हिन्दी लोकोक्तियाँ 26 -दिनेश मालवीय

हिन्दी लोकोक्तियाँ-26

-दिनेश मालवीय

1.जागते को कौन जगाये?
जानबूझकर सोने का बहाना करने वाले या नासमझ होने का नाटक करने वाले को कैसे जगाया या समझाया जाए.

2.जात गँवाई, पेट न भरा.
जब कोई किसी मतलब से कोई नीच कम करे और वांछित लाभ भी न मिले, तब ऐसा कहते हैं.

3.जादू वह जो सिर चढ़कर बोले.
प्रतिभा और कला वही जो सबको सम्मोहित कर दे.

4.जान बची सो लाखों पाए.
किसी आलसी कोकिसी काम छुटकारा मिल जाए या विपत्ति में पड़कर व्यक्ति सकुशल बाहर आ जाये तब कहते हैं.

5.जान में जान आना.
किसी मुसीबत से छुटकारा मिल जाना या संतोष पा जाना.

6.जान है तो जहान है.
जब तक जीवन है, तब तक संसार है. उसके बाद कुछ नहीं. जान बचाने को प्राथमिकता देने पर भी कहते हैं.

7.जाप की ओट में पाप.
पाखंडी साधुओं के विषय में कहते हैं.

8.जाए उत्तर, बताये दक्खिन
कहे कुछ और करे कुछ, ऐसे धोखेबाज के लिए कहा जाता है.

9.जितना ऊपर उतना नीचे.
बहुत चालाक आदमी के बारे में कहा जाता है.

10.जितना गुड़ उतना मीठा.
जिस काम में जितना धन लगाओगे उसीके अनुरूप लाभ होगा.

11.जितना धन उतनी चिन्ता.
जो जितना पैसे वाला होता है, उसके सिर उतनी अधिक झंझटें होती हैं.

12.जितना लाभ, उतना लोभ.
लाभ बढ़ने पर लोभ भी बढ़ जाता है.

13.जितने मुँह उतनी बातें.
हर विषय पर लोगों की अलग-अलग राय होती है.

14.जिन खोजा तिन पाइया.
मेहनत करने वाले को ही फल मिलता है.

15.जिसका खाना, उसका गाना.
अपने मालिक का ई गुणगान कररना. उसके प्रति वफादार रहना.

16.जिसका पेट दुखता है, वही आजवाइन ढूँढता है.
जिसे तकलीफ होती है, वाही उसका हल तलाशता है.

17.जिसका बन्दर उसी से नाचे.
जिसका जो काम होता है, वही उसे कर सकता है.

18.जिसकी लाठी, उसकी भैंस.
जो ताकतवर होता है, उसकी ही चलती है. Might is right.

19.जीना तब तक सीना.
जब तक जीवन है, मेहनत तो करनी पड़ेगी.

20.जीभ का स्वाद बुरा.
ज्यादा चटपट खाने वाले की सेहत ख़राब हो जाती है.


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