International Tiger Day 2021: बाघों ने निभाई जिम्मेदारी, अब जंगल बचाना हमारी जिम्मेदारी 

विश्व बाघ दिवस (29 जुलाई) के मौके पर वन्यजीव और पर्यावरण विशेषज्ञों ने क्या कहा 

भोपाल के पास के वन क्षेत्र में दो बाघों ने अपने परिवार को 20 तक बढ़ा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी की है। अब हमारी बारी है। भोपाल के जंगल और रातापानी वन्यजीव अभ्यारण्य, अगर हम लोग चाहें तो रिजर्व फॉरेस्ट का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। जब वन सुरक्षित होगा, तब कोई अतिक्रमण नहीं होगा, वन भूमि को पट्टे पर नहीं दिया जाएगा, वनों की कटाई बंद हो जाएगी और जल संसाधनों की रक्षा होगी। इससे सिर्फ बाघों को ही नहीं, बल्कि पूरी मानव जाति को फायदा होगा। विश्व बाघ दिवस (29 जुलाई) के मौके पर वन्यजीव और पर्यावरण विशेषज्ञों ने क्या कहा जानिए...

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बाघों ने निभाई ऐसी जिम्मेदारी

भोपाल का जंगल पथरीला है। यहां टाइगर रिजर्व जैसी कोई सुविधा नहीं है। जंगल आबाद है। अतिक्रमण की घटनाएं हो रही हैं। राजधानी को जंगल से जोड़ने वाली सड़कें हैं। फिर भी पिछले दस वर्षों में बाघों की आबादी बढ़ी है। 10 साल पहले केरवा हिल के मंडोरा के जंगल में टाइगर टी-1 और टाइगर टी-2 को स्थायी हलचल करते देखा गया था। ये रातापानी वन्यजीव अभयारण्य से आते हैं। अब इस जंगल में 20 से ज्यादा बाघ हैं। इनमें से सात बाघों की स्थायी आवाजाही होती है, बाकी के बाघ रातापानी वन्यजीव अभयारण्य और ओबेदुल्लागंज के जंगल से आगे तक फैले हुए हैं।


50 से ज्यादा बाघ रातापानी के जंगल में 

रातापानी वन्यजीव अभयारण्य के भूमि क्षेत्र में बाघ आबादी 50 से अधिक (वयस्क पुरुषों सहित) हो गई है और ये बाघ अब भोपाल से सटे जंगल में अपना क्षेत्र बना रहे हैं। पिछले एक साल में टाइगर टी-1 और टाइगर टी-21 समेत 12 बाघों की आवाजाही बढ़ी है। वन्यजीव विशेषज्ञ रातापानी वन्यजीव अभयारण्य में तेजी से बढ़ रही बाघों की आबादी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। 

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कोल्ड स्टोरेज में टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव

रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव 2008 में तैयार किया गया था। उसे दिल्ली भेज दिया। केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। राज्य सरकार ने आरक्षण की घोषणा की, जो उसने नहीं की। 2017 में बीच का रास्ता काट दिया गया और भोपाल, रातापानी और ओबेदुल्लागंज के जंगलों को जोड़कर वन्यजीव विभाग बनाने का प्रस्ताव रखा गया। 

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टाइगर टी-1 और टाइगर टी-2 लंबे समय से भोपाल के करीब हैं। इससे बाघों की संख्या बढ़ाने में काफी मदद मिली है। अब युवा बाघ घूम रहे हैं। भविष्य में बाघों की आबादी और बढ़ेगी। बाघों को सुरक्षित जंगल दिया जाना चाहिए।

- आर.के. दीक्षित, वन्यजीव विशेषज्ञ एवं सेवानिवृत्त वन अधिकारी

प्राकृतिक जल स्रोत जीवित है क्योंकि भोपाल से सटे जंगल में बाघ हैं। यह प्रकृति का नियम है कि जहां पानी प्रचुर मात्रा में होता है वहां बाघों की संख्या बढ़ती जाती है और जब तक बाघ रहता है तब तक जलाशय जीवित रहता है। वन को संरक्षित घोषित करने की आवश्यकता है।

- डॉ फैज खुदसर, वन्यजीव विशेषज्ञ नई दिल्ली

भोपाल संभवत: पहला राजधानी शहर है, जहां आसपास के जंगलों में बाघ घूमते हैं। जंगल को बचाने के साथ-साथ लोगों को वन्य जीवों के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। रातापानी और भोपाल समेत आसपास के जंगलों की रक्षा करने से बेहतर कुछ नहीं है।

-सुदेश बाघमारे, वन्यजीव विशेषज्ञ

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Priyam Mishra



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