गांधी की नजर में गांधी जयंती: सरयुसुत मिश्रा


स्टोरी हाइलाइट्स

पूरे देश में जहां जहां गांधी प्रतिमा स्थापित है वहां आज आधुनिक गांधीवादी पुजारी पहुंचे| इन पुजारियों को देखकर गांधी प्रतिमा को ......

गांधी की नजर में गांधी जयंती: सरयुसुत मिश्रा पूरे देश में जहां जहां गांधी प्रतिमा स्थापित है वहां आज आधुनिक गांधीवादी पुजारी पहुंचे| इन पुजारियों को देखकर गांधी प्रतिमा को स्मरण आया कि एक साल निकल गया. एक साल पहले यह गांधीवादी पुजारी दिखे थे| गांधी प्रतिमा के आसपास जो प्राकृतिक वातावरण था उसे गांधीवादी पुजारियों के आगमन को देखते हुए साफ-सुथरा किया गया और गांधी प्रतिमा के प्राकृतिक स्वरुप को बदला गया| गांधी प्रतिमा ने देखा कि सत्ता के गांधीवादी विचार और विपक्ष के गांधीवादी विचारों में जबरदस्त अंतर है| गांधी का सत्य अहिंसा स्वराज सत्याग्रह के मायने भी सत्ता और विपक्ष के लिए अलग-अलग हैं| सत्ता के लिए जो सत्य दिखता है वह विपक्ष के लिए झूठ है| सत्ताधारी अहिंसा के प्रबल समर्थक हैं तो विपक्षी हिंसा का सहारा लेकर अपनी राजनीतिक उपस्थिति बनाते हैं| सत्याग्रह तो विपक्ष का हथियार ही है| स्वराज की बात करें तो आजादी के 75 साल बाद भी वो जमीन पर नहीं उतर सका है| सुराज स्लोगन और Logo में तो बहुत सुंदर दिखता है लेकिन जमीन पर स्वराज के चिथड़े साफ-साफ दिखाई पड़ते हैं| महात्मा गांधी की जयंती पर एक दिन गांधीवादी चोला धारण करने वाले पुजारी कागज पर छपे गांधी के लिए 24 घंटे संघर्ष करते रहते हैं| नोट पर छपी गांधी की आज जितनी कदर है उतनी तो स्वयं गांधी की भी नहीं है| इसके लिए कोई नीति-नियत नहीं, कोई सत्य-असत्य नहीं बस जेब भरी रहे यही एकमात्र लक्ष्य होता है| भ्रष्टाचार का जिस तरह खुला व्यापार हो रहा है वह तो अब प्रतिमाओं को भी दिखने लगा है| प्रतिमा लगाने में भी गांधी के नोट की गुंजाइश निकाल ली जाती है| हर रोज सुर्खियां बनती हैं कि फलां अफसर पकड़ा गया और करोड़ों की संपत्ति मिली| अब तो ऐसा हो गया है कि ऐसी खबरें किसी व्यक्ति पर कोई प्रभाव भी नहीं छोड़ती| भ्रष्टाचार और अनियमितता से नोट कमाने के इतने वैरीअंट चल गए हैं कि इसको रोकने के लिए कोई दवा अथवा टीका काम ही नहीं कर पा रहा है| महात्मा गांधी का सबसे ज्यादा जोर सत्य  पर था| सत्य का प्रयोग स्वयं पर करने के बाद ही दूसरों को ऐसा करने की नसीहत गांधी देते थे| आज तो भाषण का ही शासन चल रहा है. भाषण में राहतों और रोजगार का आनंद लोग उठा रहे हैं| पहले कभी कोई उपहार का वायदा कर मतदाताओं को लुभाया जाता था अब तो पेट भरने का राशन ही वोट का आधार बन गया है| गांधी जातिवाद के खिलाफ थे आज जाति सबसे बड़ा आधार हो गया है| केंद्र ने जातिगत जनगणना पर असमर्थता जताई तो दूसरे चुनाव में अब यह वायदा कर रहे हैं कि उनकी सरकार बनने पर जातिगत गणना कराई जाएगी| आज तो पूरा शासन-प्रशासन सही तथ्यों को उजागर होने से रोकने में लगा रहता है| ऐसी सही बात भी सामने नहीं आए जो सत्ताधारी दल के खिलाफ जाती हो| गांधी का सत्य का प्रयोग तो इतिहास की बात हो गई है? असत्य को सत्य बनाने का प्रयोग आज किसी नेता को बड़ा नेता बनाने के लिए सबसे जरूरी है| गांधी के आदर्श आज सबसे ज्यादा प्रासंगिक हैं| लेकिन अभी तो आदर्श नहीं गांधी के चित्र के साथ छपे नोट ही प्रासंगिक बने हुए हैं| यह दौर भी खत्म होगा और गांधी के आदर्शों पर चलना ही पड़ेगा. विश्व शांति सद्भाव और सर्व समाज के कल्याण के लिए गांधी का रास्ता ही है और इस पर ही चलना पड़ेगा| आज अगर गांधी होते तो शायद वह स्वयं गांधीवाद के आदर्शों को भूल चुके होते| गांधीवाद का सिक्का बाजारवाद के इस दौर में आज केवल राजनीतिक दलों के लिए चुनाव में ही महत्वपूर्ण बचा है| गांधी के आदर्शों की बात करने वाले आचरण में गांधीवाद से कोसों दूर होते हैं लेकिन आज जो दिख रहा है वही बिक रहा है और उसी को लाभ पहुंच रहा है|