अवैध कालोनियों का नियमितीकरण समस्या का हल नही: सरयूसुत मिश्र

अवैध कालोनियों का नियमितीकरण समस्या का हल नही

जब अवैध कालोनी वसती है तो क्या सरकारी तंत्र जबावदार नही

सरयूसुत मिश्र

bpl (1)मध्यप्रदेश में अवैध कालोनियों के नियमितीकरण के लिए सरकार नगर पालिक नियमों में संशोधन का एक विधेयक लाई है। अवैध कालोनियों का नियमितीकरण प्रदेश में पहली बार नहीं हो रहा है । इसके पहले भी कई सरकारों ने नियमितीकरण की प्रक्रिया की है। इसके लिए कानून बनाए गए हैं । अब एक बार फिर कालोनियों के नियमितीकरण के लिए कानून लाया गया है। सवाल यह उठता है कि क्या अवैध कालोनियों का निर्माण और फिर उनका नियमितीकरण सरकार और उसके तंत्र का कोई सोचा समझा लाभकारी व्यवसाय है। किसी भी अवैध कार्य को नियमित करने की प्रक्रिया अपवाद स्वरूप एक बार हो मान्य हो सकती है। इसको बार-बार करने से क्या हम अवैध गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दे रहे हैं। सरकारी तंत्र जिसकी जिम्मेदारी है कि वह अवैध गतिविधियों को रोके उसकी जवाबदेही तय करना क्या सरकार का दायित्व नहीं है। ऐसी स्थिति किसी भी सरकार समाज और शहर के विकास के लिए कतई उचित नहीं है।


bpl 2 (1)शहरी विकास के लिए सबसे पहली आवश्यकता मास्टर प्लान की है। इसी से जुड़ा हुआ दूसरा विषय है जिसमें अवैध कालोनियों का विकास होता है और फिर उनका नियमितीकरण किया जाता है। मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने नगर पालिका विधि संशोधन विधायक मंजूर कर अवैध कॉलोनी का नियमितीकरण करने का रास्ता साफ किया है प्रदेश के बड़े शहरों भोपाल इंदौर ग्वालियर जबलपुर में ही 6000 अवैध कालोनियां हैं। अवैध कालोनियां क्यों बनती है सबसे पहले इस पर सोचा जाना चाहिए और उसको रोकने की सुनिश्चित व्यवस्था होना चाहिए । जो सरकार शहर का मास्टर प्लान नहीं बना सकती उसमें अवैध कालोनियां विकसित होने से रोकने का बल कहां से आएगा?

 मध्य प्रदेश जब से बना है तब से ही झुग्गी झोपड़ी और अवैध कॉलोनी बनने का सिलसिला चलता रहा है। पहले भी सभी मुख्यमंत्रियों ने राजनीतिक लाभ के लिए झुग्गी झोपड़ियों को मकान देने की योजनाएं चलाई है। योजनाएं तो पूरी हो गई लेकिन झुग्गी झोपड़ी आज भी जहां की तहां है। इसी प्रकार अवैध कालोनियों का नियमितीकरण पहले भी किया जा चुका है और आज फिर कैबिनेट को अवैध कालोनियों की नियमितीकरण का कानून लाना पड़ा। ऐसा क्यों होता है क्या केवल वोट और राजनीति के लिए गवर्नमेंट्स काम कर रही हैं?

 bpl 3सरकार ने इस बार जो कानून बनाया है उसमें अफसरों और कॉलोनाइजर को सजा का प्रावधान किया है। क्या सजा का प्रावधान सरकार द्वारा जिस तिथि को पहले अवैध कालोनियों का नियमितीकरण किया गया था उस तारीख से लागू नहीं किया जाना चाहिए। कालोनियों के विकास और शहरीकरण से जुड़ा जो सरकारी तंत्र है उसे सजा से क्यों बचाया जाता है? अवैध कालोनियों के नियमितीकरण के लिए कैबिनेट से पारित कानून में जैसे कॉलोनाइजर पर एफ आई आर का प्रावधान है वैसे ही अफसरों के विरुद्ध भी होना चाहिए और यह प्रावधान उस तिथि से प्रभावशील लेना चाहिए जिस तिथि को पहले कानून बनाकर कालोनियों को नियमित किया गया है। 

सरकारी तंत्र कॉलोनाइजर और राजनीतिक तंत्र का गठजोड़ अपने-अपने स्वार्थ के लिए शहर को कुर्बान कर रहे हैं। यह अलग बात है कि जब भी शहर की मौत होगी तब उसमें वह भी शामिल होंगे लेकिन आज मिल रहा लाभ शायद यह सोचने का मौका नहीं दे रहा है कि शहर और प्रकृति के साथ ही उनका भी वजूद है। नदियों और तालाबों को मरते हुए आज हम सब देख रहे हैं और उस पर चिंता व्यक्त करने का प्रहसन कर रहे हैं लेकिन जहां हमारे हाथ में कुछ करने का है वहां हमारे हाथ कुछ और करने में लगे हुए हैं। बड़ी आबादी शहरों की तरफ आ रही है। शहरों पर दबाव बढ़ रहा है। शहरों के नियोजन के प्रति सरकारों को और अधिक गंभीरता तथा ईमानदारी से काम करना होगा।

Priyam Mishra



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