धन कमाना पाप नहीं पुण्य है बशर्ते……………… गरीबी से अमीरी की ओर

अतुल विनोद-

एक बात हमेशा सोचने में आती है कि क्या वाकई पैसा कमाना बुरी बात है| वर्षों से पैसे को लेकर निम्न और मध्यम वर्ग में जिस तरह की धारणाएं बनाई गई है| उससे एक आम आदमी के जेहन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है|  हम सबको खुशी चाहिए समृद्ध जीवन चाहिए| एक सज्जन ने कहा था कि पैसा खुदा तो नहीं लेकिन ख़ुदा से कम भी नहीं| समृद्ध जीवन के लिए पैसा तो चाहिए ही| 

अपनी गरीबी या तंगहाली पर खुश होना कोई बुद्धिमानी का काम नहीं है| हम सब इस दुनिया में अच्छा जीवन जीने के लिए आए हैं, हर स्तर पर| धन की कमी हमें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी  पीछे ले जाती है| इसलिए कहा गया कि भूखे पेट में भजन न होय गोपाला | जीवन तंगहाली तंगी कमी गरीबी भुखमरी का नाम नहीं है जीवन समग्रता से जीने का नाम है| और हम सब को यह अधिकार है कि हम अच्छी तरह से जियें| 

पैसा कमाने के लिए पैसे से दोस्ती होनी चाहिए, किसी से दुश्मनी करके उसे अपनी तरफ आकर्षित नहीं किया जा सकता| धन और कुछ नहीं है बल्कि ऊर्जा का एक रूपांतरण है| आदान-प्रदान के लिए पैसा पूरी दुनिया में सर्वमान्य माध्यम है, विश्व की अर्थव्यवस्था पैसे पर ही टिकी हुई है| पैसों को गंदा कहकर या बुरी नजर से देख कर पैसा नहीं कमाया जा सकता|  मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि गरीबी के पीछे एक बड़ी वजह लोगों की पैसे के प्रति गलत धारणा है| गरीबी सद्गुण नहीं है, ईश्वर आपको गरीब नहीं देखना चाहता| पैसों ने इतिहास में बड़ी-बड़ी बुराइयां पैदा की है लेकिन पैसे से ही  अच्छाइयां भी पनपी है| 

पैसा बंदूक है अच्छे हाथों में होगा तो लोगों की भलाई के काम में आएगा और बुरे हाथों में होगा तो अपराध बढ़ाएगा| पैसा प्रकृति का ही एक तत्व है वह कभी भी बुरा नहीं हो सकता उसका बुराइयों में इस्तेमाल करना ना करना हमारे हाथ में है|

पैसा साधन है साध्य नहीं है| जिस व्यक्ति ने पैसे को अपने सर पर सवार कर लिया वह फिसल गया, लेकिन जो पैसे पर सवार होकर आगे बढ़ गया उसने अपनी जिंदगी को सार्थक कर लिया| पैसे को इकट्ठा करके तिजोरी में बंद कर देना, पैसे का सही इस्तेमाल नहीं है| सारी जिंदगी पैसा कमाने में लगा कर अंत समय में बीमारियों से मर जाना भी बुद्धिमानी नहीं है| ईश्वर सबको पर्याप्त देता है|  आलसी अजगर को भी इस दुनिया में पर्याप्त भोजन मिलता है| 

आप अपने जीवन में कितनी समृद्धि हासिल करते हैं इसके पीछे आपकी सोच, भावनाएं, संस्कार, प्रारब्ध, परवरिश,  माइंड प्रोग्रामिंग अहम भूमिका निभाते हैं| पैसा कमाने से जुड़े सकारात्मक आत्म-सुझाव  समृद्धि के रास्ते में आने वाली मानसिक बाधाओं को कुछ हद तक हटाते हैं| लेकिन जब तक शब्दों के मानसिक दोहराव के साथ धन के प्रति भावनाएं सकारात्मक नहीं होंगी अब तक अच्छे नतीजे नहीं मिलेंगे| संस्कार  और प्रारब्ध को कड़ी मेहनत से बदला जा सकता है|  लेकिन सोच, भावनाएं, माइंड सेट को सकारात्मक विचारों के निरंतर अभ्यास से ही चेंज किया जा सकता है|

ऊपर से हम अपने आप को धनी कह रहे हैं और अंदर से आवाज आ रही है कि तुम तो कंगाल हो|  मन मानने को तैयार नहीं है कि तुम अमीर हो या अमीर हो सकते हो| क्योंकि मन ने गरीबी ही देखी है गरीबी के विचार ही पाले हैं| चेतन के साथ अवचेतन मन तक बात पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास करना पड़ता है| अच्छे विचार दोहराने के साथ साथ  संपन्नता से जुड़े हुए दृश्यों को भी एक फिल्म की तरह आंखें बंद करके अपने जहन में लेकर आइए|

पैसे कमाने को लेकर आपके अंदर दोहरी मानसिकता नहीं होनी चाहिए|  किसी तरह का द्वन्द नहीं होना चाहिए| आपका दृष्टिकोण यदि खुला होगा तो संपन्नता आपके कदम चूमेगी| असफलता के डर को अपने ऊपर हावी मत होने दीजिए|  आपके अंदर एक आध्यात्मिक शक्ति है जिसे इस दुनिया में आत्मा कहा जाता है|   इस आत्मशक्ति पर भरोसा कीजिए|

आप खुद आगे बढ़ाना चाहते हैं और दूसरों को नीचा या गरीब देखना चाहते हैं| यह भी विरोधाभासी बातें हैं यह भी आपकी संपन्नता की राह में बाधा खड़ी करती हैं| दूसरों की गरीबी और विपन्नता का कभी मजाक ना उड़ायें और किसी की संपन्नता से कभी जले नहीं|दूसरों के प्रति दया, सहानुभूति, प्रेम और सद्भावना रखें| जो आप खुद के लिए चाहते हैं वही दूसरों के लिए भी चाहें| अपनी प्रगति के साथ दूसरों की प्रगति तरक्की और उनकी खुशहाली को भी महत्व दें|

यदि जीवन में बहुत ज्यादा आर्थिक कठिनाइयां हैं तो अपने आप को उस परमात्मा के आगे समर्पित कर दें|  कभी ना कभी एक अच्छी सुबह जरूर आती है| यदि आप पैसे को लेकर पॉजिटिव सोच रहे हैं लेकिन आपके जहन में किसी अन्य कमी को लेकर लगातार चिंता चल रही है यह भी आपकी संपन्नता की राह में बाधा है|  पैसा कमाने के लिए सिर्फ पैसे को लेकर प्रचुरता की सोच काफी नहीं है जब भी आप किसी खास क्षेत्र में संपन्न बनना चाहते हैं तो आपको अन्य क्षेत्रों में भी अपने आप को उच्च स्तर पर देखना होगा|अपने स्वास्थ्य, परिवार, रिश्ते, हर स्तर पर जब आप अपने आप को ऊंचाई पर देखेंगे और उसके लिए परमात्मा को धन्यवाद देंगे तो पैसे के मामले में भी आप अच्छी स्थिति में आ जाएंगे|

लगातार प्रगति करना इंसान का धर्म है| संस्कार और प्रारब्ध क्या कहते हैं उसकी चिंता करना आपका काम नहीं है आपका काम है अपनी सीमा के प्रतिबंधों को पूरी तरह से खत्म कर देना|आप की मनोदशा पर बहुत कुछ निर्भर करता है|खुश होने में तो कोई पैसा नहीं लगता| चेहरे पर मुस्कुराहट लेकर आई है भले ही जेब खाली हो यह बहुत मायने रखता है| निराशावादी लोगों के पास पैसा और खुशी नहीं आती|

भगवान पर भरोसा रखिए| उस पर भरोसा है तो फिर आपके संस्कार भी क्षीण हो सकते हैं और प्रारब्ध भी बदल सकता है|  अपने काम में पूरी रुचि रखिए और उसके पूरे होने की भावना कीजिए| प्रार्थना कीजिये सच्चे दिल से महसूस की गई प्रार्थना हमेशा असर करती है| 

ATUL VINOD



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