कैसे हुआ भारतीय स्वतंत्रता का पहला संग्राम …..भाग 1

भारत की आज़ादी की वो कहानी जो हर भारतीय को पढना चाहिए.. भाग 1Indiafirstwar-Newspuran

भारत में अंग्रेज लोग पहले व्यापारियों के रूप में आए थे। बहरहाल समय बीतने पर उनमें राजनीतिक आकांक्षा विकसित हुई। 18 वों शताब्दी के दौरान मुगल साम्राज्य के पतन और विनाश के बाद उन्होंने इस दिशा में अपनी राजनैतिक श्रेष्ठता स्थापित करने के लिये युद्धों और कूटनीति के जरिये कार्य करना शुरू किया। यह एक क्रमिक और सुदीर्घ परिणाम सिद्ध हुआ। 18वीं शताब्दी के मध्य में बंगाल पर अंग्रेजों के आधिपत्य के कारण यह कार्य शुरू हुआ और कोई एक शताब्दी में पंजाब को अधिगृहीत करने के साथ पूरा हुआ।

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जिस समय अंग्रेज लोग भारत में अपने साम्राज्य की स्थापना में लगे थे उस दौरान भी उनके अधिकार को चुनौती देने के लिए छुटपुट और अलग-थलक कोशिश की जा रही थी| इन कोशिशों की चरम सीमा सन् 1857 में आई जब भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों ने अंग्रेजों को निकाल बाहर करने की कोशिश में उत्तर और मध्य भारत के बड़े हिस्सों में अपने आपको संगठित किया। इसे अक्सर भारतीय स्वतंत्रता का पहला संग्राम कहा जाता है। यह पारम्परिक सामंती तत्वों द्वारा अपनी खोई हुई सत्ता को फिर से प्राप्त करने के लिये की गई आखरी निश्चयात्मक कोशिश थी। इसे 1858 तक पूरी तरह दबा दिया गया। इससे आधुनिक भारत के इतिहास का एक उल्लेखनीय अध्याय समाप्त हो गया और एक दूसरा अध्याय शुरू हुआ।


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