ईश्वर और धर्म को नहीं मानना तक भारत में धर्म माना गया है -दिनेश मालवीय

ईश्वर और धर्म को नहीं मानना तक भारत में धर्म माना गया है

-दिनेश मालवीय
भारत दुनिया का सबसे अनूठा देश है. इसकी एक बहुत अनूठी बातों में से एक यह है कि यहाँ ईश्वर और धर्म को नहीं मानना भी एक धर्म माना गया है. यह महत्वपूर्ण बात श्री पृथ्वीराज और श्री पी. नरहरि ने अपनी पुस्तक “दि ग्रेट टेल ऑफ़ हिंदुइज्म” में लिखी है. कुल 165 पृष्ठ की इस छोटी-सी पुस्तक में लेखकों  ने सम्पूर्ण हिन्दू-दर्शन को इस तरह लिखा है कि गागर में सागर भरने वाली कहावत चरितार्थ हो गयी है. लेखकों का कहना है कि यह पुस्तक 10,000 घंटे से ज्यादा तक निष्पक्ष शोध के आधार पर लिखी गयी है. इससे वैदिक संस्कृति और सिन्धु घाटी सभ्यता के बीच खोई कड़ियों को जोड़ने में मदद मिलेगी.

लेखकों के अनुसार, दुनिया के लगभग सभी प्रमुख धर्मों के लोग भारत में रहते हैं. इस रूप में हमारा देश एक लघु संसार है. इसमें जहाँ अनेक विज्ञान सम्मत आस्थाएं और विश्वास हैं, वहीँ कुछ ऎसी मान्यताएँ भी हैं, जिन्हें अन्धविश्वास की श्रेणी में रखा जाता है. तथ्य और कथाएँ आपस में इतनी अधिक गुँथी हैं कि कई बार वास्तविकता को समझने में दिक्कत होती है.

पुस्तक में इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया गया है कि अपनी संस्कृति में बहुत अधिक विविधता और विभिन्नता, आस्थाएं और दर्शन होने के बावजूद भारत आज भी नयी जीवन शैली के लिए पश्चिम की तरफ देख रहा है. इसका कारण विचारों की कमी नहीं, बल्कि स्वयं पर विश्वास की कमी है. आत्मविश्वास में यह कमी धीरे-धीरे विकसित हुयी है. इसका बड़ा कारण अंग्रेज़ों द्वारा हमारी शिक्षा में की गयी साजिशें हैं. उनका मकसद भारत में अपनी हुकूमत को जारी रखना था.

Sadhak Np

पुस्तक में स्वामी विवेकानंद को उद्धृत किया गया है कि, “ कोई देश तभी समृद्ध या विकसित हो सकता है, जब उसकी संतानों के पास गर्व करने के लिये कुछ हो, या उन्हें अपने देश से प्रेम हो”. विवेकानंद का मकसद निश्चय ही हमारे गौरवशाली अतीत की बात कर रहे थे, ताकि  भारत की नयी पीढ़ी अपने देश के अतीत पर गौरव कर सके. ऐसे अतीत पर जिससे प्रेरणा लेकर वे वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनाने के लिए पूरी ताकत से काम कर सकें.

पुस्तक में स्पष्ट किया गया है कि भारत ऐसी भूमि है, जिसकी सभ्यता-संस्कृति को ऋषि-मुनियों ने तपस्या और स्वाध्याय से समृद्ध किया. भारत की सभ्यता इस्लाम, ईसाइयत और संयुक्त राष्ट्र संघ के अस्तित्व में आने से बहुत पहले से मौजूद है. भारत ने ही विश्व को “विश्व एक परिवार है” की अवधारणा दी. यह एक ऐसा देश है, जहाँ किसी विचार या विश्वास को कभी दबाया नहीं गया. यहाँ बुनियादी रूप से सारगर्भित हर तरह की विचारधारा का स्वागत किया गया.

भारत एक ऐसा देश है,जहाँ पृथ्वी ग्रह पर आधुनिक मानव द्वारा उठाये गए कदम बहुत पहले उठाये जा चुके हैं. इसे देश के पास आनंद, भय, प्रेम और जैसे महत्वपूर्ण भावों को व्यक्त करने वाले 30 हज़ार साल से पुराने शैलचित्र मध्यप्रदेश के भीमबैठका में उपलब्ध हैं. यहीं मनुष्य ने खाद्यान्न उत्पादन करना और उसे भंडारित करना सीखा. इसी देश में सबसे प्राचीन मानवीय रहवासों के चिन्ह हैं, जो आगे चलकर समाज के रूप में विकसित हो गये. यहीं सिन्धु घाटी सभ्यता का विकास हुआ, जो यह विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में शामिल है.

भारत ने न केवल ब्रह्माण्ड के गूढ़ ज्ञान को उजागर  किया, बल्कि इस ज्ञान के प्रसार के लिए संस्थाएँ भी स्थापित कीं. इनमें गुरु-शिष्य परम्परा सबसे प्रमुख है. इस देश की संस्कृति इतनी उदार है कि यहाँ कहा गया कि, “सिर्फ संकीर्ण मन वाले लोग यह कह कर लोगों में भेद करते हैं कि यह अपना है और यह पराया. उदार चित्त वाले लोग सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानते हैं”.

इस देश ने अनेक क्रूर आक्रमणों का सामना किया, अनेक उत्पीड़न झेले और अनेक युद्ध भी लड़े, लेकिन इसकी सांस्कृतिक जड़ें हमेशा सुरक्षित बनी रहीं. इस देश का मूल चिन्तन इतना उदार है कि उसमें हर विचारधारा, दर्शन और वैज्ञानिक खोज का बाँह फैलाकर स्वागत किया जाता है. इसमें उन विचारधाराओं तक का स्वागत किया गया है, जिनके साथ कई वर्षों तक हमारे सौहाद्रपूर्ण सम्बन्ध नहीं रहे.

यह चिन्तन पश्चिमी संस्कृति से एकदम अलग है. वहाँ गेलीलियो, सुकरात, आर्कमिडीज जैसे असाधारण प्रतिभाशाली लोगों को मृत्यु और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. इसके विपरीत हमने अपने वैज्ञानिकों और नवाचारी लोगों को ऋषि या महर्षि कहा. यहाँ तक कि चार्वाक के नास्तिक दर्शन को भी हमने अपने छह दर्शनों में स्थान दिया. इस देश की उदारता व्यापक है, यह इस बात से ही सिद्ध होता है कि भारत के केरल में ईसाइयों से सबसे पुराने रहवास मौजूद हैं. मदीना के बाद दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद केरल में एक हिन्दू राजा के आदेश पर निर्मित हुयी. इस देश में यहूदी दो हज़ार साल से अधिक समय से शान्ति और सद्भाव के साथ रह रहे हैं. पारसियों ने भारत को अपना घर बनाया. यहाँ ऐसे भी समुदाय रहते हैं, जो रावण की मृत्यु का शोक मानते हैं, जो भारतीय माइथोलॉजी में सबसे बड़ा खलनायक माना जाता है. ये समुदाय उसके ज्ञान की खुलकर प्रशंसा करते हैं.


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