EPISODE4 ; शिवलिंग और न्यूक्लियर रिएक्टर में समानता के पीछे है गहरा भेद? Why Scientists are Curious to Know the Science Behind Shivlinga?

EPISODE4 : Scientific analysis of Shiva Lingam, https://youtu.be/lQMmTEPKihg शिवलिंग के पीछे छुपा है विज्ञान ? शक्‍ति के स्रोत है शिवलिंग और न्यूक्लियर रिएक्टर ? जानकर हैरान रह जायेगे ?

क्या शिवलिंग का परमाणु विज्ञान से कोई सम्बन्ध है?
क्या शिवलिंग दुनियाभर के परमाणु केन्द्रों का सार हैं?
क्यों वैज्ञानिक शिवलिंग का विज्ञान जानने को उत्सुक हैं?
आइए, जानते हैं शिवलिंग का परमाणु कनेक्शन और उससे जुड़े रहस्य

भारत में धर्म सिर्फ आस्था का विषय नहीं है. सभी मान्यताओं और पूजा
पद्धतियों के पीछे विज्ञान का गूढ़ रहस्य छुपा है. विदेशों में पहले इसे
अन्धविश्वास और धार्मिक पाखण्ड बताकर भले ही उपहास किया जाता रहा हो,
लेकिन आज अमेरिका जैसी महाशक्ति भी भारतीय धर्म और प्राचीन विज्ञान का
लोहा मान रही है.और उसका अपने वैज्ञानिक अध्ययनों में इस्तेमाल कर रही
है.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेन्सी NASA और परमाणु विज्ञान से जुड़ी तमाम संस्थाएं
आज भारतीय धर्म और विज्ञान के पीछे छुपे गूढ़ रहस्य को जानने के लिए
पुराणों और शास्त्रों का अध्ययन कर रही हैं. इसमें सबसे गूढ़ शिवलिंग का
रहस्य आज भी वैज्ञानिकों को सोचने के लिए मजबूर कर देता है. क्या शिवलिंग
का परमाणु विज्ञान से कोई नाता है? क्या परमाणु शक्ति के प्राचीन रहस्यों
में शिवलिंग का कोई स्थान है? न्यूज पुराण इन्हीं तथ्यों के साथ एक बार
फिर आपसे रू-ब-रू हो रहा है. तो जानते हैं शिवलिंग के रहस्य और उससे जुड़ी
पद्धतियों के पीछे छुपे विज्ञान के बारे में…..

भारत में शिवलिंग को को युगों-युगों से बहुत महत्त्व दिया गया है.
ब्रह्माण्ड के प्रतीक के रूप में शिवलिंग पूजा अनादिकाल से की जा रही है.
सभी ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति के पीछे पौराणिक कथाएं और किंवदंतियाँ
लोकप्रचलित हैं. लेकिन देश-विदेश के कुछ वैज्ञानिकों ने काफी शोध के बाद
ज्योतिर्लिंगों का परमाणु केन्द्रों से सम्बन्ध जोड़ा है. लिंगम की पूजा
सिर्फ भारत और श्रीलंका तक सीमित नहीं है. प्राचीन मेसोपिटामिया के एक
शहर बाबुल में पुरातत्व निष्कर्षों में शिवलिंग प्रतिमाएँ मिली  हैं.
लिंगम को रोमन लोगों ने “प्रयापस” कहा, जिन्होंने यूरोप में शिवलिंग की
पूजा शुरू ही. इसके अलावा, हड़प्पा और मोहन-जोदड़ो में बड़ी संख्या में
शिवलिंग प्राप्त हुए हैं.

शिवलिंगों के विषय में कई तथ्य खोजे गये हैं, जो आमतौर पर बहुत कम लोग
जानते हैं. अनेक वैज्ञानिक अध्ययनों और विश्लेषणों में शिवलिंगों का
सम्बन्ध परमाणु ऊर्जा से बताया  गया है. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि
ज्योतिर्लिंग परमाणु रिएक्टर का स्वरूप हैं. वे करते हैं कि शिवलिंग एक
गोल आधार अर्थात पीडम पर स्थित होता है. मध्य भाग अष्टकोणीय होता है.
शीर्ष भाग गोलाकार है और इसी भाग की पूजा की जाती है. ये तीन भाग क्रमश:
ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं.

डेनमार्क के वैज्ञानिक नील्स बोहर का कथन है कि परमाणु से बने MOLECULES
में protone, nutrone और electrone होते हैं. प्राचीन भारत में ये
अंग्रेजी शब्द प्रचलन में नहीं थे. उस समय ऋषियों ने लिंगम, विष्णु,
ब्रह्मा, शक्ति जैसे शब्दों का प्रयोग किया. शक्ति रेणुका और रूद्राणी के
रूप में विभाजित है.

महर्षि व्यास ने महाभारत में भगवान शिव को लघुतम से लघु और बड़े से भी बड़ा
बताया है. उनके अनुसार सभी जड़ और चेतन की उत्पत्ति शिव से होती है.
सम्पूर्ण विश्व उनसे व्याप्त है. वह कालातीत हैं. उनकी न उत्पत्ति है न
विनाश. वह निरंजन हैं. अदृश्य हैं. वह सभी की आत्मा हैं.

विष्णु protone के प्रतीक हैं, जिनमें पोजिटिव इलेक्ट्रिक चार्ज है. महेश
nutrone के प्रतीक हैं, जिसमें इलेक्ट्रिक चार्ज नहीं होता. ब्रह्मा
electrone के प्रतीक हैं, जिसमें negative electrone charge होता है.
शक्ति ऊर्जा है. शिवलिंग परमाणु संरचना के प्रतीक हैं.

वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनिया भर के रेडियोएक्टिव मैप ज्योतिर्लिंग
के आकार के हैं. सभी ज्योतिर्लिंग नदियों अथवा समुद्र के पास प्रतिष्ठित
हैं. इनके ऊपर लटके हुए पात्र से बूँद-बूँद जल शिवलिंग पर टपकता है.
परमाणु रिएक्टर को भी ठंडा रखा जाता है. शिव की जटा में गंगा और मस्तक पर
चन्द्रमा उन्हें शीतल रखते हैं. शिवलिंग पर भी जल इसीलिए चढ़ाया जाता है.
विल्बपत्र, आक, धतूरा, गूडल आदि को शिव की प्रिय वस्तुएं माना जाता है.
ये सभी चीजें ऊर्जा को सोखने वाली होती हैं.

वैज्ञानिकों ने शिवलिंग को परमाणु मॉडल माना है. उन पर अर्पित जल को
पवित्र नहीं माना जाता और न उसे प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता. शिवलिंग
की पूरी परिक्रमा भी नहीं की जाती. इससे रेडिएशन होता है, क्योंकि यह एक
प्रकार के ग्रेनाइट पत्थर से बनता है. ग्रेनाइट रेडिएशन का स्रोत होता है
और उसमें अधिक रेडियोएक्टिविटी की पुष्टि हुयी है. अर्पित जल जिस नलिका
से बाहर निकलता है, उसे लांघा नहीं जाता. ऐसा करने का सिर्फ इतना  कारण
है कि इस जल में परमाणु तत्व होते हैं, जो शरीर को हानि पहुँचा सकते हैं.

वैज्ञानिक बोहर के मॉडल से स्पष्ट होता है कि परमाणु न्युक्लस के आसपास
अलग ऊर्जा की कक्षाएं स्थित होती हैं.इस मॉडल से शिवलिंग का अध्ययन करने
से इस पहेली का भी हल होता है कि ब्रह्मा ने श्रृष्टि की रचना की.
शिवलिंग परमाणु का प्रतिनिधित्व करता है.

विष्णु की नाभि से ब्रह्मा को एक कमल पर बैठा हुआ दर्शाया गया है. कमल
ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें आकर्षण शक्ति है. कमलनाल झुक सकती
है. यह इस बात का प्रतीक है कि ब्रह्मा विष्णु की परिक्रमा करते हैं.
अर्थात विपरीत विद्युत् आवेश के कारण इलेक्ट्रोन प्रोटोन की तरफ आकर्षित
होते हैं.

प्राचीन ऋषियों के अनुसार, जब शिव क्षुब्ध अथवा विरही नहीं होते तब वह
शांत रहते हैं, क्योंकि शक्ति  रेणुका में होती है. molecules का निर्माण
करने वाली energy रेणुका है. रेणुका ही रेणु अथवा molecules का निर्माण
करती है. वैज्ञानिक शोध से यह तथ्य सामने आया है कि विश्व की उत्पत्ति
molecules के निर्माण से हुयी. दो परमाणु से मिलकर एक molecule बनता है.
इसलिए प्राचीन हिन्दू ग्रंथों में शक्ति को शिव की अर्धांगनी के रूप में
निरूपित किया गया है.

बहरहाल, जब nutrone क्षुब्ध होता है, तो प्राकृतिक आपदाएं आती हैं. यह इस
बात का प्रतीक है कि शक्ति रौद्र अथवा काली का रूप धारण करके विध्वंसक
नृत्य करती है.

प्रसिद्ध इतिहासकार पी.एन. ओक ने अपनी पुस्तक “वैदिक विश्व : राष्ट्र का
इतिहास” में प्राचीन भारत में 12 molecular energy centres का वर्णन किया
है. उनके अनुसार भारत में 12 ज्योतिर्लिंग हैं. ये सभी रिएक्टर इन्हीं
ज्योतिर्लिंगों में स्थित थे.

इस सभी स्थानों पर निश्चित रूप से परमाणु ऊर्जा केंद्र स्थित थे. इन्हीं
के कारण इन स्थानों पर यूरेनियम की मात्रा अधिक है. इसका सबसे अच्छा
उदाहरण यह है कि काशी के पानी में यूरेनियम की उपस्थिति मिलती है.

कुछ वर्षों पहले कुरुक्षेत्र में रेडिएशन टेस्ट किये गये थे और यह पाया
गया था कि सामान्य स्थानों की तुलना में वहाँ रेडिएशन 3 फीसदी अधिक है.
ऐसा शायद महाभारत युद्ध के कारण है, जिसमें निश्चित रूप से परमाणु
शस्त्रों का प्रयोग किया गया था.

पंचाक्षरी मंत्र  ॐ नाम: शिवाय को महामंत्र मानने का कारण भी शायद यही है
कि इस मंत्र के उच्चारण से अद्भुत ऊर्जा और प्रभाव उत्पन्न होता
है.श्रीलंका के वैज्ञानिक आयाथुरे राजसिंगम ने भी उपरोक्त में से अनेक
तथ्यों की पुष्टि की है.

ENGLISH-

Is Shivlinga Related to Atomic Science?

Is Shivlinga Model of Nuclear Reactors Across the World?

Why Scientists are Curious to Know the Science Behind Shivlinga?

Let us Know the Atomic Connection of Shivlinga and its mystery

In India, religion is not merely a matter of faith. All its beliefs and modes of worship have an abstruse scientific base and mystery.In foreign countries these might have been termed as superstitions and deception in the past, but now they the superpower America are recognizing the depth and sublimity of Indian religion and its ancient science.

NASA and many other organizations working on atomic science are studying the Puranas and other ancient scriptures of India to decode the mystery of Indian religion and science. Shivlinga continues to be most mysterious for the scientists. They are trying to know whether Shivlinga has something to do with atomic science. The News Puran has come out with certain facts about this in this episode. Let us try to learn about the mystery behind Shivlinga and its various aspects.

Shivlinga has always been an important part of religion in India. It represents the cosmos and has been worshipped since time immemorial. There are certain mythological stories and legends vis-à-vis origin of the Jyotirlingas. Some scientists have found a connection between Shivlinga and atomic reactors after lot of research. Linga worship is not confined to India and Sri Lanka. Statues of Shivlinga were found in the archaeological findings inBabylon city of ancient Mesopotamia. Lingam was referred to Prayapas by the Romans, who were introduced to Hindu traditions.Shivlingas were found in large numbers in Harappa and Mohan-Jodado.

Various facts have been explored about Shivlinga which are very little known. Many scientific studies have suggested a link between Shivlinga and atomic energy. Some scientists opine that Shivlinga represents atomic reactors. Shivlinga has three parts. The bottom part is four-sided. It is underground. The middle part is eight-sided and remains on a pedestal. The top part is round and this part is worshipped. These three parts represent Brahma, Vishnu and Mahesh, respectively.

According to Danish scientist Neils Bohr, Molecules made up of Atoms which consist of Proton, Neutron and Electron. In ancient times these terms were not prevalent, so thesages used terms like Lingam, Vishnu, Brhama,Shakti. Shakti was divided into Renuka and Rudrani.

The author of the Mahabharat, Sage Vyasmentions that Lord Shiva is smaller than the smallest and greater than greatest. Everything, whether living or non-living, originates from Shiva. He engulfed the whole world. He is Timeless. He has no birth or death. He is invisible and unmanifest. He is the Soul of the Soul.

Vishnu symbolizes Proton with positive electrical charge. Mahesh signifies Neutron with no electrical charge and Brahma signifies Electron with negative electrical charge. Shakti is energy. Shivlinga represents the atomic structure.

Scientists opine that the radioactive maps all over the world are of the shape of Shivlinga. All the Jyotirlingas are situated near rivers or seas. Water drips drop by drop on the Shivlingas from a pot hanging above it. Atomic reactors are also kept cool. The Ganges in the matted hair of Shiva and the crescent on his forehead keep him cool. Water is also poured on Shivlinga to keep it cool.BilvaPatra commonly known as Beal, Dhatura or Harebell, Goodal or Hibiscus Rose-Sanseis etcoffered to Shiva are said to beHis favourite.All these things absorb energy.

According to some sceitists, Shvlinga is an atomic model.The water poured on Shivlinga is not considered pure and is not consumed as Prasadam. Full circumambulation of Shivlinga is not allowed. It has radiation because it is made of a type of granite which is a source of radiation. It is said that the radioactive elements may harm the body.

The Bohr model shows that the electrons in atoms are in orbits of differing energy around the nucleus. An examination of the Shivlinga in the contest of Bohr model, would demonstrate the truth that Brhama has created the world.Shivlinga represents atom.

Brahma is shown as seated on the lotus arising from the navel of Vishnu.Lotus signifies Energy which has the force of attraction. This is a message that Electron is attracted to Proton because of the opposite electric charge.

According to ancient sages, when Shiva is not disturbed and separated, He remains calm. He remains calm because Shakti takes the form of Renuka. The energy which forms the molecules is denoted by its valecy, which in Sanskrit is Renuka. Renuka is one produces Renu or molecule. Two atoms make one molecule. Hence ancient sages brought the idea of Shakti as Shiva’s wide.

However, when Neutron is disturbed and separated, natural disasters occur, which signifies that Shakti turns out to be a terror known as Rudrani or Kali.

Famous historian P.N. Oak, in his book “VaidikVishwa: RashtraKaItihas” has described 12 Molecular Energy Centres of ancient India. According to him, all these reactors were located at these 12 Jyotirlignas. This is the reason that the presence of Uranium is higher at these places. Uranium is available in the ground water of Kashi or Varanasi.

A few years ago, scientists conducted a radiation test at Kurukshetra that showed 3 percent higher presence of radiation in comparison to normal places. It is, perhaps, due to the Mahabharat war, in which atomic weapons are said to have been used.

The Panchakshari Mantra Om NamahShivay is considered to be the greatest of Mantra as chanting of it produces amazing energy and effects.

 

Priyam Mishra



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