कोरोना से मरने वालों में दो-तिहाई मर्द -दिनेश मालवीय

कोरोना से मरने वालों में दो-तिहाई मर्द

सजगता में लापरवाही से विकराल रूप लेने में देर नहीं लगेगी

लोगों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका

-दिनेश मालवीय

बहुत प्राचीन काल से  कहा जाता रह है और अनुभव भी है कि औरतों में रोगों से लड़ने की ताकत ज्यादा होती है. अनेक बीमारियों में पाया गया है कि मर्दों को जिस बीमारी से उबरने में जितना समय लगता है, औरतों को उससे ठीक होने में अपेक्षकृत कम समय लगता है. कोरोना के मामलों में ही लें. अभी तक देश में इस महामारी से जो  लोग मरे हैं, उनमें दो-दिहाई मर्द हैं. इसका कारण यह भी हो सकता है कि औरतें अधिकतर घर में रहती हैं, इसलिए उन्हें संक्रमण भी कम हुआ है. हकीकत जो भी हो लेकिन यह सच है.

यह तथ्य इकॉनोमिक टाइम्स में प्रकाशित उम्मेन सी. कुरियन के एक लेख में सामने आया है. भारत में भारत में कोरोना महामारी को आये छह महीने का वक्त गुजर चुका है. इस दौरान देश के पाँच सौ से अधिक जिलों में से सिर्फ 50 जिलों में दो-तिहाई कोरोना संक्रमण के मामले सामने आये हैं. इनमें भी सबसे अधिक शहरी इलाकों में हैं. वैसे यह ट्रेंड पूरी दुनिया में सामने आया है. कुरियन के अनुसार कोरोना के कारण 25 साल से कम के मृत युवाओं का सिर्फ 2 प्रतिशत है. मरने वालों में 50 प्रतिशत से ज्यादा लोग 60 साल से ऊपर के थे. पैंतालीस साल से अधिक उम्र के मरने वालों की संख्या 87 प्रतिशत रही. मरने वाले लोगों में अधिकतर लोगों को कोई अन्य बीमारियाँ भी थीं.

विगत एक मई को भारत में 50 प्रतिशत से ज्यादा कोरोना मामले मुंबई, अहमदाबाद और दिल्ली से आये थे. आज की स्थिति में इन शहरों में ये कुल मामलों का केवल लगभग 3 प्रतिशत हैं. अब कोरोना के हॉट स्पॉट के रूप में नयी जगहें उभर कर आयी हैं, जो उत्तरप्रदेश, असम, बिहार और उडीसा के जिलों में हैं.

अभी तक तो कोरोना के मामले में भारत की स्थति अनेक बहुत विकसित देशों  की तुलना में काफी ठीक रही है. ऐसा माना जा रहा था कि भारत में चिकित्सा सुविधाओं की बहुत कमी के चलते यहाँ स्थिति बहुत भयावह हो जाएगी और बहुत अधिक मौतें होंगी. लेकिन पिछले छह महीनों में लगभग 43 हजार मौतें हुयी हैं. विशेषज्ञ इस बात पर चकित हैं कि अनेक ऐसे राज्य हैं, जहाँ कोरोना संक्रमण बहुत तेजी से फैला, लेकिन वहाँ मौतें उसकी तलना में बहुत कम हुयीं. इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की भूमिका को भी श्रेय दिया जा रहा है.

दुनिया के जिन देशों में चिकित्सा सुविधाएँ बहुत मजबूत हैं, उन्होंने कोरोना संक्रमण से निपटना में देर की. भारत ने देशव्यापी लॉकडाउन लागू करने में देर नहीं की. इस दौरान चिकित्सा के बुनियादी ढाँचे में सुधार और राज्य सरकारों को केंद्र के साथ बेहतर समन्वय का अवसर मिल गया. लॉकडाउन के कारण देश को आर्थिक परेशानियां हुयीं, विशेषकर अनौपचारिक क्षेत्र को, लेकिन संसाधनों के वितरण और ठोस सार्वजनिक वितरण प्रणाली ने स्थिति को नियंत्रण में रखा और जरूरतमंदों को बहुत राहत पहुंचायी जा सकी.

संक्रमण के फैलाव को रोकने में फेसमास्क ने बहुत मदद की है. अनेक राज्यों ने इसे अनिवार्य कर दिया. यूके जैसे देशों ने इसे अनिवार्य करने में चार महीने लगा दिये, जबकि भारत के अधिकांश हिस्सों में यह काम अप्रैल में ही कर लिया गया. भारत ने कोरोना जाँच सुविधा बढ़ाने मे के मामले में भी बहुत उल्लेखनीय काम किया. फरवरी में रोजाना सिर्फ लगभग सौ जाँच की सुविधा थी, जिसे अब बढ़ाकर 6 लाख से ज्यादा कर दिया गया है. फिर भी यह तथ्य है कि इतनी बड़ी आबादी की जाँच करना बहुत मुश्किल काम है. अभी तक सिर्फ 2 करोड़ लोगों की जाँच की जा सकी है. जिन शहरों में आधी से ज्यादा आबादी संक्रमित हो चुकी है, वहाँ जाँच सिर्फ लगभग पाँच प्रतिशत लोगों की ही हो सकी है.

सरकार तो अपनी तरफ से जो भी हो सकता है, वह कर ही रही है, लेकिन भारत में कोरोना संक्रमण की हालत बेकाबू न हो, इसमें लोगों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है. आज भी लोग इसकी गंभीरता को वांछित स्तर पर नहीं समझ पा रहे हैं और लापरवाह बने हुए हैं. फेसमास्क पहनना, सामाजिक दूरी बानाए रखना और व्यक्तिगत स्वच्छता कायम रखना इस महामारी से बचने के सबसे अधिक प्रभावी उपाय हैं. लेकिन इस मामले में लोग लापरवाही कर रहे हैं. आपको बड़ी संख्या में लोग बिना मास्क पहने मिल जायेंगे. ऐसे लोग भी कम नहीं हैं, जो मास्क को गले में लटकाए घूम रहे हैं. सामाजिक दूरी को तो वे धता ही बता रहे हैं.व्यक्तिगत हाइजीन के मामले में भी लोग बेहद लापरवाही बरत रहे हैं. हाल ही में भोपाल में एक परिवार की शादी में कई साथ लोग एक साथ कोरोना संक्रमित हो गये. इसमें एक वरिष्ठ डॉक्टर और उनकी पत्नी की मौत हो गयी. बाकी लोगों का इलाज चल रहा है.

लोगों ने अगर इसकी गंभीरता को नहीं समझा और इसी तरह लापरवाही बरतते रहे, तो इस महामारी को भारत में विकराल रूप लेते देर नहीं लगेगी.

NEWS PURAN DESK 1



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