हिन्दी लोकोक्तियाँ-5 -दिनेश मालवीय

हिन्दी लोकोक्तियाँ-5

-दिनेश मालवीय

1.   अपनी इज्जत अपने हाथ.

व्यक्ति अपने कर्मों से ही इज्जत पाता है.

आपको यदि अपनी इज्जत प्यारी हो तो दूसरों को इज्जत दो.

Do as you desire to be done by others.

2.   अपना खट्टा भी मीठा.

अपनी वस्तु बुरी हो तब भी अच्छी लगती है.

All his geese are swans

3.   अपना तोसा अपना भरोसा.

अपने धन और अपनी ही शक्ति का भरोसा करना चाहिए.

Everyone must stand on one’s ओन लेग्स.

4.   अपना दीजे, दुश्मन कीजे

किसीको उधार देना, दुश्मनी मोल लेना है.

5.   अपना पेट तो कुत्ता भी पलता है.

अपने लिए तो सभी जीता हैं, सच्चा मनुष्य वह हाई जो औरों की भी चिंता करता है.

6.   अपना रूप और पराया धन सबको अच्छा लगता है.

लोग अपने को अधिक सुंदर और दूसरे के धन को वास्तविक से अधिक आँकते हैं.

7.   अपना सा मुँह लेकर रह जाना

जब कोई व्यक्ति किसी बात को बहुत जोर देकर कहे और वह बात गलत साबित हो,
तो वह लज्जित हो जाता है. यह लोकोक्ति उसके लिए कही जाती है.

8.   अपना हाथ जगन्नाथ

अपने हाथ से किया गया काम अच्छा होता है.

9.   अपनी डफली अपना राग

यह ऐसी स्थति में कहा जाता है, जब व्यवस्था को धता दिखाकर सब अपनी मनमानी करें.

10.  अपनी करनी अपना भोग

आप जैसा करते हैं, वैसा ही फल मिलत है.

As you sow so shall you reap.

11.  अपनी कुटिया घी की पुड़िया

अपना घर चाहे जैसा हो, सबको प्रिय होता है.

12.  अपनी गली में कुत्ता शेर.

ऐसा तब कहा जाता है, जब कोई अपने क्षेत्र, विषय  आदि में अपने को बड़ा समझ
कर धौंस जताए.

13.  अपनी नाक कटे तो कटे, दूसरे का सगुन तो बिगड़े

दूसरों की छोटी हानि के लिए अपनी बड़ी हानि करने वालों के प्रति यह
व्यंग्य से कहा जाता है.

14.  अपनी पीठ अपने को दिखाई नहीं देती.

अपनी गल्ती या अवगुण अपने को नहीं दिखते.

15.  अपनी माँ को कौन डायन कहता है.

अपनी चीज को कोई बुरी नहीं कहता.

16.  अपने घर में सभी राजा

अपने घर में हर किसी का पूरा अधिकार होता है.

17.  अपने द्वार आये सो मेहमान

घर आये शत्रु का भी मेहमान की तरह स्वागत करना चाहिए.

18.  अपने पांव कुल्हाड़ी

स्वयं अपना नुकसान करना.

19.  अपने मन कछु और है, दाता के कछु और.

जब कोई व्यक्ति कुछ करना चाहे, लेकिन संयोग कुछ और हो जाए, तब यह कहा जाता है.

Man proposes God disposes

20.  अपने मन से बिल्ली प्रधान.

मूर्ख व्यक्ति स्वयं को श्रेष्ठ समझता है, चाहे दूसरे ऐसा न मानें.

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