स्वर्ग नरक-Swarg Aur Narak

स्वर्ग नरक-Swarg Aur Narak

 

Swarg Aur Narak

प्रश्न :- नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः।।2.23।।
आप इस श्लोक का अर्थ जानते होंगे ,जब आत्मा अविनाशी न आग उसे जला सकती है न जल भिगो सकता है न वायू सूखा सकती है न शस्त्र काट सकते है तो स्वर्ग में सुख कोन भोगता है और नर्क में दुख कोन भोगता है मृत्यु उपरांत ??

उतर :- मन भोगता है क्योंकि मन ही करता है ,आत्मा न आती हर न जाती है न सोती है न जगती है जन्म लेती है न मरती है न सांस लेती है न प्राण त्यागती है ,अब इसको समझना चाहिए फिर किस तरह मन भोक्ता है स्वर्ग नरक ,यह उसी प्रकार है जैसे कोई सुखद ओर दुखद स्वप्न देखे ,स्वर्ग सुखद स्वप्न है और नर्क दुखद स्वप्न दोनो स्वप्न ही है ।

हम सब भली भांति स्वप्न से परिचित है अगर स्वप्न में भोग आ जाए तो बिल्कुल ऐसा नही लगता कि स्वप्न चल रहा है , बल्कि स्वप्न में असलियत से ज्यादा सच प्रतीत होता है ,इसी तरह अप्सराओ के भोग है खान पान के भोग है जो मृत्यु उपरांत स्वर्ग वासी भोक्ता है आत्मा तब भी निर्लेप है केवल देखती है भोगता मन है, मन मे जिस तरह के कर्मो की छाप होती है उसी तरह के स्वप्न निर्मित होते है मृत्यु उपरांत , ओर दूसरी तरफ जब हम दुखद स्वप्न देखते है तो भीतर तके पूरे दहल जाते है कोई आपकी गर्दन काट देता है स्वप्न में आप फिर भी देखे चले जा रहे है कतई गर्दन के सहारे , कोई आपको जला देता हर बुरी तरह जलते है आप स्वप्न में ओर फिर भी बचे रहते है । यह स्वर्ग नरक की ही झांकी है । स्वप्न का आगमन निद्रा में होता है और मृत्यु को चिर निद्रा कहा जाता है जिसे सदा की नींद कह सकते है , ओर जब मन पर कर्मो की परत उतर जाती है तो जीव फिर सृजन में आ जाता है जन्म ले लेता है ,अपनी वृतियों के अनुसार ,वेद वचन है

यथा वृति तथा आकृति

अतार्थ जैसी मृत्यु के समय चित की दशा होगी वैसी ही आकृति यानी आकर यानी रूप योनि प्राप्त होगी जीव को मानसिक कर्मो के भोग उपरांत ।स्वर्ग नरक एक रील की तरह हमारे मन के द्वारा चलाई गई फ़िल्म होते है जब रील खत्म तो भीग खत्म फिर धरती पर प्रारब्ध अनुसार जन्म होता है ,स्वप्न से स्वर्ग नरक के भोग की स्तिथि को समझा जा सकता है,आत्मा को बिना काटे बिना जलाए बिना भेदे बिना भिगोए । इस लिए भगवान श्री कृष्ण ठीक कहते है

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः।।2.23।।

स्वर्ग नरक का एक अलग आयाम है , इस प्रकार जीव स्वर्ग नरक भोगता है ।

सेतु विक्रम


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