‘गर्दन के दर्द’ को अनदेखा न करें, बढ़ सकती है आपकी परेशानी..

आपका निजी काम हो या ऑफिस का, आपकी ही गर्दन के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं।
आज के समय में गर्दन में दर्द होना एक बढ़ता व्यावसायिक खतरा है। लगभग 80% नौकरियों में गतिहीन होने के साथ, अक्सर कंप्यूटर स्क्रीन के सामने कई घंटों तक बैठे रहने की आवश्यकता होती है। स्मार्टफोन और अन्य उपकरणों ने भी लंबे समय तक लोगों को अपनी गर्दन झुकाने के लिए मजबूर कर दीया  है। 
लेकिन क्या केवल गलत मुद्रा में बैठना ही गर्दन में दर्द का कारण है ?

हाल के ही एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया है कि खराब आसन, बॉडी मास इंडेक्स, उम्र, वास्तव में गर्दन के दर्द को प्रभावित करते हैं। 

गर्दन का दर्द दुनिया में विकलांगता के प्रमुख और सबसे तेजी से बढ़ने वाले कारणों में से एक है। गर्दन के दर्द को वैश्विक विकलांगता के चौथे प्रमुख कारण के रूप में स्थान दिया गया है। 

आपको बताते हैं गर्दन के दर्द के मुख्य कारण क्या हैं .. 
  • गर्दन के दर्द के लिए जीवनशैली को जिम्मेदार ठहराया गया है, खासकर जब लोग अपनी गर्दन को लंबे समय तक आगे झुकाकर अपना समय व्यतीत करते हैं।
  • अत्यधिक तनाव भी दर्द का एक प्रमुख कारण बन रहा है।
  • सोते समय बॉडी का पोश्चर कैसा रहता है, यदी आपको एक ही करवट सोने की  आदत है तो वो आने वाले समय में आपके लिए घातक बन सकती है।
  • सोते वक्त ज़रुरी है तखिये का सही चुनाव, गर्दन के लेवल तक का ही तखिया लगांए, ज्यादा ऊंचा तखिया गर्दन के लिए नुकसान दायक होता है।
  • योग करते वक्त भी अपनी शारीरिक क्षमता से ज्यादा बल देना भी दर्द बढ़ता है।
  • शीर्शासन उनके लिए  वर्जित है जो पहले से ही गर्दन  के दर्द से परेशान हैं।
  • लंबे  समय  तक एक ही मुद्रा में बैठना भी एक ठोस वजह है।

 


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