आत्म साक्षात्कार का विज्ञान… चेतना का जागरण….. अध्यात्म का सही मार्ग क्या है?

ATUL VINOD:-

यूं तो मनुष्य के अंदर जो चेतना(कुंडलिनी) शक्ति है, वह हमेशा जागृत होती है|  लेकिन जब मनुष्य की यह चेतना बहिर्मुखी होती है तब इसे चेतना(कुंडलिनी) की सुप्त अवस्था कहते हैं|  जब यही चेतना अंतर्मुखी होकर क्रियाशील हो जाती है, तब उसे कुंडलिनी की जागृत अवस्था कहते हैं|

हमारी चेतना के 3 भाग होते हैं मन, प्राण और आत्मा|  इन तीनों का संगम “चेतना” यानी कुंडलिनी कहलाती है| चेतना की गतिविधि  हमारी शारीरिक और सांसारिक गतिविधियों तक सीमित होती है| इस सीमित गतिविधि को चेतना की सुप्तावस्था कहने के पीछे गहरे अर्थ हैं|  

चेतना यहाँ सिर्फ भौतिक शरीर तक सीमित रहती है और अपने अध्यात्मिक अस्तित्व के प्रति उदासीन| इस अवस्था में हम संसार की गतिविधियों में मस्त रहते हैं, सुख दुःख में उलझे हुए अपनी सारी शक्तियों को बाहर जाया(नष्ट) करते रहते हैं| जब व्यक्ति में  साधना, उपासना, गुरु कृपा या स्वयं इश्वर के अनुग्रह से चेतना अन्तर्मुखी हो जाती है तभी उसे चेतना की जागृति कहा जाता है| 

इस अवस्था में शक्ति आन्तरिक रूपांतरण की प्रक्रिया शुरू करती है| 
Image result for meditation
शक्तियों के बाहर की तरफ हो रहे प्रवाह(विखराव) को रोककर कुण्डलिनी उनके क्षय को रोकने लगती है| तमो गुण और रजो गुण की निवृत्ति की प्रक्रिया भी यहीं से शुरू हो जाती है| साथ ही सत्व गुण बढ़ने लगता है| 

आमतौर पर साधनाएं करने के लिए हमे कोशिश करना पड़ता है लेकिन शक्ति की क्रियाशीलता के बाद वे साधनाएं स्वयं होने लगती हैं| तब योग, साधना या उपासना हम नहीं करते शक्ति स्वयं करती है| 

चेतना की वाह्य जगत (EXTERNAL WORLD) में क्रियाशीलता को सुप्तावस्था कहने का कारण सीधा सा है| उस वक्त चेतना को अपने अंदर निहित (आत्मा मन व् प्राण की शक्ति) वास्तविक स्वरूप का अहसास नहीं होता| उस वक्त वो खुद को विस्मृत(भूलकर) कर बाहरी सुख दुःख में उलझी होती है|

जो खुद से अनजान है उसे सोया हुआ ही तो कहते हैं| 

कुछ साल के जीवन को असली मानकर सुख बटोरने के  लिए अपना सब कुछ दाव पर लगाने वाले व्यक्ति को भी सोया हुआ कहेंगे| लेकिन शक्ति की जाग्रति के बाद मनुष्य को अहसास होता है कि वो कहाँ उलझा हुआ था, उसका वास्तविक लक्ष्य क्या होना चाहिए और क्या हो गया? 

इसका ये मतलब नहीं कि जीवन यापन करना गलत है लेकिन किसी भी बाहरी लक्ष्य को ही सबकुछ मान लेना गलत है| 

हमारी सभी योग साधनाओं का अंतिम लक्ष्य शक्ति की जाग्रति तक सीमित है|  असल साधना हमारी आन्तरिक जागृत चेतना (कुण्डलिनी) शक्ति ही कराती है| 

प्रचलित योग, पूजा, अर्चना, साधना, उपासना का कोई ख़ास लाभ हमे नहीं मिलता क्यूंकि उसमे हमे करने का भाव(कर्तापन) होता है| हमे ये अहंकार होता है कि मैं साधना कर रहा हूँ| जब शक्ति सब कुछ कराती है तो ये अहंकार नहीं रहता|  क्योंकि उस वक्त करने वाला कोई और होता है| 

हमारा जीवन संस्कार और प्रारब्ध से प्रभावित होता है| संस्कार हमारे कर्मों के कारण हमारे अंदर संचित रहते हैं| संस्कारों का असर हमारे व्यक्तित्व में दिखाई देता  है| प्रारब्ध हमारे पूर्व कर्मों का फल है जो बाहरी परिस्थिति के रूप में सफलता-असफलता के रूप में हमारे सामने आता है|

बाहर की साधना आंतरिक शक्ति साधन के बिना अधूरी है| ये ज़रूर है कि बाहर की साधना से प्रारब्ध के नकारात्मक फलों का असर कम होता है| शक्ति जागरण के बाद होने वाली स्वतः साधना से अंदर का संस्कारों का ज़ख़ीरा नष्ट होता है|
Image result for meditation
हम सब बिना किसी भान(जागरूकता) के सांसे लेते हैं, हमारे बाल अपने आप बढ़ते हैं, हमारी आंखें अपने आप मिच-मिचाती हैं| हमारे शरीर में हृदय की धड़कन से लेकर,रक्त परिभ्रमण,  सभी ग्रंथियों, कोशिकाओं, अस्थियों की गतिविधियां स्वचालित हैं| यह सारी गतिविधियां अपने आप होती हैं हमारा इन पर कोई नियंत्रण नहीं रहता, ना ही हम इस बात का ध्यान रखते यह सारे उपकरण,गतिविधियाँ चल रहे हैं या नहीं|  जाहिर सी बात है कोई ऐसी शक्ति है जो यह सब दिन-रात कर रही है| यही शक्ति हमारी चेतना शक्ति है| इसी शक्ति के कारण आंखें देख रही हैं, कान सुन रहे हैं,, नाक सूंघ रही है, जीभ स्वाद ले रही है| ये चेतना के बहुत सामान्य काम हैं जिन्हें इसकी जाग्रति नहीं माना जाता|

चेतना की सामान्य अवस्था में मन इसके ऊपर नियंत्रण करता है| लेकिन मन आन्तरिक शक्ति को बाहर की गतिविधियों में उलझा कर नष्ट करता रहता है|  “मन” आंख, नाक, कान, जीभ और त्वचा के जरिए शक्ति को बाहर प्रवाहित करता है| मैंने पहले ही बताया था कि चेतना मन + प्राण और आत्मा से मिलकर बनी है|  

चेतना = मन+प्राण+आत्मा 

चेतना की प्रसुप्त अवस्था में “मन”, प्राण और आत्मा पर सवार होता है| जब चेतना जागृत हो जाती है “आत्मा” मन और प्राण पर सवार हो जाती है| उस वक्त आत्मा की सत्ता शक्तिशाली हो जाती है|इसीलिए चेतना की इस जागृति को आत्मशक्ति का जागरण भी कहा जाता है|

जब चेतना यानी कुंडलिनी जागृत हो जाती है, वह  अपनी क्रियाशीलता से अंदर दबे हुए संस्कारों को उखाड़ कर बाहर फेंकना शुरू करती है|

चेतना की जागृति का अर्थ ये नहीं कि हम लक्ष्य तक पहुंचना गए हैं| यहां से तो यात्रा की शुरुआत होती है|  जागृत चेतना से अंदर के बुरे संस्कार डर जाते हैं और वो उसे फिर से सुलाना चाहते हैं| नकारात्मक संस्कार बार बार आन्तरिक शक्ति की राह में रोढा खड़ी करते हैं| 

जन्म जन्मांतर के  काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ  के संस्कार इतनी आसानी से नहीं जाते उन्हें बाहर निकालने के लिए जागृत कुंडलिनी शक्ति  विभिन्न क्रियाओं का सहारा लेती है|

योग के आसन, कंपन, मुद्राएं, प्राणायाम, बंध जैसी बहरी और आंतरिक क्रियाओं के ज़रिये कुंडलिनी संस्कारों को मिटाने का काम करती है|  जागृत कुंडलिनी को मनुष्य को संस्कारों और रोगों से मुक्ति दिलाने में बहुत मशक्कत करनी पड़ती है|

अलग-अलग तरह की शारीरिक क्रिया-प्रतिक्रिया, हाव-भाव, ऊर्जा का आवागमन, यह सब शक्ति की जागृति के संकेत होते हैं|

संस्कारों का प्रभाव खत्म करने के बाद यह आंतरिक शक्ति शरीर के विभिन्न शक्ति केंद्रों(चक्रों) को शक्तिशाली बनाती है|  धीरे धीरे यह आत्मशक्ति अपने ऊपर के सारे आवरणों को हटा देती है|

जब आत्मा के ऊपर से सभी आवरण हट जाते हैं तो हम उसे शुद्ध रूप में देख पाते हैं इसी को आत्म-ज्ञान, आत्म दर्शन या आत्म-साक्षात्कार कहते हैं|

शक्ति की जागृति के बाद लक्ष्य तक पहुंचना कठिन होता है|  यदि हम शक्ति को पूरा सहयोग करते हैं तो वह हमारा रास्ता आसान कर देती है| 

जागृत कुंडलिनी शक्ति मां की तरह है,  जो हमें धो-पोंछकर साफ सुथरा बनाती है|जागृत शक्ति के आगे समर्पण करने वाला साधक अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आसानी से पूरा कर लेता है| पहले यह शक्ति अपने आप से अलग नजर आती है लेकिन पूर्णता की स्थिति में वही शक्ति हमारी आंतरिक शक्ति नजर आने लगती है और वह शक्ति पूरे विश्व में दिखाई देती है|


Atulsir-Mob-Emailid-Newspuran-0

 

 

 


हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



न्‍यूज़ पुराण



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ