करीबी की बीमारी से चिंतित है तो यह करें? How to Stop Feeling Anxious for the Sick

करीबी की बीमारी से चिंतित है तो यह करें?

How Do I Not Worry About a Sick Relative?

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इसमें कोई  डाउट नहीं है की, आप अपने किसी  करीबी की बीमारी के बारे में सुनते हैं तो यह एक  शाक  के रूप में आपके सामने आता है । लम्बे दिन और बेचैन रातें आपके मस्तिष्क पर भारी पड़ने लगती हैं । हालांकि, आप पर जिसका सबसे बड़ा  बुरा प्रभाव पड़ता है वह  टेंशन का है । क्या होगा, क्या गलत हो सकता है,  के बारे में  वरी …

तो, आप अपने बीमार(SICK)  परिजन के बारे में चिंता(worry) करना कैसे थामेंगे ? आपको किसी भी स्थिति के अच्छे और बुरे एस्पेक्ट्स के बारे में एक हद्द तक सोचना चाहिए । जिस  समय आपकी सोच आपको तकलीफ, या परेशान करने लगे, यह समझ ले कि आप सीमा पार कर चुके है । तब उसके बारे में  फालतू थाट्स बंद करें । एक  सीमा के बाद थाट्स चिंता(worry) में बदल जाते हैं ।

सतर्कता

अलर्ट रहने और चिंता(worry) करने में बड़ा अंतर है । सावधानी इस बात की जागृति, तस्दीक है कि क्या  जरूरी है, क्या सहायक है, और रोगी के लिए क्या  नुकसानदायक है; जबकि चिंता(worry) का  अर्थ है, “क्या होगा?” “ मैं क्या करूँगा? ” इस  तरह के थाट्स आपको भीतर से खा जाते हैं ।

जो चिंता(worry) आपको खा जाती है,वह  बेकार है । वह न सिर्फ आपके स्वास्थ्य,  हेल्थ को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि इच्छित  नतीजे लाने में भी रुकावट पैदा करती हैं, तो चिंता(worry)एं कई मायने में  नुकसानदायक हैं ।

नकारात्मक थाट्स  नेगेटिव  नतीजों को जन्म देती हैं ।

चिंता(worry)ए एक प्रकार के नकारात्मक थॉट्स हैं । नकारात्मक विचारों का असर हमेशा उलटे परिणाम लाते हैं । जब आपके  सोच थाट्स नकारात्मक होते हैं,  तो आप  प्रकृति में नकारात्मक  वाइब्रेशन भेजते हैं । वे नकारात्मक स्पंदन एक साथ  नेगेटिविटी को  आकर्षित करते हैं चिंता(worry) से होने वाले नुकसान को जानना, बीमार(SICK) सदस्यों के लिय होने वाली चिंता(worry) को रोकने का पहला  स्टेप है ।

जब आपको फ्रैक्चर होता है,तो डॉक्टर आपको कास्ट क्यों पहनाते हैं? ताकि आप इलाज प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करें । इस बारे में सोचें, यदि आपका हाथ टूट गया है, और आपके पास कास्ट नहीं है, तो आप अपने हाथ को इधर-उधर घुमाते रहेंगे । आप उस पर फोकस करेंगे और यह देखते रहेंगे कि क्या यह जुड रहा है? तो क्या हाथ को ठीक होने का मौका मिलेगा? नहीं । हकीकत में, आपका दखल स्थिति को ओर ख़राब कर देती  है । यही वजह है कि डॉक्टरों ने आपकी टूटी हड्डियों पर एक कास्ट डाला ताकि आप इंटरफेयर न कर सकें । ताकि कुदरत को अपना कार्य करने का और आपका फ्रैक्चर ठीक करने का मौका मिल सके ।

दूसरी ओर, सकारात्मक थाट्स यूनिवर्स  में सकारात्मक स्पंदन भेजते हैं । जो सकारात्मक सबूतों को एक साथ इकठ्ठा करते हैं और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं ।

व्यावहारिक समाधान

भगवान ने कहा है, “समाधान करो , लेकिन चिंता(worry) मत करो ।” इसलिय चलिय हम देखते है की इन कठिन परिस्थितियों में हम क्या कर सकते है । तो प्रियजन की चिंता(worry) के कठिन समय में चिंता(worry) से बचने के व्यावहारिक उपाय यहाँ है:

·    चिंता(worry) करने के बजाय, आप अपने मौजूदा विकल्पों पे काम करें । यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश करें कि आपके परिवार के सदस्य को सही इलाज मिले ।

·    चिकित्सा के अलावा आपके साथ और ध्यान की भी रोगी को जरुरत होती है । कई बार भावनात्मक सहारा ऐसा चमत्कार और परिणाम लाता है जो दवाईयां भी नहीं कर पाती है ।

·    बीमार(SICK) व्यक्ति की खुशी और जरूरतों का ध्यान रखे ।

·    बीमार(SICK) व्यक्ति की जरूरतों को प्राधान्य रखे । अपनी अनुसूची में बीमार(SICK) व्यक्ति की अनुसूची के हिसाब से समजोता करे जिससे समय से उनकी सारी जरूरते पूरी हो सके । मतलब आप बीमार(SICK) व्यक्ति को समय से दवाइयाँ और खाना मिले यह ध्यान रखे ।

·    बीमार(SICK) व्यक्ति की स्थिति के बदलाव पर ध्यान दें लेकिन भावुक न हों । आपका निष्कर्ष डॉक्टर को सहायक होगा ।

·    डॉक्टर जब सलाह दे रहे है तब ध्यान से सुने, अक्सर हम डोक्टर की बात समजने में गलती करते है जिससे खुदको अनावश्यक चिंता(worry) में पाते है ।

·    जब TREATMENT चल रहा हो,तो सतर्क और चौकस रहें; लेकिन अपनी चिंता(worry)ओं के कारण हर कदम पर गैरज़रूरी संदेह न करें ।

·    सचेत रहें, ज्ञान ही शक्ति है । बीमारी के बारे में कुछ बुनियादी शोध करें खास कर के उन पर जिस पर आप चिंतित रहते हैं । सही जानकारी आपको चिंता(worry)ओं से बाहर निकालेगी ।

·    अपने परिवार और दोस्तों के साथ नियमित रूप से अद्यतन के बारे में जानकारी देते रहे । आवश्यक हो तो उनका सहयोग ले । यह आपकी चिंता(worry)ओं में तेजी से कटौती करेगा ।

·    बीमार(SICK) व्यक्ति को आराम महसूस कराने के लिए जो भी करना चाहिए वह करें, जब वह सहज होगा , तो यह आपकी चिंता(worry)ऐ कम होंगी ।

·    बीमार(SICK) व्यक्ति को कभी अपनी चिंता(worry)ओं के बारे में न बताए । उनसे विनम्रता और धैर्यपूर्वक बात करें ।

·    उनकी सभी प्रकार से ध्यान रखते समय, अपना भी ख्याल रखें । खुद भी अच्छा खाए और पर्याप्त नींद ले, परेशान मत हो । सही संतुलन में रहे ।

“जो वर्तमान में नहीं है, उसके बारे में चिंता(worry) मत करो ।” इसलिए, आगे क्या है, इसके बारे में चिंता(worry) न करें, वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करें । आपको अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करना होगा और हर जतन करना चाहिए जो आपसे संभव हो और आप कर सकते हैं, बिना किसी चिंता(worry) किए, सकारात्मकता, पूरे प्यार के साथ देखभाल करो बाकी सब कुदरत पर छोड़ दो ।

How to Cope with the Serious Illness of a Relative

 


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