ब्लड प्रेशर, नपुंसकता से फिटनेस तक : शहद का इस तरह उपयोग कर देता है कमाल?

ब्लड प्रेशर, नपुंसकता से फिटनेस तक : शहद का इस तरह उपयोग कर देता है कमाल?
प्राकृतिक चिकित्सा: दीर्घायु तक स्वस्थ व निरोग रखता है शहद

HONEY को सभी छोटे-बड़े बहुत स्वाद व रुचि से खाते हैं। आधुनिक परिवेश में अधिकांश घरों में फास्ट फूड के साथ ब्रेक फास्ट में HONEY का सेवन करते हैं। आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथों में HONEY के विशिष्ट गुणों का वर्णन किया है। आयुर्वेद की अनेक औषधियों का निर्माण HONEY के समावेश से होता है। आयुर्वेद की अनेक औषधियों का सेवन HONEY के साथ किया जाता है।

ब्लड प्रेशरSHAHAD का निर्माण मधुमक्खियां फूलों से सरांग लाकर अपने छत्ते में करती हैं। HONEY में प्राकृतिक रूप से मधुरस का समावेश होता है। खोनी, शक्कर व दूसरी मीठी चीजें खाने से पाचन किया विकृत होने से अनेक भयंकर रोग होते हैं लेकिन अदृश्य HONEY का सेवन करने से उन रोगों का रूप से निवारण हो जाता है।

आधुनिक परिवेश में भोजन की अनियमितता और अधिक पौष्टिक भोजन के सेवन से स्त्री-पुरुष 30 वर्ष की आयु को पार करते-करते स्थूलता अर्थात् मोटापे का शिकार हो जाते हैं। 

HONEY के सेवन से स्थूलता पर नियंत्रण रखा जा सकता है। प्रतिदिन 5 से 8 ग्राम HONEY के उष्ण जल में मिलाकर सेवन किया जाए तो स्थूलता नष्ट होती है। स्थूलता स्त्री-पुरुष की आयु को कम करती है। लम्बे समय तक HONEY सेवन करने से दीर्घायु तक स्वस्थ रहा जा सकता है।

उच्च रक्तचाप (HBP) आधुनिक परिवेश में स्त्री-पुरुषों को बहुत पीड़ित करता है। उच्च रक्तचाप की अधिकता किसी भी स्त्री-पुरुष को विभिन्न रोगों का शिकार बना कर आयु को कम कर देती है। ऐसी स्थिति में HONEY का सेवन उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण रख सकता है।

8-10 बादाम रात्रि के समय जल में डाल का रखें और सुबह उनके छिलके अलग करके, उसमें पेठ का 100 ग्राम रस मिलाकर, सबको खरल में पीस कर दिन में तीन बार 10-10-10 ग्राम HONEY मिलाकर सेवन करने से उच्च रक्तचाप कम होता चला जाता है।

HONEY निम्न रक्तचाप (LBP) अर्थात लो ब्लड प्रेशर में भी बहुत लाभ पहुंचाता है। शारीरिक निर्बलता के कारण निम्न रक्तचाप की उत्पत्ति करता है। HONEY में निम्न रक्तचाप को नष्ट करने की अद्भुत शक्ति होती है। HONEY 20 ग्राम और तुलसी का रस 10 ग्राम मात्रा में मिलाकर सेवन करने से निम्न रक्तचाप नष्ट होता है।

कुछ युवा लड़कियां हिस्टीरिया रोग से पीड़ित होती हैं। हिस्टीरिया रोग का सम्बन्ध लड़कियों के लिक से होता है। 

ब्लड प्रेशरHONEY के सेवन से मस्तिष्क को शक्ति मिलती है और हिस्टीरिया का प्रकोप कम होता है। हिस्टीरिया रोगी को तक्र (मट्ठे) में काली मिर्च का चूर्ण, भुना जीरा और 30 ग्राम HONEY मिलाकर प्रतिदिन सेवन कराने से बहुत लाभ होता है। मानसिक तनाव भी कम होता है।

शारीरिक निर्बलता लम्बे समय तक बनी रहे तो मनुष्य जीवन में कुछ नहीं कर पाता। दूसरे निर्बलता के कारण उसकी आयु कम होती चली जाती है। HONEY का सेवन करके निर्बलता को सरलता से नष्ट कर सकते हैं। प्रातः काल स्लाइस पर HONEY लगाकर खा सकते हैं। प्याज के रस में HONEY मिलाकर सेवन करने से निर्बलता नष्ट होती है। अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके उन्हें सिल पर पीस कर HONEY मिलाकर सेवन करने से शक्ति विकसित होती है।

दूध में HONEY मिलाकर पीने से शारीरिक निर्बलता शीघ्र नष्ट होती है। खजूर और HONEY मिलाकर खाने से बहुत लाभ होता है। शारीरिक निर्बलता नष्ट होने से मनुष्य दीर्घायु तक स्वस्थ रहते हैं।

कुछ शिशु जन्म से ही बहुत निर्बल होते हैं और कुछ शिशु सूखा रोग के शिकार होकर अधिक निर्बल हो जाते हैं। सूखा रोग में दूध में HONEY मिलाकर पिलाने से बहुत लाभ होता है। यदि कोई बच्चा सोते समय बिस्तर गीला करता है तो उसे भी HONEY का सेवन कराने से बहुत लाभ होता है। रात्रि को सोने से 20-25 मिनट पहले बच्चे को 5-7 ग्राम HONEY चटाने से बिस्तर गीला करना करना बंद कर देगा।

आयुर्वेद चिकित्सा में अधिकांश औषधियों HONEY के साथ किया जाता है। HONEY अपने गुणकारी तत्वों से शरीर को रोग निरोधक क्षमता प्रदान करता है। कुछ रोगों के निवारण में बहुत सहायता करता है। प्रौढावस्था में शारीरिक शक्ति क्षीण होती है और त्वचा पर झुर्रियां बनने लगती हैं। ऐसे में नियमित HONEY का सेवन करने से बहुत लाभ होता है। 

HONEY के सेवन से प्रौढावस्था की क्षीणता रुक जाती है। HONEY के सेवन से रक्त संचार की गति तीव्र होती है। पाचन क्रिया विकसित होती है। अधिक भूख लगती है। HONEY शरीर की विभिन्न धातुओं को शक्ति देता है और नव यौवन को लौटाता है। HONEY से मस्तिक की क्षीणता नष्ट होती है। प्याज के रस के साथ HONEY मिलाकर सेवन करने से नपुंसकता कम होती है। कामोतेजना प्रबल होती है। दूध में HONEY मिलाकर पीने से बहुत लाभ होता है। घी, मक्खन की अपेक्षा HONEY सरलता से पच जाता है।

प्रौढावस्था में अस्थमा रोग बहुत पीडित करता है। अस्थमा से रोगी प्रतिदिन कमजोर होता है। रात्रि के समय अस्थमा के रोगी को खांसी का तीव्र प्रकोप होता है। रोगी खासते स्वासते परेशान हो जाता है। सास भी नहीं ले सकता। अस्थमा रोगी कमरे से निकल कर खुले वातावरण की ओर दौड़ता है। 

अस्थमा की इस स्थिति में HONEY के सेवन से रोगी को बहुत लाभ होता है।। अस्थमा रोग की अनेक औषधियों का सेवन HONEY के साथ किया जाता है। अस्थमा रोग में खांसी निरंतर रोगी को बेचैन करती है। देर तक खासने पर जब कफ नहीं निकलता है तो रोगी को बहुत पीड़ा होती है। ऐसे में अदरक या तुलसी का रस HONEY मिलाकर चाटकर खाने से बहुत लाभ होता है। कफ सरलता से निकलता है: और खांसी का प्रकोप कम होता है।

अडूसा और अदरक के रस में HONEY मिलाकर सेवन करने से अस्थमा में खांसी का प्रकोप शांत होता है। दिन में कई बार सेवन कर सकते हैं प्याज के 5 ग्राम रस में HONEY मिलाकर चाटकर सेवन करने से अस्थमा में लाभ होता है। HONEY के सेवन से कफ का निवारण होने से फेफड़ों को शक्ति मिलती है। श्री आयुर्वेद सेवा सदन का उत्तराखंड HONEY प्राकृतिक शुद्ध शहद स्वास्थ्य वर्धक है। 


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