मुद्दे : कोविड-19 के दौर में भी दुनिया की हर तीसरी बाल विवाह की शिकार महिला भारत से

मुद्दे : कोविड-19 के दौर में भी दुनिया की हर तीसरी बाल विवाह की शिकार महिला भारत से
क्या आपको मालूम है दुनिया में सबसे ज्यादा बाल विवाह आज भी भारत में होते हैं ? मुख्य तथ्य, भारत में चार में से लगभग एक युवा महिला 18 वें जन्मदिन से पहले विवाहित होती है। विश्व की तीन में से एक बालिका वधू भारत में रहती है।

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बाल विवाह 


देश के 223 million child brides में से 102 मिलियन की शादी 15 साल की उम्र से पहले कर दी गई थी। भारत में 40 प्रतिशत से अधिक युवतियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले कर दी गई थी। आधे से अधिक भारतीय बाल वधू पांच राज्यों में रहती हैं: उत्तर प्रदेश, बिहार,पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश। बाल वधू की सबसे बड़ी आबादी, 36 मिलियन के साथ उत्तर प्रदेश इनका घर है।


बाल विवाह की प्रथा आज पहले की तुलना में कम है। दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तुलना में भारत की प्रगति ठीक है। फिर भी, अगर 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करना है, अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता होगी। लड़कियों की तुलना में लड़कों में बाल विवाह कम है, और यदि प्रगति अच्छी रही तो 2030 तक लड़कों में प्रथा को समाप्त किया जा सकता है।



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देश प्रेम है तो समाज की कुरीतियां भी ख़त्म हों



कोविड-19 के दौर में भले ही कुछ मुद्दे पीछे चले गए हो लेकिन उनका वजूद खत्म नहीं हुआ है। इन मुद्दों पर आज भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

बाल विवाह 


दुनिया में रहने वाले हर सात लोगों में एक भारतीय है। लेकिन यूनिसेफ की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार आज भी दुनिया की हर तीसरी बाल विवाह की शिकार महिला भी भारत से है। वो भी तब, जब देश में पिछले 92 सालों से बाल-विवाह (child marriage) निषेध कानून लागू है, जिसे तमाम विरोधों के बावजूद अंग्रेजी हुकूमत ने 1929 में लागू किया था। अंग्रेजों ने 1921 की जनगणना में पाया कि इस कुप्रथा से प्रसव के दौरान भारत में जितनी महिलाएं व बच्चे मरते हैं उतने प्रथम विश्व युद्ध में भी नहीं मरे थे।


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वैज्ञानिक तथ्य है कि कम उम्र में शादी के बाद प्रजनन के लिए बाल-वधुओं के अंग विकसित नहीं होते लिहाजा या तो प्रसव के दौरान जच्चा या बच्चा मर जाते हैं या बच्चा शारीरिक-मानसिक रूप से कमजोर पैदा होता है। नतीजतन देश एक कमजोर राष्ट्र बनता है।



पिछले कुछ वर्षों में 'भारत माता की जय' व देश प्रेम के तमाम प्रतीकों के नारे कहीं भी सुनने को मिल जाएंगे। ऐसा लगता है कि देश भक्ति का एक नया जज्बा हिलोरें ले रहा है। लेकिन क्या हमारी सोच भी देश को आगे बढ़ाने वाली बनी है ? बाल-विवाह (child marriage) रोकने के प्रयासों के खिलाफ एक नया अवरोध' शीर्षक इस रिपोर्ट के अनुसार बाल-विवाह (child marriage) की स्थिति कोरोना काल में और बदतर हुई है और भारत भी नाइजीरिया, इथोपिया, ब्राजील और बांग्लादेश के समकक्ष खड़ा है।

बाल विवाह 


देश प्रेम की पहली शर्त है देशवासी वैज्ञानिक सोच विकसित करें, कुप्रथाएं ख़त्म करें और व्यक्तिगत रूप से भ्रष्ट न हों। लेकिन भ्रष्टाचार सूचकांक में भी दुनिया के 180 देशों में भारत 2019 के मुकाबले 6 खाने फिसल कर 86 वें स्थान पर पहुंच गया है।


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यही नहीं, इस पैमाने पर भारत विश्व और एशिया के औसत से भी नीचे मिला यानी कई एशियाई देश भारत से ज्यादा ईमानदार हैं। क्या जरूरी नहीं कि देश प्रेम के पाठ में व्यक्तिगत ईमानदारी, कुप्रथा समाप्ति और वैज्ञानिक सोच भी शामिल हो ?


 

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