कोरोना और न्यू लव-एडू  जेनरेशन …. P ATUL VINOD 

कोरोना और न्यू लव-एडू  जेनरेशन P ATUL VINOD

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कोविड-19 से उपजे कॉम्प्लिकेशंस को दुनिया की अर्थव्यवस्था भुगत रही है|  ऐसा कोई सेक्टर नहीं है जिसने चोट ना खाई हो|  युवा कैसे अछूते रह सकते हैं|रोज शाम को अपने फ्रेंड से मिलना,  कपल्स का बेखौफ घूमना-फिरना,  ग्रुप में मिलकर मस्ती करना, सैर पर जाना, देर रात तक पार्टी करना, सड़क पर मस्ती करते हुए रात रात भर घूमना| 

यूथ ने कभी सोचा नहीं था कि अचानक उनकी जिंदगी में ऐसा दौर भी आएगा जब उनकी फ्रीडम खतरे में पड़ जाएगी|शहर में रह रहे युवक युवतियां लॉकडाउन के कारण अपने होम टाउन में जाने को मजबूर हुए| कुछ वापस आ पाए कुछ को मां बाप ने रोक लिया|अब तो युवा होम टाउन में  रह कर  नौकरियां भी घर से कर रहे हैं| इससे उनकी खान-पान रहन-सहन की आदतें तो प्रभावित हुई ही हैं|  उनका अपने नजदीकी फ्रेंड या गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड से मिलना बंद हो गया| 

घर पर उस तरह की छूट नहीं है जिस तरह की छूट वह बाहर रहकर पा रहे थे|युवा मन में मौजूद सुरक्षा की सारी दीवारें टूट चुकी हैं| लंबे समय से युवा कुछ बुनियादी सुरक्षा के साथ  जी रहे थे| घूमना-फिरना, मस्ती करना, ग्रुप में रहना, मिलना-जुलना देर रात तक घूमना उन्हें जन्मसिद्ध अधिकार लग रहा था| सरकारों ने युवाओं को सभी हदें पार करने की छूट दे रखी थी|  शहरों में बियर-बार, पब और मस्ती के मयखाने, नियमों को ताक पर रखकर रात रात भर चलते थे|  पुलिस हफ्ता वसूली करके इनको युवाओं का जीवन बर्बाद करने की खुली छूट देती थी| लेकिन अब पुलिस भी मजबूर है क्योंकि रात 10:00 बजे से लेकर सुबह तक उसे सख्ती से कंप्लीट लॉक डाउन का पालन कराना ही होता है| अपवादों को छोड़ दें तो लॉक डाउन का पालन करना मजबूरी सी बन गई है|

युवा भी जानते हैं कि वो नियमों को ताक पर रखकर इस तरह के स्थानों पर पहुंच तो जाएंगे लेकिन पुलिस से बचने के बावजूद भी  कोरोना से नहीं बच पाएंगे|युवा न सिर्फ अपने अपने शहरों में मस्ती के ठिकानों पर वक्त बिताया करते थे बल्कि ट्रिप पर बाहर भी जाया करते थे | अब कोई ख़ास कारण ना हो तो बाहर आना जाना लगभग बंद है|  टूर डेस्टिनेशंस क्लोज हैं? अब जाएं तो जाएं कहां?

और तो और टिक-टॉक पर घर बैठे वीडियो मस्ती का दौर भी खत्म हो गया|नौजवानों का भविष्य कोरोना से थम गया है, सारी प्लानिंग फेल है| स्कूल कॉलेज कोचिंग बंद हैं|कोरोना ने तो हुक्का पानी ही बंद कर रखा है| रूमानी रिश्ते कमजोर हो गए हैं भविष्य की चिंता है तो आसपास नकारात्मक माहौल भी परेशां करता है| 

वक्त ने युवाओं को नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है| कुछ युवा तो अपने पैदा होने को ही बदनसीबी मान रहे हैं| माँ बाप ने पैदा तो कर दिया लेकिन जीवन कैसे चलेगा| संघर्ष आता नहीं, अनिश्चितता देखी नही| जियें तो जियें कैसे? 

वक्त हमेशा कुछ सबक देता है इस दौर ने भी युवाओं को भी सबक दिए हैं लेकिन उन्हें जो जिंदगी को आशावादी नजरिये से देखते हैं|
युवाओं को पता चलना चाहिए कि अब दोस्तों से निर्भरता कम करनी पड़ेगी जीने के लिए मस्ती के और भी तौर तरीके हैं|होता भी यही है एक समय बाद स्कूल कॉलेज, सहपाठी, गर्लफ्रेंड, बॉयफ्रेंड फ्रेंड, सर्कल सब छूट जाता है जीना तो अकेले ही पड़ता है| 

उम्मीद तो यही की जानी चाहिए कि कुछ ना कुछ सबक तो लिया ही होगा|ये तय है कि इस दौर ने नौकरी के अवसर कम किये हैं| अच्छी शिक्षा में भी बाधा है| मिली हुई नौकरी भी बरकरार रखना कठिन है|सपने  टूटते दिख रहे हैं लेकिन उम्मीद नहीं छोड़ना चाहिए वक्त बदलेगा और नया दौर आएगा|  

सबक को भूलना नहीं है फिर से मस्ती और मौज में जिंदगी के अहम सवालों को विस्मृत नहीं करना|या तो इस दौर में आप डिप्रेशन को आमंत्रित करें या आत्मबोध आप पर ही निर्भर करता है|दौर तो आते हैं अच्छे भी बुरे भी ये भी निकल जायेगा बस अपने आपको थामे रखना


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