दिव्य तत्त्व (Divinity)

दिव्य तत्त्व-

कोई भी मनुष्य वास्तव में सुखी नहीं हो सकता, जब तक वह अपने भीतर विराजमान तथा सर्वत्र व्याप्त दिव्य सत्ता को न पहचाने और उसकी अनुभूति न करे।

दिव्य सत्ता पर चिन्तन करें तथा अपने भीतर गहरे प्रवेश करें, जिससे कि आप उस महान् विद्यमानता को जान सकें।Image result for healing

यह मानवीय परमोत्कर्ष तथा आनन्दमयता की लोकतंत्र अवस्था प्राप्त करने का मार्ग है।

उस मनुष्य को, जो अपनी सुरक्षा और अपने सुख को, नैतिक और आध्यात्मिक विकास को छोड़कर, भौतिक धन-सम्पत्ति पर आधारित करता है, किसी दिन निराश होना पड़ता है।

तथा वह मनुष्य, जो उन्हें दिव्य सत्ता पर आधारित कर लेता है, सदा सुखी रहता है।

Divinity-

No man can be truly happy unless he recognizes and realizes the Divine, dwelling inside and pervading everywhere.

Contemplate upon the Divine and delve deep into yourself in order to know and realize the Supreme Presence.

This is the way to achieve human excellence in totality and also to attain the sublime state of Blissfulness.

He who bases his security and happiness upon the material possessions, to the exclusion of moral and spirit rural development, must come to grief someday, while
he who bases them on the Divine remains perpetually happy.

PURAN DESK



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