कब और किससे बात नहीं करनी चाहिए -दिनेश मालवीय

कब और किससे बात नहीं करनी चाहिए

-दिनेश मालवीय

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. उसके लिए एक-दूसरे से संपर्क, परस्पर सहयोग और वार्तालाप के बिना रहना संभव नहीं है. बातचीत करना बहुत जरूरी है, क्योंकि यही हमारे विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम है. लेकिन हमारे बुजुर्गों और शास्त्रों में इस सम्बन्ध में कुछ हिदायतें दी हैं, जिनका पालन कर हम सुखी रह सकता हैं और अनेक तरह की परेशानियों से बच सकते हैं.

बुजुर्गों ने कहा है कि असमय नहीं बोलना चाहिए. देवगुरु बृहस्पति भी असमय में बोलें तो उनकी बुद्धि का अनादर होता है, तो फिर साधारण व्यक्ति की तो बात ही क्या है. साथ ही अपात्र के सामने बोलना भी व्यर्थ ही होता है. बोलचाल में अक्सर यह देखा गया है कि सामने वाला आपकी बात सुनता हुआ तो लगता है, लेकिन वास्तव में वह यह सोच रहा होता है कि उसे क्या बोलना है. बातचीत बहुत बार बहस का रूप ले लेती है. लिहाजा, जो वास्तविक रूप में जिज्ञासु हो और शुद्ध ह्रदय से प्रश्न करे उसीका उत्तर देना चाहिए. अपना ज्ञान बघारनेया दूसरों को प्रभावित करने के लिए बोलना बिलकुल उचित नहीं है. खास कर अपात्र व्यक्ति के सामने तो सिर्फ काम की बात करना चाहिए.

कोई मूर्ख यदि कोई ऎसी बेमतलब की बात भी करे, जिसका आपके पास जबाव हो, तब भी चुप रह जाना ही उचित है. विचार विमर्श समान ज्ञान और बुद्धि के स्तर वाले व्यक्तियों के बीच ही उचित होता है. मूर्खों के बीच सिर्फ विवाद होता है. आपका सामना किसी मूर्ख से हो जाए तो मौन ही रहना अधिक अच्छा है.

जो लोग ओछे होते हैं, वे बात का मर्म तो समझ नहीं पाते और उनमें इसे अपने तक सीमित रखने की योग्यता भी नहीं होती. इस तरह के किसी अपात्र से अपनी गुप्त बातों की चर्चा भी नहीं करनी चाहिए. वह उसे इस तरह प्रचारित कर देगा कि आपको नुकसान ही नुकसान होना है.

हमारे शास्त्रों में अंत में एक बात आवश्यक रूप से कही जाती है कि इसकी चर्चा किसी ऐसे व्यक्ति से न की जाए जो इसमें श्रद्धा या विशवास विश्वास नहीं करता.

बिन माँगी सलाह न देने की भी सीख दी गयी है. इसका सामने वाला कोई मोल नहीं समझता. इसका कोई असर भी नहीं होता. बुद्धिमान व्यक्ति के लिए यही उचित है कि वह पूछे जाने पर ही कोई उत्तर दे. छल या मक्कारी से पूछने पर जानते हुए भी कोई उत्तर न देना ही उचित है. शास्त्रों में कहा गया है कि ज्ञान की जिज्ञासा वाले व्यक्ति को ज्ञानी जन के पास जाकर छल से रहित होकर अपनी जिज्ञासा प्रकट करनी चाहिए. ऐसा होने पर वे परम गोपनीय और रहस्यमयी बातें भी आपको बता देंगे. कपट से भरे हुए प्रश्नों परवे या तो मौन रह जायेंगे, या कुछ भी आसपास की बातकर आपको चलता कर देंगे.

बहुत ज्यादा बोलने का भी निषेध किया गया है. कहा गया है कि इस प्रकार बोलने वाले बनें कि सभा में लोग आपके बोलने का इंतज़ार करें, आपके चुप हो जाने का नहीं. इसका मतलब यह नहीं है कि आप मुँह में दही जमा कर बैठ जाएँ. तात्पर्य सिर्फ इतना ही है कि असमय, अनर्गल और व्यर्थ बातें न करें. अपनी बात को कम से कम शब्दों में व्यक्त किया जाए. जो लोग कम शब्दों में अपनी बात नहीं कह सकते वे बहुत अधिक शब्दों में भी नहीं कह पाएँगे.

बोलते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि आप किससे बोल रहे हैं. कहीं आप उस व्यक्ति को तो किसी विषय पर ज्ञान नहीं पेल रहे, जो उस विषय का पहले से ही विशेषज्ञ हो.

तो आइए, इन बातों को सही सन्दर्भ में समझकर अपने बोलचाल के तौर-तरीकों में आवश्यक बदलाव लेकर अपनी वाणी को अधिक प्रभावी बनाने की ओर अग्रसर हों.

DineshSir-01-B

NEWS PURAN DESK 1



हमारे बारे में

न्‍यूज़ पुराण (PURAN MEDIA GROUP)एक कोशिश है सत्‍य को तथ्‍य के साथ रखने की | आपके जीवन में ज्ञान ,विज्ञान, प्रेरणा , धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रकाश के विस्‍तार की |
News Puran is a humble attempt to present the truth with facts. To spread the light of knowledge, promote scientific temper, inspiration, religion and spirituality in your life.


संपर्क करें

0755-3550446 / 9685590481



न्‍यूज़ पुराण



समाचार पत्रिका


श्रेणियाँ