देश इंतज़ार कर रहा है ‘ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया’ (Green Wall Of India) का – ATUL PATHAK

देश इंतज़ार कर रहा है 'ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया' (Green Wall Of India) का-अतुल पाठक 

बीते कुछ दशकों में भारत की सरकार और देश की जनता ने प्रकृति के साथ जमकर खिलवाड़ किया है| आबादी को बढ़ाकर और ग्रीनरी को घटाकर वायुमंडल को प्रदूषित करने में हम सब बड़े गुनहगार हैं| लम्बे समय से चर्चा है कि देश की सरकार ग्रीन बॉल बनाने की तैयारी में है| बताया जाता है कि ये ग्रीन वॉल 1,400 किलोमीटर लंबी होगी| यदि यह प्रोजेक्ट हकीकत में आता है तो देश के लिए एक क्रांतिकारी परिवर्तन होगा| इसे भारत सरकार की  महत्वकांक्षी योजना कहा जा सकता है| प्रकृति को संरक्षित करने की दिशा में यह स्कीम मील का पत्थर साबित हो सकती है|

All About the Green Wall of India and How the British Did It First in Indiaअभी तक हमने चीन की ग्रेट वॉल के बारे में सुना था, लेकिन हमारी यह वॉल चीन की ग्रेट वॉल की तुलना में मानव जाति के उत्थान में एक बहुत बड़ी भूमिका अदा कर सकती है| वातावरण तेजी से गर्म हो रहा है| धरती को बड़ी संख्या में पेड़ों की जरूरत है| इस योजना में अन्तर्गत पोरबन्दर, गुजरात से लेकर,पानीपत, हरियाणा तक एक कोरिडोर बनाये जाने की योजना है जिसमे सिर्फ हरियाली होगी| हमने अब तक रोड्स, बिजनेस, इंडस्ट्री कोरिडोर तो बहुत बनाये लेकिन इस तरह की हरित पट्टी बनाने की योजना वक्त का तकाज़ा है| जाहिर है इस तरह की योजना अमल में आती है तो पर्यावरण के लिए ऑक्सीजन का काम करेगी|

पर्यावरण के संरक्षण की कोई भी योजना भविष्य की पीढ़ी के लिए संजीवनी बूटी की तरह होगी| पर्यावरण के वर्तमान हालात सरकारों से दूरगामी और बड़े कदम उठाने की डिमांड कर रहे हैं| यदि हमारी गवर्नमेंट पर्यावरण संरक्षण के लिए दूरगामी कदम उठाती है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए| हालांकि अन्य मुद्दों के कारण यह मामला कुछ पीछे हटा है लेकिन जनता अपनी जागरूकता से ऐसे मुद्दों को सरकार की प्राथमिकता में लाने की पहल कर सकती है| 

हम अक्सर धार्मिक और अन्य मसलों पर एक हो जाते हैं लेकिन पर्यावरण के मुद्दे पर जन आंदोलन खड़ा करना बहुत मुश्किल काम होता है| कहा जा रहा है कि सरकार की इस योजना से थार मरुस्थल का प्रसार रुकेगा। गर्मियों में पूर्वी भारत के एक बड़े भाग में धूल भरी आँधी चलती है जो मानव स्वास्थ्य के साथ ही  एटमॉस्फेयर के लिए भी अनेक प्रकार की कठिनाइयां जन्म लेती है। ऐसी उम्मीद है कि इस परियोजना से यह समस्या भी हल होगी| यदि सरकार इस योजना पर तेजी से काम करती है तो यह संदेश जरूर निकलेगा कि भारत पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीर और दुर्गा में कदम उठा रहा है| इससे हम आने वाली पीढ़ी को यह संदेश भी देंगे कि हमने सब कुछ मिटाया नहीं है कुछ बचाया भी है| ऐसी योजनाएं अन्य देशों में भी बनाई गई लेकिन उनका क्रियान्वयन नहीं किया जा सका|

 नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे कदम उठाए हैं जिनकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था| हालांकि मोदी सरकार के कदमों को उसके एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है  उसकी प्राथमिकता में पर्यावरण शामिल होता है तो हम सबके लिए खुशी की बात होगी|

Government plans 1,400km long great 'green wall' of India to deal with land degradation - YouTube
प्रमुख बिंदु: 

ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया  करीब 5 किलोमीटर चौड़ी होगी| ये परियोजना अफ्रीका की ‘ग्रेट ग्रीन वॉल परियोजना’ (Great Green Wall Project) से अभि-प्रेरित है, जिसमें सेनेगल (Senegal) से ज़िबूती (Djibouti) तक एक ‘ग्रीन वॉल’ का निर्माण किया जा रहा है। हिन्दुस्तान की ग्रीन वॉल का मकसद बढ़ते भूमि क्षरण और थार रेगिस्तान के पूर्वी विस्तार को रोकना है। यह हरित पट्टी (Great Green Wall Project)  पोरबंदर से पानीपत तक बनाई जाएगी जो अरावली पर्वत में वनीकरण के  जरिए निम्नीकृत भूमि के पुनर्निर्माण में सहायक होगी। ये पश्चिमी भारत और पाकिस्तान के रेगिस्तान से आने वाली धूल के लिये एक अवरोधक के रूप में भी काम करेगी।

अरावली पर्वत श्रृंखला:

अरावली क्षेत्र की पहचान उन प्रमुख निम्नीकृत भूमि वाले क्षेत्रों में से की गई है जिन्हें वर्ष 2030 तक पुनर्स्थापित किया जाना है। वर्तमान में भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र (328.7 मिलियन हेक्टेयर) का 29.3% भाग (96.4 मिलियन हेक्टेयर) निम्नीकृत है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation- ISRO) की 2016 की एक रिपोर्ट (The desertification and land degradation atlas of India) में यह संकेत दिया था कि दिल्ली, गुजरात और राजस्थान में 50% से अधिक भूमि का क्षरण पहले ही हो चुका है।

अब आप जान लें की इसी तरह का एक और प्रोजेक्ट कहाँ और कैसा चल रहा है? 

क्या है अफ्रीका की ग्रेट ग्रीन वॉल परियोजना (Great Green Wall of Africa Project):

इसका मकसद अफ्रीका की निम्नीकृत भूमि का पुनर्निर्माण करना तथा विश्व के सर्वाधिक गरीब क्षेत्र, साहेल (Sahel) में निवास करने वाले लोगों के जीवनस्तर में सुधार लाना है। योजना के पूर्ण हो जाने पर यह वॉल पृथ्वी पर सबसे बड़ी जीवित संरचना होगी। इस परियोजना को अफ्रीकी संघ द्वारा UNCCD, विश्व बैंक और यूरोपीय आयोग सहित कई भागीदारों के सहयोग से शुरू किया गया था। संयुक्‍त राष्‍ट्र मरुस्‍थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन, कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़- 14 (UN Convention to Combat Desertification- UNCCCD, COP14) के दौरान अफ्रीकी देशों ने वर्ष 2030 तक महाद्वीप के साहेल क्षेत्र में योजना को लागू करने हेतु वित्त के संदर्भ में वैश्विक समर्थन की मांग की थी। अफ्रीकी देशों के प्रयासों के अतिरिक्त COP14 में शांति वन पहल (Peace Forest Initiative-PFI) की शुरुआत की गई, जिसका मकसद संघर्षग्रस्त सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमि क्षरण के मुद्दे को संबोधित करना है। शांति वन पहल पेरू और इक्वाडोर के बीच स्थापित पीस पार्क (Peace Park) पर आधारित है।

साहेल क्षेत्र (Sahel Region):

साहेल पश्चिमी और उत्तर-मध्य अफ्रीका का एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र (Semiarid Region) है जो पूर्व सेनेगल (Senegal) से सूडान (Sudan) तक फैला हुआ है। यह उत्तर में शुष्क सहाराई रेगिस्तान तथा दक्षिण में आर्द्र सवाना के बीच एक संक्रमणकालीन क्षेत्र का निर्माण करता है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट को 2030 तक प्राथमिकता में रखकर जमीन पर उतारना चाहती है. हालांकि इस प्रोजेक्ट पर अभी आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है|




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