जो अच्छा लगता है उसका सब कुछ अच्छा लगता है – दिनेश मालवीय “अश्क”

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जो अच्छा लगता है उसका सब कुछ अच्छा लगता है
सारे ऐब, कमी सारी हर ढब कुछ अच्छा लगता है।

कमी अक़्ल की हो थोड़ी तब तो कुछ दिल की बात बने
ज्यादा सूझ-समझ वालों को कब कुछ अच्छा लगता है।

और नया कुछ दर्द मिला तो दिल का घायल यह बोला
अब दिल ने राहत पायी है अब कुछ अच्छा लगता है।

बड़ी ज्ञान की गठरी लादे फिरे भले ही दुनिया में
सही अमल वाला हो ज्ञानी तब कुछ अच्छा लगता है।

कोई मतलब हो तब ही दौड़े कोई आगे-पीछे
क्या दुनिया में कोई बेमतलब कुछ अच्छा लगता है।

बहुत सलीके वाले बंदे जाने क्यों अच्छे न लगे
“अश्क”आदमी खिसका और बेढब कुछ अच्छा लगता है।

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