हिन्दी लोकोक्तियाँ 24 -दिनेश मालवीय

हिन्दी लोकोक्तियाँ-24

-दिनेश मालवीय

1.चना मर्द नाज है.
चना सबसे पौष्टिक अनाज होता है.2. चने चबाओ या शहनाई बजाओ
एक समय में एक ही काम किया जा सकता है.

3. चबा न खाए तो पेट दुखाये
खाने को अच्छी तरह चबाकर नहीं खाने से अनेक तकलीफें होती हैं. या जल्दबाजी में काम करने से कष्ट होते है.

4.चलता पुर्जा
चालाक आदमी.

5.चलती का नाम गाड़ी.
जब तक कोई वस्तु उपयोगी होती है, तो उसकी कद्र होती है वरना कबाड़ हो जाती है.

6. चलती के पौबारह
प्रभावशाली व्यक्ति के सब काम आसानी से हो जाते हैं.

7.चलती में अस अपने.
अच्छे दिनों में सभी साथ होते हैं.

8. चलती हवा से लड़ना
बहुत झगड़ालू होना.

9. चलते बैलको डंडा मारना.
अच्छा काम करते हुए व्यक्ति में दोष निकालना या टोंकना.

10. चल निकलना.
किसी काम की सफलता पर कहते हैं.

11.चलनी में दूध दुहना.
ऐसा काम करना जो परिणाम दे ही नहीं सकता.

12. चाँद को भी ग्रहण लगता है.
महान से महान व्यक्ति पर भी कलंक लग जाता है.

13.चांदी का चश्मा लगाना
रिश्वत लेना.

14. चाचा चोर भतीजा क़ाज़ी
जब चोर का रिश्तेद्दार न्यायाधीश हो तो न्याह की उम्मीद नहीं होती.

15.चादर थोड़ी, पैर पसारे बहुत.
आमदनी से बहुत अधिक खर्च करने पर कहा जाता है.

16. चार दिन की चांदनी, फिर वही अंधेरी रात.
थोड़े दिन सुख पाकर फिर दुःख भोगने पर कहा जाता है.

17. चार वेद एक तरफ, चतुराई एक तरफ.
पुस्तकीय ज्ञान से व्यवहारिक ज्ञान अधिक उपयोगी होता है.

18. चावल और दोस्त पुराने ही अच्छे.
दोनों पुराने ही अच्छे होते हैं.
old is gold.

19.चिंता चिता से बुरी.
चिता मर कर जलाती है, लेकिन चिंता जीते-जी जलती रहती है.

20.चिकना घड़ा.
निर्लज्ज व्यक्ति.


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