कोरोना की दवा ,बाज़ार और बहस – P अतुल विनोद 

COVID19 का मेडिकल बाजार, कारोबार की काली राजनीती –  P अतुल विनोद 

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पूरी दुनिया कोविड-19 से ग्रसित है|  कोविड-19 के कारण दुनिया भर में लाखों लोगों की मौत हो चुकी है|  इस बीमारी के इलाज के लिए जिस स्तर पर रिसर्च चल रही है ऐसा पहले कभी नहीं हुआ|  कोरोना का कोई रामबाण इलाज मौजूद नहीं है| फिर भी लोग ठीक हो रहे हैं| 

दवा कंपनियां इस महामारी के बीच अपने मुनाफे की संभावनाएं तलाश रही हैं|  गूगल पर लोग कोरोनावायरस  की दवा सबसे ज्यादा सर्च कर रहे हैं|  रोचक ये है कि मीडिया भी लोगों की उत्सुकता के चलते दवा से जुड़ी हुई हर छोटी बड़ी जानकारी अपने वेबपेज पर दे रहे हैं|  इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी “मिल गई कोरोनावायरस की दवा” के स्पेशल शो देखने को मिल जाएंगे| 

दरअसल लोग इस महामारी के बीच दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल से उम्मीद की रोशनी तलाश रहे हैं| जबकी  कोरोना के लगभग  95 फ़ीसदी मरीज इसकी वैक्सीन या दवा न होने के बावजूद भी ठीक हो रहे हैं| 

Coronavirus Advice for Consumers

Beware of Fraudulent Coronavirus Tests, Vaccines and Treatments

जाहिर कि कोरोनावायरस और मरीजों को हॉस्पिटल में रखकर पेरासिटामोल को भी प्रभावी दवा बता कर दिया जाए तो भी  95 फ़ीसदी मरीज  ठीक हो जाएंगे|

ऐसे में क्या पेरासिटामोल को इस बीमारी की अचूक औषधि नहीं बताया जा सकता? 

दुनिया की कोई भी दवा ज्यादा से ज्यादा ९५  फीसदी मरीजों को ही ठीक कर सकती है, महामारी में कितनी ही प्रभावित दवा खोज ली जाए ९५ फ़ीसदी से ज्यादा लोग ठीक करने से ज्यादा दावा नही कर सकती| |

कोई दवा आए ना आए कोरोनावायरस से ठीक होने वाले मरीजों का प्रतिशत लगातार बढ़ता चला जा रहा है| 

राजस्थान और मध्य प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दम पर कोरोनावायरस  का रिकवरी रेट काफी ज्यादा हो गया है| 

A Systematic Review on the Efficacy and Safety of Chloroquine for the Treatment of COVID-19

बहती गंगा में सभी दवा कंपनियां अपना हाथ धोने की तैयारी में है|  कई दवा कंपनियों ने कोरोना की प्रभावी दवा खोजने का दावा किया है|  

सैनिटाइजर, काढ़ा, इम्यूनिटी बूस्टर सप्लीमेंट्स का कारोबार बूम पर है|

Glenmark launches new coronavirus medicine at 103 per tablet.

कोरोना के इलाज में भारतीय फार्मा कंपनी ग्लेंमार्क फार्मा ओरल एंटीवायरल ड्रग फेविपिरवीर लेकर भारतीय बाजार में आयी है। ग्लेंमार्क फार्मा के एक टैबलेट भारतीय बाजार में फेबीफ्लू के नाम से 103 रुपये में उपलब्ध होगा| लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि एक मरीज को इस दवा का कोर्स लगभग १५ हज़ार में पड़ेगा, इसके बावजूद मरीज के इसके साइड इफेक्ट झेलने होंगे साथ ही गंभीर बीमारी से ग्रसित होने पर इस दवा का प्रभाव पड़ने  की कोई गारंटी नहीं है| मरीजों को अंडरटेकिंग देनी होगी वो अलग|

{ Favipiravir will be available as a 200 mg tablet at an MRP of ₹3,500 for a strip of 34 tablets. things to know about the new Covid-19 drug: The recommended dose of Favipiravir is 1,800 mg twice daily on day one, followed by 800 mg twice daily up to day 14. It is a prescription-based medicine.}

Coronil: All you need to know about Ayurvedic medicine which claims to cure Covid-19

इधर पंतजली आयुर्वेद हरिद्वार व निम्स यूनिवर्सिटी ने मिलकर कोरोना वायरस (Coronavirus) को सही करने के लिए, मंगलवार को दवा कोरोनिल को लांच किया| बाबा रामदेव, आचार्य बाल कृष्णा, डा. बलबीर सिंह तोमर का दावा था कि कोरोनिल की क्लीनिकल केस स्टडी में 280 मरीजों को शामिल किया गया, फिर 100 मरीजों के उपर क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल की गई. 3 दिन के अंदर 69 प्रतिशत मरीज पॉजिटिव से निगेटिव हो गए और 7 दिन के अंदर 100 प्रतिशत रोगी ठीक हो गए. डेथ रेट इस दौरान 0 प्रतिशत रहा.

आरोप ये लग रहे हैं कि इस आपदा के दौरान देश की जनता को गुमराह कर बिना केन्द्र सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर (ICMR) की अनुमति के बिना ऐसा किया गया| संगठित व सुनियोजित तरीके से देश की जनता को गुमराह करने और लूटने की नीयत से एक प्रेस कॉफ्रेंस करके ये दुष्प्रचार किया कि उनकी कंपनी ने कोरोना वायरस बीमारी का इलाज ढूंढ लिया है|

The efficacy of Patanjali’s Coronil medicine which cures Covid-19 has not been corroborated by any independent medical body as of yet.

रामदेव ने जो दवा लांच की है  वह दरअसल एक खास किस्म के आयुर्वेदिक औषधियों का कंबीनेशन है| धातुभस्मों व रस-भस्म से आयुर्वेदाचार्य पहले भी बड़ी बड़ी बीमारियों का इलाज करते रहे हैं| Ramdev said more than 100 compounds have been used in Coronil. The entire kit will help in strengthening immunity.

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मैं 15 साल की उम्र तक अपने पैत्रक गांव नांदनेर  में रहा|  गांव में कोई एलोपैथी डॉक्टर नहीं था|  इस दौरान कई बार मुझे वायरल, फ्लू हुआ, मलेरिया और अन्य तरह के बुखार भी मुझे आए| मुझे याद नहीं कि कभी मुझे इनके इलाज के लिए शहर के डॉक्टर को दिखाने ले जाया गया हो|  मेरे स्कूल के ही शिक्षक स्वर्गीय पीसी शर्मा जी आयुर्वेदाचार्य भी थे वे  बीमार पड़ने पर कुछ पुड़िया दे दिया करते थे और 2 से 4 दिन में मैं भला चंगा हो जाया करता था|  

आयुर्वेद में ऐसे अनेक तरह के योग मौजूद है जो  सर्दी, खांसी, जुकाम, फ़्लू, बुखार, वायरल, मलेरिया आदि को ठीक करने में पूरी तरह सक्षम हैं| इन्हीं आयुर्वेदिक योग के कारण मैं अपनी जिंदगी के शुरुआती 15 साल तक एलोपैथी से दूर रहकर भी चंद दिनों में स्वस्थ हो जाए करता था|  किसी बड़ी बीमारी या एक्सीडेंट को छोड़ दें तो गांव के किसी व्यक्ति को शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी|  अमूमन हर गांव में इस तरह के वैध हुआ करते थे  जो  नजला, जुकाम, खासी, बुखार को  प्राकृतिक औषधियों से ठीक कर दिया करते थे| 

मुश्किल ये है कि अब लोग बिना अलोपैथी दबा के ठीक नहीं होते|  अब गांव के लोगों को भी छोटी-छोटी बीमारियों से ग्रस्त अपने बच्चों को शहर लाकर दिखाना पड़ता है|  दरअसल गांव में वैध अभी भी मौजूद है लेकिन लोगों का भरोसा अब आयुर्वेद पर नहीं रहा|  बाजारवाद के चलते हवा कुछ इस तरह की बन गए कि बीमारी कोई भी हो आप आयुर्वेद होम्योपैथी से इलाज कराते रहें, लेकिन एलोपैथी जरूरी है| 

सवाल ये है कि जब फेविपिरवीर  के बगैर भी ज्यादातर मनीष ठीक हो रहे हैं तो क्या इस कंपनी की दवा के 15000 का कोर्स डॉक्टर मरीज को  प्रिस्क्राइब करेंगे? आखिर ये कैसे तय होगा कि दवा की जरूरत किस मरीज को है और किसे नहीं?  सवाल ये भी है कि जिन दवाओं से अब तक मरीज ठीक हो रहे थे क्या वो दवाई अब अप्रभावी मानी जाएंगी? 

बाबा रामदेव की दवा वाकई इस बीमारी का इलाज है या सिर्फ एक आयुर्वेदिक इम्यूनिटी बूस्टर काढ़ा?  ये भी अभी सवाल बना हुआ है|

Coronavirus facts vs myths: Don't believe these WhatsApp tips on Covid-19

Coronavirus rumours: The spread of misinformation via WhatsApp in many ways mimics how Covid-19 itself moves through societies – from individual to individual, group to group

 

 

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