प्रदेश में 10 लाख हेक्टेयर से अधिक जंगल जलकर खाक, नहीं हुई अफसरों पर कोई कार्यवाही: गणेश पाण्डेय

प्रदेश में 10 लाख हेक्टेयर से अधिक जंगल जलकर खाक, नहीं हुई अफसरों पर कोई कार्यवाही

बांधवगढ़ के डायरेक्टर को बचाने की कवायद तेज

केंद्र से सैंक्शन 8 करोड़, राज्य सरकार ने दिया ढाई करोड़

गणेश पाण्डेय

 

GANESH PANDEY 2भोपाल. एक दशक बाद पहली बार मप्र के जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से फैल रही हैं. बांधवगढ़, माधव नेशनल पार्क, पालपुर कूनो, और खिवनी सेंचुरी सहित प्रदेश में 10 लाख हेक्टेयर से अधिक जंगल जलकर खाक हो गए और अफसरों पर आंच तक नहीं आई. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के इतिहास में पहली बार कोर और बफर जोन में एक साथ आग लगी. बांधवगढ़ नेशनल पार्क में लगी आग को जितनी गंभीरता से पीएमओ ने लिया वहीं वन मंत्री विजय शाह और उनके अफसरों ने आगजनी की घटना को सतही तौर पर लिया. मुख्यालय में पदस्थ शीर्षस्थ अधिकांश अफसर आगजनी की घटना को बांधवगढ़ के डायरेक्टर विंसेंट रहीम की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं.

बांधवगढ़ नेशनल पार्क के कोर और बफर एरिया में आग की घटना से एक हफ्ता होने को आ रहा है, किसी भी अधिकारी पर कार्यवाही नहीं हो पाई. इस घटना में बांधवगढ़ नेशनल पार्क के मगदी, खितौली, पतौर, मानपुर, पनपथा और ताला जोन सबसे ज्यादा नुकसान ही हुई है. वन मंत्री विजय शाह ने बांधवगढ़ में लगी आग की नुकसानी का आकलन 1% बताया है. जबकि उन्हें शायद यह पता नहीं होगा कि बांधवगढ़ नेशनल पार्क का बफर और कोर एरिया मिलाकर 1536 वर्ग किलोमीटर का एरिया है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक परसेंट एरिया कितना होगा? दिलचस्प पहलू यह है कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी आलोक कुमार करके दे रहे हैं कि हाथियों को भगाने के लिए आग लगाई गई. उनका यह तर्क वन्य प्राणी विशेषज्ञ अधिकारियों के गले नहीं उतर रहा है, क्योंकि आगजनी के समय हाथियों को भागते हुए किसी ने भी नहीं देखा. सतपुड़ा भवन में प्रधान मुख्य वन संरक्षक से लेकर अपर प्रधान मुख्य संरक्षक तक यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिरकार बांधवगढ़ नेशनल पार्क के डायरेक्टर को क्यों बचाया जा रहा है?
बांधव गढ़ जंगल

* न बजट न फायर लाइन का काम, आग तो लगनी ही थी

लंबे अरसे बाद पहली बार आगजनी की घटनाएं बढ़ रही है. फील्ड के अधिकारियों का मानना है कि फायर लाइन कार्य के लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया जा रहा है. फायर लाइन कार्य के लिए वन विभाग ने केंद्र सरकार से 40 से 50 करोड़ रुपए की राशि का प्रस्ताव भेजा था. केंद्र सरकार ने प्रदेश के प्रस्ताव पर कटौती करते हुए 20 प्रतिशत राशि 60-40 अनुपात में स्वीकृति किया. यानी केंद्र सरकार ने 8 करोड रुपए में से 4 करोड़ 80 लाख रुपए वन विभाग को आवंटित किए. एक सीनियर अधिकारी के अनुसार राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा आवंटित राशि में भी कटौती करते हुए ढाई करोड़ रुपए ही दिए. यह राशि ऊंट के मुंह में जीरा के समान है. बजट के अभाव में वन विभाग के मैदानी अफसरों ने फायर लाइन का काम नहीं किया, इसीलिए आग की घटनाएं बढ़ी. फायर लाइन का काम 15 नवंबर से लेकर 15 फरवरी तक किया जाता है.

* चौकीदार के नाम पर फर्जीवाड़ा

वन विभाग में चौकीदार के नाम पर फर्जीवाड़ा का काम बदस्तूर जारी है. फायर लाइन के बाद फरवरी में जंगलों की रखवाली के लिए चौकीदारों की नियुक्ति की जाती है. चौकीदारों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है. यानी मुख्य वन संरक्षक से लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी पांच-पांच चौकीदारों को अपने बंगले पर बेगारी के लिए तैनात करते हैं. यानी जिन चौकीदारों को वनों की सुरक्षा करनी चाहिए वे बड़े अफसरों के यहां चाकरी करते हैं.

* जनता में नाराजगी की वजह से घटनाएं बढ़ी

संयुक्त वन प्रबंधन के बंद किए जाने के बाद से मैदानी अफसरों और स्थानीय पब्लिक के बीच वैमनस्यता की दीवार बढ़ती जा रही है. खास तौर से बांधवगढ़ नेशनल पार्क के डायरेक्टर विंसेंट रहीम और स्थानीय पब्लिक के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं. दरअसल बांधवगढ़ नेशनल पार्क के डायरेक्टर के पुत्र कि कई बार स्थानीय गाइड और टूरिस्ट ड्राइवरों के बीच विवाद की स्थिति भी बनी है. यही कारण है कि आगजनी की घटना होने पर पाठ प्रबंधन को समय पर जानकारी नहीं दी गई.

* आगजनी के प्रमुख कारण

- अतिक्रमणकारियों की वन भूमि पर वक्र दृष्टि. आग लगाने के पीछे फॉरेस्ट भूमि पर कब्जा करना रहता है.
- शिकारी भी आग लगवाते हैं. इसका ताजा उदाहरण उत्तर बन मंडल बैतूल मैं सोमवार को पकड़े गए शिकारी हैं. शिकारियों ने सारणी के रेंज के एक इलाके में आग लगा दी. दूसरे क्षेत्र में जानवर का शिकार करने के लिए घात लगाकर बैठे थे. समय रहते हुए अफसरों ने उसे धर दबोचा.
- अवैध कटाई को छुपाने के लिए भी आग लगाई जाती है, ताकि काटे गए टूठ आग में जलकर खाक हो जाएं.
* आगजनी के नाम पर करोड़ों की खरीदी का प्रस्ताव तैयार
वन मंत्री विजय शाह ने आगजनी की घटनाओं पर कंट्रोल करने के लिए करोड़ों रुपए की कीमती यंत्रों की खरीदने का प्रस्ताव तैयार कराया है. यह खरीदी कैंपा फंड से किए जाने की खबर है. पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक आर डी शर्मा ने सवाल उठाया है कि जब तक फील्ड में स्थिति चुस्त और दुरुस्त नहीं होगी तब तक हवाई यंत्रों से आग को नहीं बुझाया जा सकता.

Priyam Mishra



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