• India
  • Sun , May , 19 , 2024
  • Last Update 02:20:PM
  • 29℃ Bhopal, India

अखंड भारत का विचार, क्या अन्य राष्ट्र हो जाएंगे तैयार? सोचना यह है कि वर्तमान भारत क्या सह सकता है, भार? सरयूसुत मिश्र

सार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के अखंड भारत के विचार पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है| अखंड भारत के विचार से असहमत राजनीतिक दल भले ही प्रतिक्रिया दे रहे हों, लेकिन यह विचार ऐसे ही व्यक्त नहीं किए गए हैं, इसमें विश्व के वर्तमान हालातों में भारतीय उपमहाद्वीप की बढ़ती भूमिका को मजबूती देने की दृष्टि शामिल है..!

janmat

विस्तार

अभी इस विचार को कल्पना, सपना, संकल्प कुछ भी कहा जा सकता है लेकिन यह विचार भविष्य का संसार निर्धारित करेगा| विभिन्न राजनीतिक दलों ने अखंड भारत के विचार को भारत की समस्याओं से जोड़कर, पहले उनके समाधान की दृष्टि से अपनी प्रतिक्रिया दी है| भारत ने हाल के वर्षों में आरएसएस की विचारधारा के कई प्रयासों को सफल होते देखा है| अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और कश्मीर में धारा 370 की समाप्ति, भारत की ऐसी सफलता है जिसके बारे में पहले सोचा भी नहीं जा सकता था|

विश्व में कई ऐसे उदाहरण हैं जहां अलग अलग हुए देशों के बीच एकीकरण हुआ है| अखंड भारत का विचार कोरी कल्पना नहीं है यह भी साकार हो सकता है| हम एक कल्पना करके देखते हैं कि वर्तमान परिस्थितियों में अखंड भारत का स्वरूप कैसा होगा| अखंड भारत के भौगोलिक क्षेत्र में जितने राष्ट्र आते हैं अगर वह राष्ट्र 20-25 साल नहीं, वर्तमान में ही अखंड भारत के लिए तैयार हो जाएं, तो वर्तमान भारत की क्या स्थिति होगी?

इंटरनेट पर अखंड भारत के जो विवरण उपलब्ध हैं उनमें शामिल भौगोलिक क्षेत्रों में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, तिब्बत, नेपाल, भूटान और म्यांमार शामिल है| भारत को छोड़कर अखंड भारत के दूसरे सभी राष्ट्र आज आर्थिक संकट और गरीबी के दौर से गुजर रहे हैं|

श्रीलंका तो कर्जे और खाद्य संकट से कराह रहा है| वहां जनता सड़कों पर संघर्ष कर रही है| उसने जिन देशों से कर्जा लिया है उनमें चीन भी शामिल है| श्रीलंका को आज ऐसे उद्धारक की तलाश है जो इस संकट से उसे उबार सके|  यद्यपि भारत संकट के समय उसकी मदद कर रहा है लेकिन अखंड भारत की कल्पना में शामिल इस राष्ट्र को उबारने में भारत क्या सक्षम है?

अब हम पाकिस्तान की बात करते हैं यह राष्ट्र भी कर्ज में डूब चुका है| वहां की शासन व्यवस्था के हालात चिंतनीय हैं| आतंक और धार्मिक कट्टरता के कारण पाकिस्तान पूरी दुनिया के लिए संकट बना हुआ है| इसे  अब कोई देश कर्जा नहीं दे रहा है| भारत के साथ शत्रुता के कारण पाकिस्तान को अपने वजूद के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है| पाकिस्तान का बड़ा क्षेत्र बलूचिस्तान, सिंध और पाक के कब्जे वाला कश्मीर, वैचारिक रूप से पाकिस्तान से अलग होना चाहते हैं| अखंड भारत में भारत और पाकिस्तान एक साथ कैसे चल पाएंगे यह तो बहुत गंभीर विषय लगता है?

अखंड भारत की भौगोलिक सीमाओं में अफगानिस्तान भी शामिल है| अफगानिस्तान में तालिबान की कट्टरता और संघर्ष ने पूरे अफगानिस्तान की क्या हालत कर दी है| वहां कोई भला मानुस रहना नहीं चाहता है| दुनिया की सुपर पावर वहां से थक हार कर वापस चली गई| शांतिप्रिय भारत के निवासी अफगानी कट्टरता और नफरत को कैसे बर्दाश्त करेंगे?

भारत, जहां स्त्रियों को पूजनीय माना जाता है, स्त्रियों के प्रति तालिबानी मानसिकता को कैसे एडजस्ट कर सकता है|बांग्लादेश के हालात भी अच्छे नहीं हैं, बांग्ला घुसपैठियों की भारत में कितनी बड़ी समस्या है| घुसपैठियों का ही समाधान हम नहीं निकाल पा रहे हैं तो अखंड भारत में बांग्लादेश को वर्तमान भारत कैसे सहन कर सकता है|

नेपाल, भूटान में राष्ट्रों की आंतरिक स्थितियां बहुत सुखद नहीं हैं| म्यांमार में तो हालात विस्फोटक हैं| वहां अभी वर्तमान में मिलिट्री रूल है| भारत में घुसपैठियों की स्थिति विस्फोटक हो गई है| तिब्बत चीन के अधीन है| अखंड भारत की सीमाओं में जो भी राष्ट्र बताए जा रहे हैं उनमें श्रीलंका, भूटान और म्यांमार बौद्ध राष्ट्र हैं| तिब्बत भी बौद्ध आस्था का ही राष्ट्र  है| नेपाल हिन्दू बाहुल्य राष्ट्र है| बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान इस्लामिक राष्ट्र हैं|

आज के हालात को देखते हुए अखंड भारत की भौगोलिक सीमाओं में शामिल राष्ट्रों के हालात अच्छे नहीं हैं| वे सभी राष्ट्र अपनी आंतरिक स्थितियों और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं| भारत की स्थिति भी कमोबेश इसी तरह की है| यह जरूर है कि पिछले एक दशक से भारत में आए राजनीतिक बदलाव के कारण, भारतीय संस्कृति और गौरव को नई बुलंद आवाज मिली है| इसी कारण अखंड भारत का विचार भी ताकत से सामने आता दिखाई पड़ रहा है|

वर्तमान भारत जाति, धर्म, भाषा, प्रांत, अमीरी-गरीबी, शिक्षित-अशिक्षित में खंड खंड विभाजित है| आजादी के इतने सालों बाद भी हमें सांप्रदायिक दंगा झेलना पड़ता है| देश की अर्थव्यवस्था किस हालत में है, इन्फ्लेशन और महंगाई डरावनी लग रही है| बेरोजगारी चरम पर है| समाज में एकता और भारतीयता की भावनाओं की मजबूती के लिए कानूनों का सहारा लेना पड़ रहा है|

परम सत्ता के चक्र की पहली इकाई परिवार किस हालात में हैं? विवाह विच्छेद, माता-पिता का सम्मान, और भरण-पोषण के लिए भारत भूमि पर कानून बनाने की जरूरत पड़ गई है| घरेलू हिंसा क्या भारत की सोच है? जातियों में समाज बटा हुआ है| परमात्मा द्वारा हर इंसान को एक यूनिक आईडी आत्मा के साथ धरती पर भेजा गया है| भारत ने सदियों से दुनिया को योग, ध्यान, अध्यात्म जैसा जीवन दर्शन दिया है| भारत का जीवन दर्शन और संस्कार अपनाकर दुनिया के लोग सुखी और शांति से जीवन बिता रहे हैं| भारत के अंदर क्या स्थिति है?

विवादों के चलते भारत सीएए और एनआरसी लागू नहीं कर पा रहा है| देश 80 और 20 में बटा हुआ है| राजनीतिक सत्ता चाहे 80 के समर्थकों के पास हो चाहे 20 के समर्थकों के पास| क्या कोई गुणात्मक परिवर्तन वास्तव में दिखाई पड़ता है?इसकी भी कल्पना करना जरूरी है कि अखंड भारत में 80 और 20% जनसंख्या की स्थिति क्या होगी? क्या भारत की संस्कृति का सनातनी और अनादि स्वरूप मिट जाएगा?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने जो विचार दिया है वह वर्तमान हालातों में कैसे  पूरा होगा? धीरे-धीरे अखंड भारत की साकार होती परिकल्पना को समझना और देखना हर भारतीय के  जीवन के लिए बड़ी महत्वपूर्ण घटना होगी|

अखंड भारत में सभी राष्ट्रों का विलय होगा| क्या सांस्कृतिक रूप से भारत का महासंघ बनेगा? यह बात अब बिलकुल क्लियर है कि विश्व में भारत का स्थान लगातार प्रभावी और मजबूत होता जा रहा है| भौगोलिक क्षेत्र के राष्ट्रों की आज जो हालत है उसको शायद वर्तमान भारत या अखंड भारत दोनों सहन नहीं कर सकेंगे|

परम वत्सला, महा मंगला मातृभूमि के विरुद्ध माओवादी सोच आज भी भारत के लिए परेशानी का बड़ा कारण है| परम वैभव की कल्पना को पूरा करने के लिए खंड-खंड बटे भारत को सबसे पहले अखंड बनाने की जरूरत है| हम वर्तमान भारत से ही जाति धर्म भाषा प्रांत संप्रदाय के खंड खंड विभाजन को दूर कर सकें तो यही भारत विश्व गुरु की भूमिका निभा सकता है|