यदि हों जाए डायरिया : आयुर्वेद के ये उपाय, जड़ से ठीक करते हैं..

यदि हों जाए डायरिया : आयुर्वेद के ये उपाय, जड़ से ठीक करते हैं..

अतिसार(diarrhea) और उसके उपचार:-

अतिसार (diarrhea) का मूल कारण खान पान की गड़बड़ी है, जिसके फलस्वरूप बार-बार मल निस्सरण होता है। पतले आमयुक्त झागदार अथवा नितान्त पानी जैसे दस्त होने लगते हैं। पेट में गुड़गुड़ाहट बनी रहती है। भूख नहीं रहती, प्यास कभी अधिक लगती है, कभी नहीं लगती।


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डायरिया रोग के लक्षण
यदि पेट कृमि हो तो उससे अधिक कष्ट होता है। आहार के सारे तत्वों को वे कृमि भक्षण करते रहते हैं, तब रोगी को प्राणतत्वों से वंचित रह जाना पड़ता है। दस्त के कारण शरीर में दुर्बलता आ जाती है, किसी कार्य में मन नहीं लगता, शरीर में हड़कल और टूटन जैसा अनुभव होता है। कभी-कभी किसी रोगी को ज्वरादि उपद्रव भी देखे जाते हैं।

अतिसार (diarrhea) की आरम्भिक अवस्था में सामान्य औषधियाँ देनी चाहियें। प्रारम्भ घरेलू द्रव्यों से करें। जब उससे काम न चले, तब वे अन्य दवाओं का सेवन करें। 


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पहिले यहाँ साधारण योग ही प्रस्तुत कर रहे हैं :-


दस्त रोकने वाले अनेक योग


लोंग 7 नग, हींग चना प्रमाण और सेंधा नमक आवश्यकतानुसार लेकर जल के साथ पीसें और अतिसार (diarrhea) होने के आरम्भ में ही सेवन करें। इसे गर्मियों में ठण्डा तथा जाड़े की ऋतु में अग्नि पर कुछ गर्म करके देना चाहिये। इससे दस्त रुक जाते हैं।

आम की गुठली, नमक, सोंठ, बेलगिरी और हींग को ताजा पानी में घिसकर पिलाना चाहिये। यदि ठण्डी ऋतु हो तो गर्म करके देना चाहिये। इससे अतिसार (diarrhea) तथा आमातिसार में लाभ होता है।

कच्चे दूध में नींबू निचोड़ कर पिलाने से भी दस्त एवं आम दस्त में लाभ हो जाता है। आम की गुठली को चूने के पानी में घिस कर पिलाने से आमातिसार या रक्तातिसार में भी लाभ होता है।

ग्रीष्म ऋतु के दस्तों में, ताजे पानी में नींबू निचोड़ कर पीने से दस्त रुक जाते हैं। एक लीटर पानी में 2 चम्मच चीनी तथा 1 चुटकी भर नमक मिला कर रखें और थोड़ा-थोड़ा कर पीवें। पानी गर्म करके ठण्डा कर लेना चाहिए। दस्तों में हितकर है।

सूखे हुए आमले और धनियाँ समान भाग का कपड़छन चूर्ण करें और उसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिला कर पानी के साथ सेवन करावें तो अतिसार (diarrhea) (दस्त) में लाभ होगा।


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विषाक्त भोजन खाने से एक परिवार के 3 लोग बीमार
सूखे आमले, धनियाँ, जीरा, सेंधा नमक लेकर जल के साथ चटनी के समान पीसें। आमले की यह चटनी थोड़ी-थोड़ी चाटने से आमातिसार में लाभ होता है। 

सूखी बेलगिरी, सौंफ, ईसबगोल और शक्कर समान भाग लेकर खरल में घोंट लें। यह चूर्ण आधे से एक चम्मच की मात्रा में दिन में तीन बार जल के साथ सेवन करावें। इससे आमातिसार तथा पेट  में ऐंठन (मरोड़) आदि में शीघ्र लाभ होता है।

यदि आमातिसार के साथ खून भी जाता हो तथा रोगी बहुत परेशान हो तो उस इस औषधि चूर्ण का सेवन कराने से शीघ्र लाभ देखा गया है। नीम के बीज (निबौली) की गिरी 10 ग्राम और बड़ी हरड़ का बक्कल 20 ग्राम लेकर  चूर्ण कर लें।

मात्रा:–  2 ग्राम से 5 ग्राम तक, धारोष्ण गोदुग्ध में कुछ मिश्री या शक्कर डाल कर दो तीन बार दें। इससे बार बार खूनी दस्त जाना और दर्द दूर होता है। इस उपयोगी औषधि को रसायन ही समझिये।

एक ऐसा अनार लें, जो न कि अधिक पका हो और न अधिक कच्चा ही हो। उसमें एक छेद करके 1 ग्राम तक अफीम भर दें और छेद करने में जो टोपी उतरी थी, उसे ढँक कर छेद बन्द कर दें। फिर उस अनारं को बिना धुँए वाली, कण्डों की आग में दबा दें, जिससे कि 3-4 घण्टे में भरता बन जाय। किन्तु इस बीच ध्यानपूर्वक उसे जलने से बचाना चाहिए। जब ठीक भरता बन जाय तब उसे महीन पीस कर चटनी के समान करें और शहद के साथ घोट कर जंगली बेर के बराबर की गोलियाँ बना कर सुखा लें।


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मात्रा:– 1 गोली ताजा स्वच्छ पानी के साथ देनी चाहिये। दस्त बन्द करने में यह औषधि बहुत लाभकारी हैं।

लजालू (छुईमुई) की जड़ का चूर्ण 3 ग्राम, दही के साथ सेवन करने से रक्तातिसार में उपयोगी प्रयोग है। शीघ्र लाभ सम्भव है।

धाय के फूल, लजालु की जड़, लोध और सारिवा समान भाग का क्वाथ भी आमातिसार, रक्तातिसार में हितकर रहता है। यह प्रयोग बालकों के अतिसार (diarrhea) में भी उपयुक्त है।

लजालू की जड़, धाय के फूल, अनारदाना और बेलगिरी 2-2 ग्राम, सेंधा नमक और काला नमक 1-1 ग्राम को कूट कर चूर्ण बना लें। इसका सेवन शहद मिला कर करें और ऊपर से चावलों का धोवन पियें। पित्तजन्य अतिसार (diarrhea) तथा मरोड़ और दर्द को शीघ्र शमन करता है। चूर्ण की मात्रा– 1 से 3 ग्राम तक ले सकते हैं।



दस्तनाशक विजयादि वटी:-


शुद्ध भाँग 40 ग्राम, लोध, जायफल, छोटी इलायची के बीज, अजवाइन और मिश्री 25-25 ग्राम, शुद्ध अफीम 10 ग्राम सभी दव्यों को अलग-अलग पीस कर महीन करें। अफीम को पानी में घोट कर रख लें। अब पीसे द्रव्यों को अफीम के इस पानी में खरल करके 200-200 मिलीग्राम की गोलियाँ बनाकर सुखा लें।

मात्रा:- 1 से 2 गोली तक प्रातः सायं ताजा पानी अथवा मट्ठा के साथ देनी चाहिये। वर्षाऋतु में मट्ठा के साथ न दें। उचित समझें तो दूध के साथ भी दे सकते हैं। 

इसके सेवन से सब प्रकार के दस्तों में लाभ होता है। आमातिसार, रक्तातिसार, संग्रहणी, अजीर्ण, मन्दाग्नि, पेट में वायु भरना तथा सभी प्रकार के पेट रोगों में हितकर है। में भी लाभ करती है। भोजन में खिचड़ी, दही आदि लेना चाहिये। 


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अतिसार (diarrhea)- हर विजयापासव - मुखपाक भाँग और बबूल की छाल 500-500 ग्राम, महुआ की छाल 250 ग्राम, सोंठ 125 ग्राम, गुड़ 6 किलोग्राम तथा पानी 25 लीटर लेकर आस निर्माण विधि से आसव बनावें। 

मात्रा:–  20 से 30 मिलीलीटर तक रोगी का बराबर देखकर, समान भाग पानी मिला कर देना चाहिए। इससे अतिसार (diarrhea), आमातिसार, हैजा, पेट शूल, अर्श में बहुत लाभ होता है। पुरुषों के प्रमेह और स्त्रियों के प्रदर में भी हितकर है।

अतिसार क्या है प्रकार,,कारण एवं इलाज क्या है
सर्वातिसार पर रामवाण शुद्ध अफीम, धाय के फूल, इन्द्रयव, नागरमोथा, लोध, कुटज की छाल, अतीस, वायविडंग और गन्धक- पारद की कज्जली सभी द्रव्य 10-10 ग्राम लें। सभी काष्ठौषधियों को कूटकर  कपडे से छान करके, सही तोल कर पूरा वजन 70 ग्राम हो। कज्जली शुद्ध गन्धक और शुद्ध पारद की हो, उसमें अफीम डालकर ठीक प्रकार से खरल करें और तब उपर्युक्तचूर्ण मिला कर पुनः खरल करें। इस प्रकार घोटते-घोटते सभी मिश्रित औषधि द्रव्य काले हो जायेंगे। उस मिश्रण को शीशी में भर कर रखें।


मात्रा:– 100 या 125 मिली ग्राम तक पर्याप्त है। इसे दही के साथ अथवा खट्टे अनार के रस के साथ, आवश्यकतानुसार दिन में दो-तीन बार तक दे सकते हैं। इससे काबू में न आने वाले दस्त भी रुक जाते हैं। प्रवाहिका, ग्रहणी, हैजा (विशूचिका) में भी यह औषधि शीघ्र प्रभाव दिखाती है। भोजन की इच्छा होने पर दाल चावल की खिचड़ी खानी चाहिये।



अतिसार (diarrhea) पर एक अद्भुत योग:-



कड़वी अतीस 20 ग्राम, राल का चूर्ण, शुद्ध अफीम और पुरानी कार्क की भस्म 10-10 ग्राम, प्रवाल भस्म 50 ग्राम, भुनी हुई हींग 3 ग्राम|

सभी द्रव्यों को अत्यन्त महीन पीस कर एकत्र करें। कार्क से तात्पर्य शीशियों पर लगाई गई कार्क (डाट) से है। पुरानी डाट ही अधिक उपयोगी रहती है। उन्हें आग पर भस्म कर लेनी चाहिए। एकत्रित हुई सभी द्रव्यों के चूर्ण को शहद के साथ खरल करके झरबेरी के समान छोटी गोलियाँ बना लें।


मात्रा:– 1 से 2 गोली तक पानी के साथ देनी चाहिए। यदि दुबारा देनी पड़े तो 7-8 घण्टे के अन्तर से 1 गोली दें। इससे दस्त अवश्य रुक जाते हैं। मरोड़ के साथ होने वाले आमातिसार में अधिक उपयोगी है।


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