मानव जीवन का परम लक्ष्य क्या है ?

अतुल विनोद

मनुष्य का अपने जीवन के अंतिम और परम लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ना बहुत जरूरी है|

क्योंकि जब तक हम अपने बनाने वाले, अपने अंदर रहने वाले और इस पूरी सृष्टि में व्याप्त उस परम पिता को नहीं जानेंगे तब तक हम जीवन के असल मकसद को भी नहीं समझ सकेंगे |

निराशा का कारण भी यही है, क्योंकि हम अपने अंदर व्याप्त अपने रचनाकार को, अपने आप से ही दूर करते चले जा रहे हैं,  हम पत्तियों को सींच रहे हैं, लेकिन जड़ को भूल रहे हैं, हर मनुष्य को यह जानना चाहिए कि भगवान के साथ उसका संबंध क्या है ?

आप भले भगवान की परवाह करें ना करें, लेकिन परमात्मा आपकी परवाह करता है| हम भगवान को देखे ना देखें ,लेकिन वह आपको देखता है| हम भगवान को माने ना माने लेकिन वह हमे अपनी संतान मानता है, अपना हिस्सा मानता है|

संबंध जब दोनों तरफ से हो तो ज्यादा बेहतर होते हैं, परमात्मा का हमसे संबंध एकतरफा है, परमात्मा हमारे प्रति कृतज्ञ व दयालु हैं, लेकिन हम परमात्मा के प्रति क्या हैं ? कृतज्ञ या कृतघ्न ? 

मुश्किल से यह मानव शरीर मिला है, सोचिए यदि आप नेवला, बिल्ली,बकरी  या चूहा होते तो ?

जब इतना बेहतरीन जीवन मिला है, सबसे श्रेष्ठ “मानव शरीर” तो फिर उसका उद्देश्य क्यों न समझा जाये ?

यह शरीर एक नाव है, जिससे भवसागर से पार हुआ जा सकता है, जिस कार में हम सवार हैं भले ही वह सबसे महंगी हो लेकिन खड़ी हुई कार या लक्ष्य से भटका हुआ वाहन किस मतलब का ? 

हम अपने शरीर के प्रति आसक्त हैं, शरीर के कारण स्वजनों के प्रति जुड़ाव है, इसी कारण घर मकान संपत्ति इन सब के प्रति लगाव है, मंदिरों से लगाव, धर्म स्थलों से लगाव  ? लेकिन इन सब को बनाने वाले से हमारा कोई वास्तविक नाता है क्या ?

शायद नहीं, विज्ञान उस रचना-कार को समझने में नाकाम रहा है | भौतिकता का विज्ञान को पूरा ज्ञान है, लेकिन आध्यात्मिकता से विज्ञान अज्ञान है ! 

यह संसार अनादि काल से चला आ रहा है, यह कब शुरू हुआ यह जानना जरूरी नहीं है, लेकिन यह मानना जरूरी है कि शुरू हुआ और लगातार चल रहा है, इसलिए हमारा अस्तित्व है, ईश्वर सर्वोच्च सत्ता है |

इस संसार में अनेक लोक हैं, कुछ हमारी धरती से ज्यादा उन्नत है तो कुछ कम| परमात्मा हम सब में व्याप्त है और हम सब परमात्मा में व्याप्त है, यह संसार परमात्मा का ही है, भौतिक अस्तित्व में भी परमात्मा है, और आध्यात्मिक अस्तित्व में भी |

भौतिक अस्तित्व के साथ जीवन, मरण, रोग, दोष, जुड़े हैं, लेकिन आध्यात्मिक अस्तित्व के साथ निरंतरता जुड़ी हुई है, इस आध्यात्मिक अस्तित्व को तराशना है, इसे इसके मूल स्वरूप में उजागर करना है |

न्यूज़ पुराण में अमृतवाणी सेक्शन के ज़रिए हम परमात्मा को समझने, परमात्मा के निर्देशों पर चलने और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए महापुरुषों, अवतारों और स्वयं परमात्मा द्वारा दिए गए संदेशों को आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे |

ATUL VINOD



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