उज्जैन के एक राजा… जिसे पत्नी की बेवफाई ने बनाया महायोगी: कैसे पकड़ी गई रानी? STORY OF BHARATHARI

एक राजा जो पत्नी के विश्वासघात से बन गया महायोगी- उसकी रहस्यमयी तप-गुफा आज भी है चेतना से भरपूर

यहाँ से जाता है चार धाम का रास्ता- उज्जैन के इस महापुरुष कि अद्भुत कहानी

 कहते हैं कि प्रेम में धोखा खाने के बाद इंसान या तो देवता हो जाता है या टूटकर बिखर जाता. वह क्रूर भी हो जाता है. उज्जैन के इतिहास प्रसिद्ध सम्राट विक्रमादित्य के बड़े भाई राजा भर्तहरी अपनी पत्नी के विश्वासघात से आहत होकर महायोगी बन गये और देवत्व को प्राप्त हुए.

राजा भर्तहरि अपनी पत्नी पिंगला से बहुत प्रेम करते थे. उन्हें उस पर बहुत विश्वास था. पत्नी के प्रति वह इतने आसक्त हो गये, कि कर्तव्यों तक को भूल गए। उस समय नाथ पंथ के महान योगी गोरखनाथ उनके दरबार में आये. भर्तहरि के आदर सत्कार से गोरखनाथ ने प्रसन्न होकर  राजा एक चमत्कारी फल दिया. गोरखनाथ ने कहा कि इसे खाकर तुम हमेशा युवा और सुंदर रहेंगे.

राजा ने फल लेकर विचार किया वह सदा जवान और सुंदर रहकर क्या करेगा. वह अपनी तीसरी पत्नी पर बहुत आसक्त था. उसने सोचा कि अगर यह फल पिंगला खा ले तो वह सदा सुंदर और युवा बनी रहेगी. राजा ने पिंगला को वह फल दे दिया. रानी राज्य के कोतवाल पर मोहित थी. राजा ने जब यह फल रानी को दिया तो उसने सोचा कि यह फल अगर कोतवाल खाएगा तो वह लंबे समय तक उसकी इच्छाओं को पूरा कर सकेगा.उसने फल कोतवाल को दे दिया. कोतवाल एक वैश्या से प्रेम करता था. उसने चमत्कारी फल उसे दे दिया, ताकि वैश्या सदैव जवान और सुंदर बनी रहे. वैश्या ने सोचा कि अगर वह जवान और खूबसूरत बनी रहेगी तो उसे वैश्यवृति से कभी मुक्ति नहीं मिलेगी.इस फल की ज्यादा जरूरत राजा को है। वह सदा युवा रहेंगे तो लंबे समय तक प्रजा का पालन कर सकेंगे. यह सोचकर उसने फल राजा को दे दिया। राजा वह फल देखकर हतप्रभ रह गया.

राजा के पूछने पर वैश्या ने बताया कि फल उसे कोतवाल ने दिया है. भर्तहरि ने कोतवाल को बुलवा कर पूछा तो उसने बताया कि यह उसे रानी पिंगला ने दिया है. जब भर्तहरि को पूरा सच पता चला तब वह समझ गया कि रानी पिंगला ने उसके साथ धोखा किया है. भर्तहरि के मन में वैराग्य जाग उठा. वह राजपाठ अपने छोटे भाई विक्रमादित्य को सौंपकर उज्जैन की एक गुफा में गए, जहाँ उन्होंने 12  वर्ष तक तपस्या की थी. उज्जैन में राजा भर्तहरि की गुफा स्थित है. यह आज भी आध्यात्मिक चेतना से भरपूर है. ध्यान का थोड़ा सा भी अभ्यास करने वाले को वहाँ बहुत अच्छी अनुभूति होती है. 

भर्तहरि संस्कृत के बहुत अच्छे कवि थे. उन्होंने श्रृंगार शतक और नीति शतक की रचना की थी. वैराग्य होने पर उन्होंने वैराग्य शतक लिखा. ये तीनों कृतियाँ संस्कृत साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं.

राजा भृर्तहरि की गुफा उज्जैन सिटी से कुछ दूर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है. यह गुफा नाथ संप्रदाय के साधुओं की साधना स्थली है. गुफा में जाते ही सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है, लेकिन थोड़ी देर में स्थिति सामान्य हो जाती है. गुफा की ऊंचाई बहुत कम है. रौशनी भी काफी कम है.गुफा में भर्तृहरि की प्रतिमा के सामने एक धुनी भी है, जिसकी राख हमेशा गर्म ही रहती है। राजा भृर्तहरि के साधना स्थल के सामने ही एक अन्य गुफा भी है.कहा जाता है कि इस गुफा से चारों धामों के लिए रास्ता जाता है.

 

Betrayed in love, a king turns mahayogi- Mysterious meditation cave exists till this day

A way goes through here to four pilgrim centres- Fabulous story of a great man of Ujjain

Nobody knows it better than those who faced betrayal in love. Some, after that shattering blow, display stoicism, or, some others go to the other end of spectrum exhibiting a streak of cruelty. Legendary king of Ujjain Raja Bharthari, the elder brother of famous king Vikramaditya became a mahayogi after his one of his three wives, he was madly in love with, betrayed him.


Smitten by the love of his wife Pingla, king Bharthari came to trust her a lot to the extent that he forgot duties towards his subjects. When Nath sect’s great ascetic, Yogi Gorakhnath came visiting his durbar, Bharthari left no stone unturned to treat him with the utmost respect and sincerity. Happy with his warmth and care, Gorakhnath gave him a fruit saying that it would always keep him young and handsome.

After receiving the fruit, king Bharthari thought to himself if he consumed the miracle fruit he would eternally remain young and dapper. Somehow this thought did not appeal him for long. As he was besotted with Pingla, he thought it would be great if he gave it to her. Thinking if she ate the fruit, Pingla would ever remain young and beautiful, he gave the fruit to her queen. But she had a liking for a police officer. She thought if she gave this wonder fruit to the police officer, he would keep her happy for long. Without having any idea about where this fruit will go, she handed over the fruit to the police officer. As he was in love with a prostitute, the police
officer gave it to her, thinking it would keep her young and beautiful forever. Once the fruit came her way, she pondered if she consumed it she would never be able to get out of the vicious cycle of prostitution. She thought it would serve the purpose a lot better if she gave the fruit to the king. This way, she concluded, the king
would always remain young and serve his subjects in a better manner. Once convinced about it, she gave the fruit to the king. Upon seeing the fruit, Bharthari was taken aback.

Upon enquiring, the prostitute told the police officer gave her the fruit. When the king summoned the police officer, he told him that queen Pingla gave it to him. Realising that the queen betrayed him, Bharthari lost interest in the kingdom.  Disillusioned with the turn of events, the king handed over charge of the kingdom to his younger brother Vikramaditya. Legend has it Bharthari went to a cave in Ujjain where he meditated for 12 years. The cave is still in existence and is full of spiritual consciousness. People who visit this place get good vibes and feel better.

Bharthari was a Sanskrit poet of great eminence. He is remembered for his famous Shringar Shatak and Niti  Shatak works. He also penned another famous work Veragya Shatak. All three works are his priceless gift to Sanskrit literature.

King Bharthari’s cave is at a small distance from historic Ujjain city on the banks of sacred Kshipra river. This cave is the site of meditation for sadhus of Nath sect. Once a person enters the cave, he finds it difficult to breathe. After some time, the situation turns normal. The cave height is low and ashes before the statute of
Bharthari remains warm. Across this meditation site, there is another cave.  It is said a way goes through this cave to four Hindu pilgrim centres (dham).

 


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