नजरअंदाज ना करे बच्चों के ये लक्षण, हो सकते हैं डिप्रेशन का शिकार

बच्चों के डिप्रेशन का इलाज – Bacho ke depression ke ilaj

बच्चों में डिप्रेशन का इलाज काफी हद तक बड़ों के डिप्रेशन के इलाज की तरह ही होता है। आमतौर पर डिप्रेशन के इलाज में मनोचिकित्सा (Psychotherapy) और दवाओं को अलग-अलग या दोनों को साथ में ही रोगी को दिया जा सकता है। इलाज की प्रक्रिया बच्चे की स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करती हैं। बच्चों में होने वाले कम प्रभाव व हल्के डिप्रेशन का इलाज केवल मनोचिकित्सा प्रक्रिया से ही किया जा सकता है। इस दौरान डॉक्टर पहले मनोचिकित्सा से ही बच्चे को ठीक करने का प्रयास करते हैं, यदि लक्षण कम ना हो या बच्चे की समस्या में सुधार ना हो तो उसको डिप्रेशन कम करने वाली दवाएं दी जाती हैं।

अभी तक के अध्ययनों से यह पता चला है कि मनोचिकित्सा और डिप्रेशन को कम करने वाली दवाओं को साथ में उपयोग करने से बच्चों के डिप्रेशन को प्रभावी रूप से ठीक किया जा सकता है।

एंटी डिप्रेसेंट दवाओं से शरीर के अंसतुलित केमिकल में संतुलन बनता है, लेकिन इसके प्रभाव को कुछ महीनों का समय लग सकता है। इसके इलाज के लिए सही दवा और खुराक को समझने में थोड़ा समय लग सकता है। आहार में विटामिन सी और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स को शामिल करने से भी डिप्रेशन को कम किया जा सकता है।
बच्चों में डिप्रेशन के प्रकार - Bacho me depression ke prakar

बच्चों में डिप्रेशन कम या ज्यादा होना उसके लक्षणों पर निर्भर करता है। अगर बच्चे में पिछले दो सप्ताह से डिप्रेशन संबंधी पांच या उससे अधिक लक्षण दिखाई दें तो यह गंभीर और बड़ी समस्या की ओर इशारा करता है। बच्चों में डिप्रेशन या अवसाद के प्रकार को नीचे विस्तार से बताया गया है।
डिसथीमिया (Dysthymia) : यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जिसके लक्षण बेहद हल्के होते हैं, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक चल सकती है। (और पढ़ें - मानसिक रोग का इलाज) | 

मौसम से प्रभावित विकार (Sesonal affective disorder) : प्राकृतिक रोशनी के संपर्क में आने के कारण यह अवसाद होता है। यह समस्या मुख्य रूप से सर्दियों में दिन के समय रोशनी कम होने पर होती है।

बाईपोलर डिप्रेशन (Bipolar depression) : मानसिक उतार चढ़ाव जैसे किसी चीज का भ्रम होना या मतिभ्रम के साथ ही कई बार हाईपोथायरोडिज्म या सर्दी जुकाम में ली जाने दवाओं आदि के परिणाम के चलते बच्चों में इस प्रकार का डिप्रेशन होने लगता है। 

सामंजस्य संबंधी विकार (Adjustment disorder) : किसी नजदीकी रिश्तेदार या संबंधी की मृत्यु होने पर बच्चा स्थितियों के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाता है। जिससे बच्चे को इस प्रकार का डिप्रेशन हो जाता है।

बच्चों में डिप्रेशन के लक्षण – Bacho me depression ke lakshan

बच्चों में होने वाले डिप्रेशन के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। यह बच्चे और उसके मूड संबंधी विकार पर निर्भर करते हैं। कई बार बच्चों में डिप्रेशन की ना तो पहचान हो पाती है और ना ही इस समस्या का इलाज किया जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कई बार इसको बच्चे के सामान्य विकास के दौरान होने वाला भावनात्मक और मानसिक बदलाव समझ लिया जाता है।

 

बच्चों में डिप्रेशन के निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:

  • खाने की आदत में बदलाव, बच्चा ज्यादा या कम खाने लगता है,
  • नींद की आदत में बदलाव, जैसे – ज्यादा या कम सोना,
  • लगातार उदास और निराश महसूस करना,
  • किसी भी चीज पर दिमाग को एकाग्र करने में मुश्किल होना |
  • थकान और कमजोरी महसूस होना |
  • चिड़चिड़ापन होना |
  • बिना किसी वजह के बच्चे का गुस्सा होना |
  • लगातार मूड में बदलाव होना |
  • रोजाना के कार्यों में रूचि न लेना |
  • आत्मविश्वास में कमी आना |
  • ज्यादातर सिरदर्द, पेटदर्द आदि से परेशान रहना |
  • हर चीज के लिए खुद को दोषी मानना,
  • सामाजिक न होना या समाज के लोगों के साथ मिलना जुलना कम कर देना,
  • रोना, आदि।
बच्चों में डिप्रेशन के लिए किसी कारण को जिम्मेदार नहीं कहा जा सकता है। आमतौर पर कई तरह के कारक जैसे शारीरिक स्वास्थ्य, परिवार में किसी सदस्य को पहले कभी अवसाद या मानसिक समस्या, अनुवांशिक समस्या, आसपास का माहौल व शरीर के केमिकल में असंतुलन आदि को बच्चों में डिप्रेशन की मुख्य वजह माना जाता है। इसके जैविक कारण दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर सेराटोनिन के कम स्तर से संबंधित होते हैं। जैविक रूप से अलग होने के कारण लड़कियों में डिप्रेशन की समस्या लड़कों की तुलना अधिक होती है। इसके अलावा लड़कियां कई मामलों में लड़कों की तुलना में अलग तरह से प्रतिक्रिया करती है, जिसकी वजह से भी उनको डिप्रेशन हो जाता है।

बच्चों से जुड़े डिप्रेशन के मानसिक कारणों में आत्म सम्मान में कमी, समाज में लोगों से मिलने-जुलने में परेशानी, जरूरत से ज्यादा तुलनात्मक
होना, नकारात्मक छवि बनना और किसी घटना से उभरने में मुश्किल होना, आदि को शामिल किया जाता है। इसके साथ ही एडीएचडी (ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार) और किसी चीज को सीखने में मुश्किल होना भी बच्चों में डिप्रेशन की वजह होता है।

किसी प्रकार का मानसिक आघात जैसे यौन शोषण, किसी प्रिय संबंधी या व्यक्ति की मृत्यु होना, स्कूल की समस्या, साथियों के दबाव व किसी काम को करने का दबाव आदि की वजह से बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं। कम शारीरिक गतिविधियां व स्कूल में खराब प्रदर्शन के कारण भी बच्चे का डिप्रेशन में जाने का खतरा बढ़ जाता है।

बच्चों के डिप्रेशन को कुछ उपायों से कम किया जा सकता है। इसके लिए आपको निम्न तरह के उपायों को आजमाना चाहिए।

  • बच्चों की शुरूआती जिंदगी में ज्यादा बदलाव न करें : जब बच्चा छोटा हो तो घर व उसके स्कूल को बार-बार न बदलें। इससे बच्चा मानसिक रूप से तनाव में आ सकता है।
  • बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार करें : बच्चों को घर में अच्छा माहौल दें, इससे बच्चे और माता-पिता के बीच गहरा और आत्मीय रिश्ता बनता है।
  • ज्यादा देखभाल करने वालों का साथ रखें : बच्चे की ज्यादा देखभाल करने वाले जैसे – शिक्षक, रिश्तेदार, या आस पड़ोस के व्यक्ति आदि के साथ बच्चे को ज्यादा से ज्यादा समय बिताने के लिए कहें। (और पढ़ें - तनाव को दूर करने के लिए जूस)
  • बच्चे के साथ हर विषय पर बात करें : कई बार बच्चे अपने मन की किसी बात को संकोच के कारण माता पिता को नहीं बता पाते हैं, ऐसे अधिकतर बच्चे डिप्रेशन का शिकार होने जाते हैं। इसलिए आप बच्चे के साथ हर विषय पर बात करने की कोशिश करें, ताकि बच्चा बिना
    
    किसी संकोच के आपको अपनी सारी परेशानी बता सके।
  • बच्चे की जरूरतों को समझें : माता-पिता को बच्चे की जरूरतों को समझना चाहिए। बच्चे को प्यार के साथ ही स्वतंत्रता भी दें, ताकि वह सही और गलत के बीच के अंतर को समझ सके।

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