उत्तराखंड में संवैधानिक संकट से बचने के लिए सीएम तीरथ सिंह का इस्तीफा

उत्तराखंड में संवैधानिक संकट से बचने के लिए सीएम तीरथ सिंह का इस्तीफा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने शुक्रवार को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को अपना इस्तीफा सौंप दिया। दिल्ली से आने के साथ ही वे मुख्यमंत्री पद से आधिकारिक रूप से इस्तीफा देने के लिए राजभवन पहुंचे। रावत ने अपने इस्तीफे में जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 131-ए का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बनने के छह महीने के भीतर उन्हें चुना नहीं जा सकता। इसलिए संवैधानिक संकट से बचने के लिए उनके लिए इस्तीफा देना जरूरी है। तीरथ सिंह के इस्तीफे के बाद शनिवार को विधानसभा पार्टी की बैठक होगी जिसमें नया मुख्यमंत्री चुना जाएगा। नए मुख्यमंत्रियों के रूप में सतपाल सिंह और धनसिंह रावत के नामों पर चर्चा हो रही है।

tirath singh rawat
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखे पत्र में तीरथ सिंह ने कहा कि उन्हें धारा 16-ए के तहत मुख्यमंत्री बनने के छह महीने के भीतर विधानसभा का सदस्य बनना था, लेकिन धारा 121 के तहत उपचुनाव नहीं हो सका। विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा था। नतीजतन, मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहता हूं ताकि उत्तराखंड में संवैधानिक संकट पैदा न हो।

दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद रावत उत्तराखंड के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पर उतरकर सीधे राजभवन पहुंचे। उत्तराखंड में अब चार महीने से भी कम समय में तीसरा मुख्यमंत्री होगा। त्रिवेंद्र सिंह रावत वर्तमान विधान सभा के कार्यकाल के दौरान लगभग चार वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे, लेकिन चमोली त्रासदी के बाद त्रिवेंद्र सिंह के स्थान पर तीरथ सिंह रावत मुख्यमंत्री बने। वह केवल चार महीने ही सीएम रहे और अब उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उत्तराखंड में नए राजनीतिक आंदोलन के मद्देनजर नए मुख्यमंत्री के चयन के लिए शनिवार को विधायक दल की बैठक होगी। बैठक के लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है और वह शनिवार को देहरादून के लिए रवाना होंगे।

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मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को शुक्रवार को दिल्ली तलब किया गया है। इसके अलावा भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं सतपाल महाराज और धनसिंह रावत को भी दिल्ली बुलाया गया था। तीरथ सिंह ने दिल्ली दौरे के दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।

उत्तराखंड में अगले साल जनवरी में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। तीरथ सिंह मुख्यमंत्री बनने के बाद से सदन के सदस्य नहीं बन पाए हैं। मुख्यमंत्री बनने के लिए छह महीने के भीतर सदन का सदस्य बनना होता है। तीरथ सिंह रावत 10 मार्च, 2021 को मुख्यमंत्री बने और उन्हें 10 सितंबर तक निर्वाचित होना था। हालांकि, संवैधानिक शर्तों के चलते अब राज्य में उपचुनाव कराना संभव नहीं है। इसलिए संवैधानिक संकट से बचने के लिए तीरथ सिंह का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना जरूरी हो गया है।

तीरथ सिंह रावत के जाने के बाद उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री के तौर पर नए नामों पर चर्चा हो रही है। सतपाल महाराज, धनसिंह रावत, रेखा खंडूरी और पुष्कर सिंह धामी के नामों पर फिलहाल चर्चा हो रही है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक यहां सिर्फ एक राजपूत या सिंह नेता को ही मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। साथ ही पार्टी यह सुनिश्चित करेगी कि नया नेता विधान सभा का सदस्य हो ताकि दोबारा संवैधानिक संकट पैदा न हो।

Priyam Mishra



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