कोरोना पर सनसनी आपराधिक कृत्य -सरयूसुत मिश्रा

कोरोना पर सनसनी आपराधिक कृत्य

-सरयूसुत मिश्रा
Covid19 India Newspuranकोरोना महामारी पूरी दुनिया को हलकान किए हुए है. भारत में भी कोरोना की दूसरी लहर डरा रही है. महामारी नियंत्रित करने के लिए ‘दवाई भी और कड़ाई भी’ पर सरकारें काम कर रही हैं. वैक्सीनेशन का भी अभियान चल रहा है. आज राजधानी के एक बड़े अखबार में कोरोना से हो रही मौतों के बारे में सरकारी आंकड़ों को गलत बताते हुए इस ढंग से खबर प्रकाशित की है कि राजधानी में भय का माहौल बढ़ गया है.

अखबार में प्रकाशित आंकड़े अगर सही मान लिए जाएं तो सरकार की विश्वसनीयता जनता की नजर में क्या बचेगी? इस खबर पर सरकार को चुप नहीं रहना चाहिए. सरकार की चुप्पी से ऐसा संदेश जाएगा कि अखबार की खबर कुछ हद तक सही है. 


Covid-guidelinesसरकार को इस खबर की सत्यता का गहराई से पता लगाना चाहिए और सही स्थिति उस अखबार के अगले संस्करण में इसी प्रमुखता के साथ प्रकाशित करनी चाहिए, ताकि जनता में भय का माहौल दूर हो सके. ऐसा मानने का कोई आधार नहीं है कि सरकार कोरोना से हो रही मौतों के गलत आंकड़े देगी. ऐसा करने से सरकार को क्या लाभ है? क्या सरकार ने व्यवस्थाओं में कोई लापरवाही बरती है? सरकार तो केवल बेहतर व्यवस्थाएं और प्रबंधन ही दे सकती है.  मौतों पर नियंत्रण सरकार और अखबार दोनों के बस में नहीं है. कोरोना पर किसी भी तरह से सनसनी फैलाना एक आपराधिक कृत्य है.

किसी भी महामारी से निपटने के लिए जो प्रबंध किए जाते हैं, उनमें एक व्यवस्था यह भी की जाती है कि महामारी और उससे निपटने के बारे में बिना सरकार के बताए हुए ऐसे कोई तथ्य प्रकाशित नहीं किए जाएंगे जो अफवाह के रूप में भय पैदा करें और महामारी से लड़ने में इससे बाधा उत्पन्न हो. 

covid19 guidelineमध्य प्रदेश सरकार ने भी ऐसा आदेश जारी किया है कि कोई भी मीडिया बिना सरकार की पुष्टि के ऐसी खबर का प्रकाशन नहीं करेगा जो लोगों में भय और भ्रम पैदा करें. मौत के आंकड़े वाली यह खबर लोगों में डर भी पैदा कर रही है और भय फैला ही रही है. अखबार में जिस तरह से खबर प्रकाशित की गई है उसमें सनसनी ज्यादा, प्रमाण एवं दस्तावेज कम है. अखबार का यह दायित्व बनता है कि वह साबित करे कि सरकार मृत्यु के गलत आंकड़े प्रस्तुत कर रही है और इसके पीछे सरकार की मंशा क्या है. महामारी को अखबार की सनसनी बनाना पूरी तौर से नाजायज है.

कोरोना महामारी से निपटने में जागरूकता बढ़ाने की दृष्टि से मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है. अपने को मीडिया का सिरमौर मारने वाला भी अगर इस तरह से सनसनी फैलाएगा तो फिर बाकी लोग भी इसी लाइन पर काम करेंगे. मीडिया आज बहुत चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है. प्रसार संख्या और विज्ञापनों की प्रतिस्पर्धा में खबरों को सनसनी बनाकर पेश करना सामान्य बात हो गई है. वैसे हमारे प्रदेश में मीडिया काफी गंभीर रहा है. हर चुनौती के समय उसने समाज हित में भूमिका निभाई है. कोरोना की चुनौती में भी इसी तरह की भूमिका की अपेक्षा मीडिया से आम लोगों की है. कोरोना से मृत्यु के सही
आंकड़े आना चाहिए. जो भी गलत आंकड़े प्रस्तुत करने के लिए जिम्मेदार दो, चाहे वो तंत्र हो चाहे मीडिया, उस पर सख्ती से कार्यवाही समय की आवश्यकता है.


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