिजीवी और पत्रकार भी कूद गए हैं|

मुस्लिम का हिन्दू के प्रति और हिंदू का मुस्लिम के प्रति मूढ़ विरोध हद दर्जे तक पहुंच गया है| वैमनस्यता की लपटें एक दूसरे को जला देने पर आमादा हैं|  रोचक बात यह है कि खुद को हिंदू-मुस्लिम मानने वाले लोगों की जैविकीय (Biologically) जाति (species) सामान है| उनकी नस्ल एक ही है|

 

धर्म और जाति के लबादे ओढ़े लोग भूल रहे हैं कि मानव निर्मित धर्म, ईश्वरीय धर्म तक पहुंचाने का सिर्फ एक माध्यम है|  हिंदू होने से कोई भारतीय नहीं हो जाता और मुस्लिम होने से कोई विदेशी नहीं बन जाता| भारतीय वह है जो यहां की मिट्टी में  पैदा हुआ और इस मिट्टी से अन्न-जल लेकर पला बढ़ा|

जो लोग एक दुसरे को आज अलग धर्म के नाते कोस रहे हैं वे अपनी मूल प्रजाति को भूल रहे हैं|

भारत में रहने वाले “भाई- भाई ” सिर्फ हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई-आपस में है भाई-भाई के नारे के कारण नहीं हो जाते, इनके भाईचारे के पीछे दरअसल वह नस्ल भी है जो यहां रहने वाले सभी लोगों में लगभग समान है| धर्म से मन भेद हो सकते हैं लेकिन नस्ल(BREED) भेद नहीं|

यदि एक दूसरे को दुश्मन की तरह देखने वाले ये  लोग अपनी असल जात का रसायन समझ लें तो झगड़ा ही खत्म|

भारत में रहने वाले लोगों की नस्त पांच प्रमुख प्रजातियों से मिलकर बनी है आर्य (नोर्डिक) ,नीग्रो (नीग्रोयड),मंगोल (मुंड, शबर, किरात),आग्नेय (औष्ट्रिक, ऑस्ट्रेलियाड, निषाद), द्रविड़ ये सभी प्राचीन भारतीयों से मिलकर भारत का अंग हो गए| एक तरह से भारत प्रजातियों का एक अजायबघर है| भले ही आप खुद को हिन्दू माने या मुस्लिम लेकिन आप इन्ही प्रजातियों का परिष्कृत संस्करण है|

जहाँ तक सवाल ईसाई, बुद्ध ,हिंदु या इस्लाम का है तो इन्हें मानने न मानने से आपकी स्पिसीज़ बदल नहीं जाती| क्योंकि जाती-प्रजाति पर उस जगह के वातावरण का भी असर होता है| नीग्रो हों या द्रविड़ लेकिन आप जिस धरती पर सदियों तक रहेंगे आप में वहां के गुणधर्म समाहित हो ही जायेंगे|

पूरी दुनिया में लगभग 3 मूल प्रजातियां और  लगभग 33 उप प्रजातियां हैं लेकिन इन सभी प्रजातियों में कुछ शारीरिक और मानसिक भिन्नताओं के बावजूद हजारों समानताएं भी हैं|  मनुष्य खुद को जाति और धर्म में कितना ही बांट ले, मूल रूप से वह मानव जाति से ताल्लुक रखता है|

भारत में आपको हर तरह के रूप रंग के लोग देखने को मिलेंगे| यहाँ की जनजातियों और अलग अलग क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में आपको पूरे विश्व की झलक मिलेगी| भारतीय हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोगों में उनकी कद-काठी रंग-रूप में अधिक समानताओं की वजह उनका सामान प्रजाति का होना ही है|

कहा जाता है कि बाहरी आक्रान्ता अपने साथ यहाँ महिलायें लेकर नहीं आये थे| उन्होंने या तो यहीं के लोगों को अपने धर्म में शामिल किया या यहाँ की महिलाओं से शादी करके जो बच्चे पैदा किये वे उस धर्म के माने जाने लगे|

मनुष्य की प्रजातियाँ बनने में लाखों साल लग गए| जब वातावरण की दशाओं में परिवर्तन हुआ तो उसके साथ-साथ अन्य जीवों की भाँति मानव-जाति की शारीरिक रचना में भी नए अन्तर आते गए| धर्म के आवरण तो मानव जाती ने हजार दो हजार साल पहले ओढ़े| विश्व की तीन प्रधान प्रजातियाँ ही मूलतः विकसित हुई और बाद में फैलती गई। इससे भी परिवर्तन आये। चमड़ी के रंग के आधार पर विश्व की प्रजातियों को तीन मोटे भागों में बाँटा गया है-
चमड़ी के रंग के आधार पर -काकेशाइड सफेद,मंगोलाइड पीली,नीग्रोइड काली इन तीनों रंगों में कई विभिन्नताएँ हैं, जैतूनी रंग से लगाकर काला, मिश्रित श्वेत, हल्का भूरा, आदि।

वालों की बनावट पर-  सीधे बाल,चिकने तरंगमय और धुंघराले बाल,ऊन जैसे काले बाल जो उलझे और घने होते हैं|

कद के अनुसार प्रजातियों के चार भाग किए गए हैं-बहुत छोटा नाटा कद,  मध्यम कद, लम्बा कद, बहुत लम्बा कद|

मुख की आकृति-  चौड़े मुख वाले, मध्यम मुख वाले, लम्वे मुख, 

सर की आकृति-लम्बे सिर वाले,मध्यम सिर वाले,  छोटे सिर वाले|

नाक का आकार - संकरी-पतली नासिका,मध्यम नासिका,चपटी-चौड़ी नासिका 
विकृत मानसिकता के लोग हर आधार पर बटने को तैयार रहते हैं| जब वो अपनी जाति के लोगों के बीच रहेंगे तो दूसरी जाति को कोसेंगे, अपने घर में बैठकर पडौसी को, मुहल्ले वालों के बीच दुसरे मुहल्ले को, सम धर्म वालों के बीच दूसरे धर्म वालों को, ४ लम्बे लोग मिल जाएँ तो नाटों का मजाक उड़ायेंगे | नुकीली नाक वाले चौड़ी नाक वालों का तो गोर कालों का| मनुष्य मूलतः अवसाद से घिरा हुआ है उसे कोसने के लिए कुछ होना चाहिए| झगड़ा ऐसे लोगों के लिए टोनिक का काम करता है वे लड़ने झगड़ने और कोसने से उर्जा लेते हैं|  अपने थिएटर में देखा होगा जब हीरो और विलेन के बीच झगड़ा होता है तो कुछ लोग कितने उत्साहित हो जाते हैं|

मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि आदमी  जानवर का ही परिष्कृत रूप है वह असल में एक जंगली प्राणी था जो विकसित होते होते आज मानव बन गया लेकिन उसकी कुछ प्रवत्तियां आज भी यथावत हैं| मनोवैज्ञानिकों के शोध से पता चला है कि व्यक्ति किसी न किसी स्तर पर किसी न किसी से झगड़ता ही रहता है| देश, राज्य, प्रदेश, देशों के समूह भी आपस में उलझते रहते हैं क्योंकि वे भी लोगों से मिलकर बने होते हैं इसलिए उनके बीच भी झगड़े होते रहते हैं| पिछले 2000 साल में ही इस धरती पर लगभग 3000 युद्ध हो चुके हैं|  जीवन के वास्तविक यथार्थ को जानते हुए भी बुद्धिजीवी भी मानसिक दिवालियापन के शिकार हैं| लोग अपने अपने समाज में विध्वंस के बीज बो रहे हैं जिसका खामियाजा उनकी ही अगली पीढ़ी को भुगतना पड़ेगा| राजनीती का काम है लड़ाना क्यूंकि इससे उन्हें किसी के पास वोट मांगे नहीं जाना पड़ता| फेसबुक ट्विटर पर गुर्राने वाले दरअसल राजनीती के वो मोहरे हैं जिन्हें खुद नहीं पता कि वे ट्रैप कर लिए गए हैं| 

 

 

 

ATUL VINOD



हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ