रणभूमि छोड़ने के लिए विवश हुए अरुण यादव..! -गणेश पाण्डेय

रणभूमि छोड़ने के लिए विवश हुए अरुण यादव..! -गणेश पाण्डेय
GANESH PANDEY 2भोपाल. प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव खंडवा लोक सभा उप चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. पिछले 6 महीने से खंडवा में चुनावी फील्डिंग कर रहे अरुण यादव रविवार को अचानक पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. ऐसा यादव ने क्यों किया? राजनीतिक पंडितों की अलग-अलग राय है.

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद अरुण यादव 6 महीने पहले से ही अपनी कर्मस्थली खंडवा लोकसभा क्षेत्र में सक्रिय रहे. जीत के लिए चुनावी जमावट की. कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से लेकर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी महासचिव मुकुल वासनिक तक को खंडवा उप चुनाव लड़ने की इच्छा प्रकट की. मतदान के 24 दिन पहले पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर चुनाव लड़ने से मना कर दिया. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से लेकर दिग्विजय सिंह तक अरुण यादव के सामने ऐसी परिस्थितियां निर्मित कर दी कि उन्हें चुनाव लड़ने से मना करना पड़ा. यह बात अलग है कि सिंधिया की तरह अरुण यादव ने पार्टी छोड़ने से इनकार किया है.

अरुण यादव ने क्यों किया इनकार

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का बार-बार यह कहना कि अरुण यादव ने मुझसे चुनाव लड़ने के लिए नहीं कहा है. बस यही से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और कमलनाथ के बीच अहम के बीच टकराव की शुरुआत हुई. चुनाव लड़ने की स्क्रिप्ट अरुण यादव ने 4 दिन पहले ही लिखी. सूत्रों की माने तो हेल्थ चेकअप कराने के बाद कांग्रेस के बुजुर्ग नेता एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से प्रदेश प्रभारी महासचिव मुकुल वासनिक ने एक बार फिर कहां की अरुण यादव खंडवा से चुनाव लड़ना चाहते है. इस पर कमलनाथ ने वासनिक से फिर वही दोहराया कि अरुण यादव ने तो चुनाव लड़ने के लिए मुझसे एक बार भी नहीं कहा है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का बार-बार यह वक्तव्य अरुण यादव को अपमानित कर रहा था. यही वजह मानी जा रही है कि अरुण यादव ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया.

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दिग्विजय सिंह की शुभकामना से भयभीत हुए अरुण

राजनीतिक पंडित संदीप पुराणिक का मानना है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह नहीं चाहते कि कांग्रेस में कोई नेता उनके बेटे जयवर्धन सिंह के लिए चुनौती बने. प्रत्याशी घोषणा के पहले सांसद दिग्विजय सिंह ने अरुण यादव को शुभकामनाएं दे दी थी. उनकी शुभकामना संदेश ने अरुण यादव को संशय में डाल दिया. अरुण यादव को लगने लगा कि कहीं वह चक्रव्यूह में तो नहीं फंस रहे हैं. कहीं चुनावी मैदान में उतरने के बाद कांग्रेस के नेता ही उन्हें हराने में न छूट जाए. ऐसा इसलिए भी कि यदि खंडवा लोकसभा चुनाव अरुण यादव जीतते तो प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की कुर्सी के लिए खतरा बन सकते हैं. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने भी शायराना अंदाज में एक ट्वीट कर अपनी भावनाओं को प्रकट किया कि 'मेरे दुश्मन भी मेरे मुरीद है शायद, वक्त बेवक्त मेरा नाम लिया करते हैं, मेरी गली से गुजरते हैं छुपा के खंजर रूबरू होने पर सलाम किया करते हैं.'

कमलनाथ के कोर ग्रुप की रही अहम भूमिका

अरुण यादव के चुनाव लड़ने से इंकार के पीछे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के कोर ग्रुप के सदस्य पूर्व मंत्री एवं विधायक सज्जन सिंह वर्मा, पूर्व मंत्री एवं विधायक बाला बच्चन, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉक्टर विजय लक्ष्मी साधौ, विधायक रवि जोशी और विधायक सचिन बिरला की अहम भूमिका रही. ग्रुप के सदस्यों ने निर्दलीय विधायक एवं कांग्रेस के बागी सुरेंद्र सिंह शेरा को पत्नी के लिए टिकट मांगने हेतु उकसाया. इसके साथ ही ग्रुप में अरुण यादव को चुनावी मैदान में चित करने के लिए भी रणनीति तैयार कर ली थी. इसकी भान लगते ही अरुण यादव ने चुनावी मैदान में पटकनी खाने से पहले ही सचेत हो गए और चुनाव लड़ने से मना कर दिया.

Priyam Mishra



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