क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक? आज के दौर में महिलाओ के एम्ब्र्यो और पुरुषो के शुक्राणु संरक्षित करने की ये विधि बेहद अहम् है? 

क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक?
आज के दौर में महिलाओ के एम्ब्र्यो और पुरुषो के शुक्राणु संरक्षित करने की ये विधि बेहद अहम् है? 
आज के युग में युवतियां अपने कॅरियर के प्रति ज्यादा सजग हैं। जब तक वे अपनी डिमांडिंग जॉब्स से हटकर जीवन साथी का चुनाव, शादी या परिवार बढ़ाने का निर्णय लेती है तब तक उनकी उम्र अधिक हो जाती है। युवतियों की लाइफस्टाइल और अन्य वातावरणीय प्रभावों से भी ओवेरियन रिजर्व / एएमएच से प्रेग्नेंट होने की संभावना कम हो जाती है और शिशुओं में गुणसूत्र असामान्यता जैसे डाउन्स सिंड्रोम आदि का खतरा बढ़ जाता है।

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Sperm Cryopreservationइन सबसे होने वाले तनाव से बचने के लिए युवतियां 25 से 35 वर्ष के बीच में अपने अंडाणु (मैच्योर ओसायट्स) क्रायोप्रिजर्व करवाकर अपनी इच्छानुसार उम्र में उन्हें इस्तेमाल कर मां बन सकती है। 

इससे जन्म लेने वाले बच्चों में विकृतियां नहीं बढ़ती है। किशोरियों में कैंसर होना आजकल बहुत आम समस्या है और इलाज के बाद जीवन बहुत सामान्य हो जाता है। ऐसे में अंडाणु कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी से पहले संरक्षित कर लिए जाए तो मातृत्व सुख भी ले सकती है।

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डोनर के ओसायेट्स क्रायोप्रिजर्व कर लें तो रिसेपियेंट्स को आईवीएफ सायकल में दिए जा सकते हैं। गूगल, फेसबुक आदि बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने यहां काम करने वाली युवतियों को ओसायेट्स क्रायोप्रिजर्व करने के लिए भुगतान भी करती हैं।

cryopreservation क्रायोप्रिजर्वेशन ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें जैविक कोशिका की सभी गतिविधियों को रोककर उसे 196 डिग्री पर तरल नाइट्रोजन में संरक्षित किया जाता है और जरूरत पड़ने पर पुनः उसी अवस्था में सक्रिय हो जाती है। 

एआरटी में क्रायोप्रिजर्वेशन क्या केवल भ्रूण का ही होता है?

एआरटी में क्रायोप्रिजर्वेशन की सफल शुरुआत 1983 में हुई थी। आईवीएफ सायकल में अधिक भ्रूण बन जाने पर संरक्षित भ्रूण भविष्य में फ्रोजन एंब्रायो ट्रांसफर के लिए उपयोग करने से समय और धन दोनों की बचत होती है, जुड़वा और अधिक बच्चों की संभावना कम हो जाती है। ओएचएसएस और पीजीडी करवाने की स्थिति में आवश्यक रूप से सभी भ्रूण क्रायोप्रिजर्व ही किए जाते हैं।

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क्रायोप्रिजर्वेशन भ्रूण, शुक्राणु, अंडाणु और विशेष परिस्थितियों में ओवेरियन टिश्यू और टेस्टिक्युलर टिश्यूज के लिए भी विकसित हो रही है।

शुक्राणुओं का क्रायोप्रिजर्वेशन किन परिस्थितियों में किया जाता है? 

विदेश में या सेना में अपने साथी से दूर रहने वाले पुरुषों के लिए उनकी अनुपस्थिति में उनके शुक्राणु से गर्भाधान के लिए क्रायोप्रिजर्वेशन उपयोगी है।

Cryopreservation process पुरुष शुक्राणुहीनता की स्थिति में एमईएसए / टीईएसई आदि प्रक्रियाओं से प्राप्त शुक्राणु को संरक्षित कर पुनः बायोप्सी से बचा जा सकता है।

युवावस्था में कैंसर होने पर उपचार से पहले या जहरीले रसायनों के पास काम करने वाले युवा शुक्राणु क्रायोप्रिजर्व करवाकर उनकी विकृति और नुकसान के प्रभाव से बच सकते हैं।

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डोनर के वीर्य में से शुक्राणु क्वारंटाइन पीरियड पूरा होने तक या उपयोग में लेने तक प्रिजर्व किए जाते हैं।

अंडाणुओं के क्रायोप्रिजर्वेशन कराने से क्या लाभ है और इससे जन्म लेने वाले बच्चों में विकृतियां तो नहीं आती?

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