कृषि उपज मंडियों की ई-अनुज्ञाओं में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट नहीं आ पाई: डॉ. नवीन जोशी

कृषि उपज मंडियों की ई-अनुज्ञाओं में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट नहीं आ पाई
सात आँचलिक कार्यालयों से प्रतिवेदन की प्रतिक्षा
दो रिमाइंडर भी हजम कर गये घोटालेबाज

डॉ. नवीन जोशी

Dr. Navin joshiभोपाल। प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में ई-अनुज्ञाओं में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट अभी तक भोपाल स्थित मंडी बोर्ड मुख्यालय में नहीं आ पाई हैं ,जबकि मुख्यालय दो बार इस संबंध में मंडी बोर्ड के सात आंचलिक कार्यालयों रीवा, जबलपुर, सागर, ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर एवं भोपाल को निर्देश दे चुका है

मंडी बोर्ड मुख्यालय ने 300 क्विंटल से अधिक मात्रा की ई-अनुज्ञाओं के सत्यापन के निर्देश दिये थे। पहले यह निर्देश जनवरी में जारी हुये और फिर मार्च माह में। लेकिन वर्तमान कोरोना महामारी के समय यह सत्यापन कार्य ठण्डे बस्ते में पड़ा हुआ है। दरअसल मंडी समितियों द्वारा 16 अगस्त 2019 से ई-मंडी अनुज्ञायें जारी करने का कार्य प्रारंभ किया था जिसमें 23 लाख 28 हजार 421 ई-अनुज्ञायें जारी की गईं और 1 करोड़ 67 लाख 38 हजार 382 भुगतान पत्रक जारी किये गये।
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ई-अनुज्ञा में कुछ ऐसी अनुज्ञायें भी जारी की गईं हैं जिनमें 300 क्विंटल से अधिक मात्रा की सिंगल अनुज्ञायें हैं। 300 क्विंटल से अधिक मात्रा की ई-अनुज्ञाओं में से 1 लाख 21 हजार 934, 400 क्विंटल से अधिक मात्रा की ई-अनुज्ञाओं में से 9 हजार 428 तथा 500 क्विंटल से अधिक मात्रा की ई-अनुज्ञाओं में से 2 हजार 964 अनुज्ञाओं का सत्यापन नहीं किया जा सका है तथा इन सभी 1 लाख 34 हजार 328 अनुज्ञाओं का सत्यापन करने के निर्देश आंचालिक कार्यालयों को दिये गये थे।

मंडी बोर्ड मुख्यालय ने आंचलिक कार्यालयों को उक्त संदर्भ में कहा था कि वे यह जांच कर लें कि क्या क्रेता और विक्रेता एक ही मंडी क्षेत्र के हैं? साथ ही यह भी जांच कर लें कि क्या इतनी बड़ी मात्रा को अंकित वाहन नंबर में परिवहन किया गया अथवा नहीं? आंचलिक कार्यालयों के अधिकारियों से कहा गया था कि यदि विपरीत परिस्थितियां पाईं गईं तो दोषिता का निर्धारण करते हुये स्पष्ट प्रतिवेदन भेजें। लेकिन अभी तक ये जांच प्रतिवेदन मुख्यालय में नहीं पहुंच पाये हैं।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि ई-अनुज्ञाओं के सत्यापन के निर्देश दिये गये थे। इनके जांच प्रतिवेदन फाईलों से ही देखकर बताये जा सकेंगे। अभी कोरोना महामारी के कारण कम कर्मियों की ही उपस्थिति है, इसलिये इनके बारे में सही स्थिति नहीं ज्ञात नहीं हो सकती है। सभी जांच प्रतिवेदन आने के बाद ही इन्हें उच्च स्तर पर निर्णय के लिये पुटअप किया जायेगा।

Priyam Mishra



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