Latest

बिना म्यूजिक बजते हैं आपके कान हो सकती है ये बीमारी

क्या आप के आस पास कोई आवाज न होने के बावजूद आप कोई आवाज सी सुनते हैं? घंटी, हिस्स, या फिर दहाड़ जैसी कोई आवाज आपको अक्सर सुनाई देती है? अनदेखा अंजाना सा कोई म्यूजिक लगातार आपके कान में बजता रहता है? अगर आपके दोनों कानों में या फिर किसी एक कान में हमेशा झींगुर जैसी आवाज या घंटी बजने की आवाज सुनाई देती है? कोई ऐसी आवाज आती है जो आपको रात में सोने नहीं देती और आप इतने परेशान हो चुके हैं कि आपके अंदर जीवन खत्म कर लेने की प्रवृत्ति उठती है तो यकीन मानिए आपको अब कम सुनाई देने लगा है. इससे धीरे-धीरे बहरापन भी हो सकता है. ये टिनिटस बीमारी के लक्षण हैं|

क्या कहते हैं डॉक्टर्स- डॉक्टरों को आशंका है दिल्ली में युवाओं की बड़ी आबादी ‘टिनिटस’ बीमारी से ग्रसित हो सकती है. दिवाली के बाद इसके 30 फीसदी मामले बढ़े हैं. बढ़ते हुए ध्वनि प्रदूषण के बीच अगर आप तेज म्यूजिक सुनने के शौकीन हैं, तेज वॉल्यूम पर टीवी देखने या रेडियो सुनने के आदी हैं तो फिर आप इस बीमारी को खुद ही दावत दे रहे हैं| स्पीच थेरेपिस्ट डॉक्टर सोनिया गुप्ता ने बताया कि, “कल कारखानों के शोर से कान की कई समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं जिसमें सबसे ज्यादा समस्या टिनिटस की है. सोनिया गुप्ता का कहना है ये आवाजें कान के अंदर की कोशिका के क्षतिग्रस्त होने से होती हैं. ये इनसे लगातार या फिर रुक-रुक कर कानों में बहुत दर्द होता है|
डॉक्टर सोनिया गुप्ता का कहना है हर रोज तकरीबन एक दर्जन लोग प्रीत विहार स्थित उनके सेंटर पर पहुंच रहे हैं जिसमें ऐसे युवाओं की संख्या ज्यादा है जो म्यूजिक लवर्स हैं और अक्सर लाउड म्यूजिक से संगीत सुनते हैं. अगर आप तेज म्यूजिक के शौकीन हैं तो आपको जल्द ही बहरेपन की भी शिकायत हो सकती है| हेडफोन के लगातार इस्तेमाल और ध्वनि प्रदूषण की वजह से भी आपके कान बज सकते हैं. दरअसल इंसान का कान 60 से 70 डेसीबल की आवाज बिल्कुल सहजता से सुन सकता है लेकिन दिवाली के दौरान पटाखे का शोर, शादी का बैंड बजना, बम फूटना, गोला बारूद का विस्फोट आदि से करीब 140-107 डेसीबल आवाज होती है ऐसे में कान खराब होने का खतरा बढ़ जाता है कई बार लोग इसकी वजह से सुनने की क्षमता भी खो बैठते हैं|

 

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन(WHO) की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 360 मिलियन लोग यानी पांच में से एक शख्स इसका शिकार है. एक रिपोर्ट कहती है 2035 तक 15.6 मिलियन लोग इस समस्या से ग्रस्त हो सकते हैं| डॉक्टर स्पेक्ट्रा के प्रशांत गोयल ने बताया कि टाई नाइट्स की रोकथाम के लिए डिवाइस थेरेपी का इस्तेमाल होता है जो आवाज पैदा करने वाले न्यूरॉन्स पर असर करते हैं|

PURAN DESK



हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



नवीनतम पोस्ट



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ