ऑनलाइन सामान खरीदने मैं कितना प्‍लास्टिक होता हैं इस्‍तेमाल ?

ऑनलाइन सामान खरीदने मैं कितना प्‍लास्टिक होता हैं इस्‍तेमाल
क्या आपको पता हैं की ऑनलाइन सामान खरीदने से साल भर मैं कितना प्लास्टिक का उपयोग होता है।   इसका आंकड़ा बहुत ज्यादा है।  एक रिपोर्ट के अनुसार देखा जाये तो देश में साल भर के अंदर 1.78 करोड़ टन प्लास्टिक की खपत होती है। इसका 35% हिस्सा पैकेजिंग का है। हम घर बैठे जो ऑनलाइन ऑडर कर सामान मंगाते हैं।  वह हम  तक सुरक्षित आये इसलिए उसकी पैकेजिंग में जमकर प्‍लास्टिक का इस्‍तेमाल होता हैं। इसके आकड़ों के अनुसार ई-कॉमर्स कंपनियां पैकेजिंग के लिए बहुत ज्यादा मात्रा में प्लास्टिक इस्तेमाल करती हैं।



ई-कॉमर्स कंपनियां द्वारा सामान को सुरक्षित पहुंचाने के लिए प्लास्टिक को पैकेजिंग में उपयोग करती हैं। अपना सामान निकालने के बाद यह कचरा बन जाता है। प्लास्टिक का सबसे ज्यादा 35% इस्तेमाल पैकेजिंग के लिए किया जाता है। ई-कॉमर्स इंडस्ट्री में पैकेजिंग के कारण कितना प्लास्टिक कचरा निकलता है, इसक अभी कोई आधिकारिक सर्वे नहीं किया गया लेकिन इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है। जैसा की मालूम है कि ई-कॉमर्स कंपनियां कई बार  पैकेजिंग करती हैं। इसमें प्लास्टिक, पेपर, बबल रैप, एयर पैकेट, टेप और कार्डबोर्ड कार्टून्स होते हैं। 

अब ये जितना प्लास्टिक है अगर ये रिसाइकल नहीं हो पाते तो कचरा बनकर पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। आज के समय में कोई भी ई-कॉमर्स कंपनियां प्रोडक्ट की डिलीवरी के बाद पैकेजिंग का कचरा इकट्ठा नहीं करतीं। लोग भी इन्हें फेंक देते हैं जो कूड़े में इजाफा करता हैं।

बता दें हमारे देश में पैकेजिंग इंडस्‍ट्री की ग्रोथ बहुत तेजी से हो रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में प्‍लास्टिक पैकेजिंग में 14 फीसदी से 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई हैं। इसका प्रमुख कारण है ये ई कामर्स इंडस्‍ट्री का तेजी से बढ़ना हैं। बता दें भारत का हर नागरिक एक साल में लगभग 11 किलो प्‍लास्टिक का इस्‍तेमाल करता हैं। इमका मतलब प्रति व्‍यक्ति प्‍लास्टिक की खपत 11 किलो सालाना है। 

हमारे देश में देखा जाये तो प्लास्टिक का उपयोग और भी बहुत से जगह होता है। सरकार और कई  NGO इसको रोकने के लिए अनेकों अभियान चलाते रहते हैं। लेकिन इसका कोई अच्छा नतीजा नहीं मिल रहा देखने को, अब आगे देखते हैं ये ई कॉमर्स कंपनियां इस विकट समस्या को लेकर क्या कदम उठाती हैं।


Rajesh Narbariya



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